ऋषिता गगंराडे़

प्रतिबंध की पृष्ठभूमि और दायरा
  • भारत सरकार ने जुलाई 2022 में 19 प्रकार के सिंगल यूज़ प्लास्टिक आइटम जैसे थिन बैग, स्ट्रॉ, कटलरी, थर्मोकोल आदि पर राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिबंध लगाया timesofindia.indiatimes.com+5aajtak.in+5navbharattimes.indiatimes.com+5।
  • ये प्रतिबंध “विनिर्माण, आयात, भंडारण, बिक्री और उपयोग” पर लागू हैं, जिसके उल्लंघन पर सात साल तक की जेल और 1 लाख रुपये तक का जुर्माना संभव है aajtak.in।
सख्ती – कानून बनाम जमीन पर लागू होना
  • स्थानिक असमानता: कुछ राज्यों (महाराष्ट्र, कर्नाटक, केरल आदि) में कड़े प्रतिबंध और निगरानी देखी जा रही है। केरल हाईकोर्ट ने चुनिंदा क्षेत्रों और आयोजनों में SUP पर विशेष प्रतिबंध लगा दिया, जो अक्टूबर 2025 से लागू होगा । वहीं तेलंगाना में एक पूरा प्रतिबंध लगाने की मांग उठ रही है timesofindia.indiatimes.com+3aajtak.in+3reddit.com+3।
  • पालिकाओं की भूमिका: नागपुर में 2018 से अब तक कुल ₹2.68 करोड़ का जुर्माना वसूल कर 75 टन प्लास्टिक जब्त हुआ, लेकिन 2024–25 में जब्ती सिर्फ 1.7 टन रही, जो गिरावट का संकेत है timesofindia.indiatimes.com।
  • न्यायिक और निगमित अनुपालन: FIR बहुत कम दर्ज होती है, और अक्सर जुर्माने से काम चल जाता है, जिससे उचित न्यायिक प्रक्रिया ध्वस्त होती दिखती है ।
असर – क्या बदल पाया?
  • व्यापक अनुपालन नहीं: दिल्ली में बंदी के 3 साल बाद भी 88% बाजारों में SUP का उपयोग जारी है timesofindia.indiatimes.com+14leadershipinsustainability.com+14navbharattimes.indiatimes.com+14
  • साफ-सफाई के उपाय अधूरे: विजयवाड़ा में 2024–25 की सफाई में 78% वेस्ट सिंगल यूज़ प्लास्टिक था, जबकि शहर में जुर्माने या प्रतिबंधित उत्पादों पर उचित कार्रवाई का अभाव था aajtak.in+1timesofindia.indiatimes.com+1
चुनौतियाँ और आलोचनाएँ
  1. भारत में बड़े प्लास्टिक उद्योगों पर रोक नहीं: प्रतिबंध केवल छोटे उपभोक्ताओं (स्ट्रीट वेंडर, किराने वाले) तक सीमित, जबकि इंडस्ट्रीज सहजता से उत्पादन जारी रख रही है।
  2. ईपीआर प्रणाली कमजोर: अभी की नागरिकता आधारित Extended Producer Responsibility मॉडल प्रभावहीन, मल्टी‑लेयर पैकेजिंग अभी अनियंत्रित है।
  3. पर्यावरणीय विकल्पों की कमी: बायोडिग्रेडेबल विकल्प महंगे और उपलब्धता में कमी वाले हैं; MSPs वेंडर्स और उपभोक्ताओं के लिए असहज साबित हो रहे हैं।
  4. जन जागरूकता में कमी: प्रारंभिक महीनों में शिकायतें सक्रिय थीं, लेकिन धीरे-धीरे इसकी संख्या 85% तक गिरी। CPCB की SUP-CPCB ऐप को केवल लगभग 5,000 डाउनलोड मिले, और यह उपयोगकर्ता-अनुकूल नहीं orfonline.org+1scroll.in+1।
सुधार के प्रस्ताव
  • टीयर‑1 से 3 स्तर पर कड़े नियंत्रण: उत्पादन, बिक्री और उपयोग के सभी स्तरों पर निगरानी और कार्रवाई।
  • उद्योग अनुपालकों पर सजा: छोटे व्यवसायों के साथ-साथ बड़े पैकेजिंग निर्माताओं को भी जिम्मेदार बनाना आवश्यक।
  • सबसिडी और विकल्प सुलभता: बायोडिग्रेडेबल और पुन: प्रयुक्त उत्पादों को किफायती और आसान बनाना; जैसे पैन-इंडिया “विकल्प स्टोर”, “भरने योग्य मॉडल” आदि dialogue.earth+5orfonline.org+5timesofindia.indiatimes.com+5
  • स्थायी जन जागरूकता: स्कूल, कॉलेज और मीडिया चैलेंज के माध्यम से व्यवहार परिवर्तन को गति देना। CPCB ऐप जैसे टूल्स को उपयोगी, सहज और प्रभावी बनाना।
  • कड़ी निगरानी एवं डेटा पारदर्शिता: FIR, जुर्मानें, बंदी की संख्या और कार्रवाई की समय-सीमा सार्वजनिक रिपोर्टों में उपलब्ध हो।

कानून तो मजबूत है, पर जमीन पर सख्ती और असर कमजोर है – इसे बदलने के लिए:

  • नियम-निगरानी से ही बदलाव संभव है: जुर्माने, FIR, लाइसेंस जब्त जैसी कार्रवाई तेज़ होनी चाहिए।
  • अल्टरनेटिव विकल्पों के बिना प्रतिबंध अधूरा: चाहिए सब्सिडी, प्रोत्साहन, स्थानीय उत्पादन।
  • जन सहभागिता और सरकारी जवाबदेही: केवल कागज़ी प्रयासों के बजाय जनता, मीडिया और संस्थानों के साथ मिलकर कार्यों को तर्कसंगत और प्रभावी बनाना होगा।

यदि नीति-सुधार समेकित और स्थानिक हों, तो SUP प्रतिबंध का वास्तविक लाभ: स्वच्छ पर्यावरण, स्वस्थ जलमार्ग, और प्लास्टिक-न्यूनित जीवन सुनिश्चित कर सकता है। अभी वह राह लंबी और चुनौतीपूर्ण है, पर असंभव नहीं।

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