लेखक: ऋषिता गंगराड़े
बिजली आज के समय में जीवन की एक बुनियादी जरूरत बन चुकी है, लेकिन ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए यह अब भी एक संघर्ष है। जहां एक ओर सरकारें गांवों तक 24 घंटे बिजली देने के दावे करती हैं, वहीं ज़मीनी हकीकत इन दावों से कोसों दूर है।ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली विभाग की लापरवाही और गैर-जिम्मेदाराना रवैया आम बात हो गई है। बिना किसी पूर्व सूचना के बिजली कट कर दी जाती है, और घंटों तक लोग गर्मी, अंधेरे और परेशानी में समय बिताते हैं।
बिना कारण बिजली कटौती:
गांवों में अक्सर देखा गया है कि बिजली विभाग बिना किसी तकनीकी कारण या मरम्मत कार्य के, घंटों बिजली काट देता है। ना तो कोई पूर्व सूचना दी जाती है और ना ही कोई समय-सीमा तय की जाती है। किसान, विद्यार्थी, महिलाएं और व्यापारी — सभी इससे प्रभावित होते हैं।
कॉल करने पर बहाने और लापरवाही:
जब उपभोक्ता हेल्पलाइन या स्थानीय बिजली ऑफिस में फोन करते हैं, तो उन्हें या तो कोई जवाब नहीं मिलता या फिर बहाने दिए जाते हैं — जैसे कि “लाइन में फॉल्ट है”, “ट्रांसफार्मर गर्म हो गया है”, “स्टाफ नहीं है”, आदि। कई बार एक ही बहाना हफ्तों तक दोहराया जाता है और समस्या जस की तस बनी रहती है।
उपभोक्ताओं से बदतमीज़ी:
सबसे गंभीर और शर्मनाक पहलू यह है कि जब उपभोक्ता बार-बार शिकायत करते हैं या जानकारी मांगते हैं, तो बिजली विभाग के कुछ कर्मचारी उनसे अभद्र भाषा में बात करते हैं, फोन काट देते हैं या शिकायत दर्ज ही नहीं करते। कुछ ग्रामीण उपभोक्ताओं ने बताया कि कर्मचारियों द्वारा धमकी तक दी जाती है कि “बहुत कॉल करोगे तो और देर से बिजली देंगे।”
यह स्थिति क्यों चिंताजनक है?
- किसानों को नुकसान: सिंचाई नहीं हो पाने से फसलों को नुकसान होता है।
- छात्रों की पढ़ाई बाधित: बिजली ना होने से पढ़ाई पर बुरा असर पड़ता है, खासकर रात के समय।
- छोटे व्यापारियों को परेशानी: दुकानें, मिलें और कुटीर उद्योग बिजली के बिना नहीं चल सकते।
- बुज़ुर्ग और बीमारों को परेशानी: गर्मी में बिजली ना होना स्वास्थ्य के लिए खतरा बन जाता है।
समाधान क्या हो सकता है?
- पूर्व सूचना अनिवार्य हो: यदि किसी मरम्मत या कारण से बिजली कट होनी है, तो SMS या नोटिस के जरिए सूचना दी जाए।
- ग्रामीण इलाकों के लिए अलग शिकायत पोर्टल: जहां गांवों की समस्याओं को प्राथमिकता मिले।
- कर्मचारियों की जवाबदेही तय हो: बदतमीज़ी करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो।
- स्थानीय निगरानी समिति बने: जिसमें ग्रामीण उपभोक्ता भी शामिल हों और हर महीने बिजली की स्थिति की समीक्षा की जाए।
बिजली विभाग की यह मनमानी न सिर्फ उपभोक्ताओं के अधिकारों का हनन है, बल्कि यह लोकतांत्रिक जवाबदेही की भी अनदेखी है। ग्रामीण भारत तब ही प्रगति कर सकेगा जब उसे भी उतनी ही गुणवत्ता और सम्मान वाली सेवाएं मिलेंगी जितनी शहरी उपभोक्ताओं को मिलती हैं।
अब वक्त आ गया है कि ग्रामीण उपभोक्ता भी अपनी आवाज़ बुलंद करें — और जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब मांगें।
