रिपोर्ट, काजल जाटव: भारतीय लोक और भक्ति गीतों की पहचान बन चुकी हैं मैथिली ठाकुर। लोग उन्हें पसंद करते हैं। इस बार वे अपनी गायकी से नहीं, बल्कि पार्टी में शामिल होने के बारे में चर्चा में हैं।

बिहार चुनाव से पहले सोशल मीडिया पर खबरें आ रही हैं कि मैथिली ठाकुर को बीजेपी पार्टी का टिकट मिल सकता है। मैथिली ने कहा है — “मैं ट्विटर पर खबरें देख रही हूं। मैंने विनोद तावड़े और नित्यानंद राय की पोस्ट भी देखीं। मुझे पता नहीं है कि आगे क्या होगा। जब सरकार की तरफ से कुछ कहा जाएगा तो सब साफ हो जाएगा। मैं भी इंतजार कर रही हूं।”

उनके इस बयान के बाद लोग यह सोचने लगे हैं कि आखिर यह सब कहां से शुरू हुआ और क्या वे सच में राजनीति में कदम रख रही हैं।

कौन हैं मैथिली ठाकुर?

मैथिली का जन्म 25 जुलाई 2000 को बिहार के मधुबनी में हुआ था। वे मिथिला की परंपरा से हैं। उनका परिवार संगीत में अच्छा है। उनके पिता रमेश ठाकुर संगीत शिक्षक हैं। उन्होंने घर पर ही उन्हें शास्त्रीय संगीत सिखाया।

2017 में उन्होंने टीवी पर शो ‘राइजिंग स्टार’ में भाग लिया। वे उस दौरान उपविजेता रहीं। तब से उनके साधारण स्वभाव और गायकी ने देश में नाम बनाया।

अब वे सिर्फ गायिका नहीं हैं, बल्कि भारतीय संस्कृति की पहचान हैं। वे अपने भाइयों रिशव और अयाची के साथ मिलकर लोक, भक्ति और शास्त्रीय संगीत को नए तरह से दर्शकों तक पहुंचा रहे हैं।

मैथिली अपने गाने से भारतीय परंपरा और धार्मिकता दिखाती हैं। वह मीरा, कबीर आदि संत कवियों की बातें लोगों तक पहुंचाती हैं।

उनके यूट्यूबचैनल पर बहुत सारे भक्तिगीत और लोकसंगीत हैं। वह सिर्फ गाते नहीं हैं, बल्कि संस्कृति को जीते हैं। उनका परिवार अपने घर का नाम ‘थाकुर परिवार म्यूजिक’ रखता है। यह भी आज के समय में प्रसिद्ध हो गया है।

चुनाव की चर्चा कैसे शुरू हुई?

हाल ही में बीजेपी के नेताओं विनोद तावड़े और नित्यानंद राय ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किए। इन पोस्ट का असर हुआ कि लोग समझने लगे कि शायद उन्हें बिहार के चुनाव के लिए टिकट मिल सकता है।

मैथिली ने इन खबरों की पुष्टि या खंडन नहीं किया। लेकिन उन्हें इस बात में रुचि दिखाई है। वह अभी इस पूरे घटनाक्रम को देख रही हैं।

कहाँ से चुनाव लड़ सकती हैं मैथिली ठाकुर?

मीडिया रिपोर्ट्स कहती हैं कि बीजेपी मैथिली ठाकुर को उनके घर इलाके मधुबनी या उसके आसपास की जगह से चुनाव लड़वाना चाहती है। कुछ रिपोर्टें कहती हैं कि उन्हें मधुबनी विधानसभा सीट या अलीनगर (दरभंगा क्षेत्र) से टिकट मिल सकती है।

मैथिली ठाकुर खुद कह चुकी हैं कि अगर वे राजनीति में आती हैं, तो शुरुआत अपने गांव और जमीन से करना चाहेंगी। इसका मतलब है कि उनकी पहली पसंद मधुबनी ही है।

यह बात क्यों अहम है?

अगर मैथिली ठाकुर राजनीति में आ जाती हैं, तो ये सिर्फ किसी सेलिब्रिटी का कदम नहीं होगा। ये सांस्कृतिक आंदोलन की शुरुआत हो सकती है।

  • सांस्कृतिक और राजनीति का मेल:मैथिली का राजनीति में आना दिखाता है कि भक्ति, लोककला और संस्कृति भी लोगों की सेवा कर सकते हैं।
  • महिला सशक्तिकरण:बिहार की राजनीति में लड़कियों और महिलाओं की भागीदारी अभी कम है। मैथिली जैसी प्रसिद्ध, शिक्षित और संस्कृति से जुड़ी महिला आना एक अच्छा उदाहरण हो सकता है।
  • स्थानीय पहचान और प्रतिनिधित्व:अगर वे मधुबनी से लड़ती हैं, तो वह इलाके का प्रतिनिधित्व करेंगी। इससे जनता की आवाज़ लोकसभा या विधानसभा में सुनी जाएगी।
  • सकारात्मक राजनीति:मैथिली की छवि धार्मिक, नैतिक और कलाकार की है। लोगों को उम्मीद है कि अगर वे राजनीति में आती हैं, तो वो शुचिता और संस्कृति को राजनीति का हिस्सा बनायेंगी।

मैथिली ठाकुर आज का समय में भारत की सांस्कृतिक पहचान हैं। वो लोकगीत गाती हैं और अब सोचते हैं कि वे जनता की सेवा का नया शुरूआत करें।

उन्होंने अभी चुनाव लड़ने की बात नहीं कही है, ना तो साफ किया है। लेकिन अगर वह मधुबनी या अपने मिथिला इलाके से चुनाव लड़ती हैं, तो यह बिहार की राजनीति में संस्कृति और युवा ऊर्जा का संगम होगा।

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