लेखिका: ऋषिता गंगराड़े, अग्नि पत्रिका
एनसीईआरटी (राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद) भारत के स्कूली पाठ्यक्रम का आधार स्तंभ है। हर बार जब पाठ्यक्रम में कोई बदलाव होता है, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है — क्या यह बदलाव छात्रों की शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए किया गया है, या इसके पीछे कोई वैचारिक या राजनीतिक एजेंडा छुपा है?
हाल ही में एनसीईआरटी द्वारा 6वीं से 12वीं कक्षा तक के कई विषयों में संशोधन किए गए हैं, जिनमें इतिहास, राजनीति विज्ञान, समाजशास्त्र और हिंदी जैसे विषय प्रमुख हैं। इन बदलावों ने शिक्षाविदों, छात्रों, अभिभावकों और राजनीतिक दलों के बीच तीखी बहस छेड़ दी है।
क्या बदला गया है पाठ्यक्रम में?
- इतिहास की किताबों में मुगलों, स्वतंत्रता संग्राम, और 2002 गुजरात दंगों से संबंधित कुछ अध्याय हटाए गए हैं।
- राजनीति विज्ञान में धर्मनिरपेक्षता, लोकतंत्र की चुनौतियाँ, और नागरिक अधिकारों के कई संदर्भों को संक्षिप्त किया गया है।
- हिंदी साहित्य में कुछ प्रसिद्ध लेखक और उनकी रचनाएँ हटाई गई हैं या उनका स्थान बदला गया है।
- विज्ञान और पर्यावरण से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण सामाजिक संदर्भों को सीमित किया गया है।
स्रोत सूची (References):
- The Hindu – Mughal Chapters Removed from Class 12 Textbooks (June 2024)
- Indian Express – Dissent Chapters Cut from Political Science (June 2024)
- The Wire – Mahadevi Verma Essays Dropped (June 2024)
- PIB – NCERT Clarification on Syllabus Rationalisation (June 2024)
विवाद क्यों खड़ा हुआ?
- इतिहास को ‘फिल्टर’ करना:आलोचकों का कहना है कि इतिहास के कुछ हिस्सों को हटाकर एक खास विचारधारा को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है। मुगलों और मुस्लिम शासकों से जुड़े अध्यायों को हटाना सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की ओर इशारा करता है।
- राजनीति विज्ञान की ‘मौन क्रांति’:लोकतंत्र, विरोध, और नागरिक अधिकारों की अवधारणाओं को कम करने से छात्रों की आलोचनात्मक सोच कमजोर हो सकती है। यह भविष्य के जिम्मेदार नागरिकों के निर्माण में बाधा बन सकता है।
- साहित्य का सीमांकन:हिंदी और अन्य भाषाओं की समावेशी रचनाएँ हटाकर विविधता को सीमित किया जा रहा है। यह भाषा और संस्कृति की समझ को प्रभावित कर सकता है।
सरकार और एनसीईआरटी का पक्ष
एनसीईआरटी का कहना है कि:
- कोविड के बाद छात्रों पर पढ़ाई का बोझ कम करना जरूरी था।
- बार-बार दोहराई जा रही सामग्री को हटाया गया है।
- बदलाव विशेषज्ञों और समितियों के सुझावों के आधार पर किए गए हैं।
सरकार का भी यही तर्क है कि यह शिक्षा सुधार का हिस्सा है और इससे विद्यार्थियों को बेहतर समझ और कम मानसिक तनाव मिलेगा।
शिक्षा या एजेंडा?
यह सवाल अब भी बहस का विषय बना हुआ है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि:
- यदि बदलाव शिक्षा के स्तर को सुधारने के उद्देश्य से हैं, तो यह स्वागत योग्य है।
- लेकिन यदि इसका उद्देश्य एकतरफा सोच बनाना या छात्रों को कुछ सच्चाइयों से दूर रखना है, तो यह शिक्षा प्रणाली के लिए खतरनाक संकेत है।
एनसीईआरटी पाठ्यक्रम में बदलाव एक गंभीर और संवेदनशील मुद्दा है। शिक्षा केवल किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि सोचने, सवाल करने और समझने की प्रक्रिया है। यदि पाठ्यक्रम में बदलाव उस सोच को सीमित करने के लिए किए जा रहे हैं, तो यह देश के भविष्य के साथ अन्याय होगा।
शिक्षा का उद्देश्य एक स्वतंत्र, तर्कसंगत और संवेदनशील नागरिक बनाना होना चाहिए — न कि केवल परीक्षा पास करने वाले विद्यार्थी।
