Air india plan crashAir india plan crash

Rishita Gangrade: 12 जून की सुबह हर किसी के लिए एक सामान्य दिन की तरह शुरू हुई थी। लेकिन कुछ ही घंटों में एक विमान हादसे ने देश को झकझोर कर रख दिया। एयर इंडिया की फ्लाइट AI-274, जो कोच्चि से दिल्ली जा रही थी, मौसम खराब होने की वजह से रनवे से फिसल गई और भीषण दुर्घटना का शिकार हो गई।

शुरुआत में इसे “एक तकनीकी गड़बड़ी के चलते हुई दुर्घटना बताया गया, लेकिन अब यह हादसा एक और वजह से चर्चा में है — मौतों की सही संख्या पर उठते सवालों के कारण।

सरकारी आंकड़े बनाम ज़मीनी हकीकत सरकार द्वारा जारी किए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार इस हादसे में 17 लोगों की मौत हुई और करीब 50 घायल हुए। लेकिन ज़मीनी रिपोर्टें, चश्मदीदों की गवाही और कुछ अस्पताल कर्मियों के बयानों से जो तस्वीर उभर रही है, वह कुछ और ही कहती है।

घटनास्थल पर मौजूद एक स्थानीय पत्रकार के मुताबिक, हमने अपनी आंखों से 20 से ज़्यादा शवों को एंबुलेंस में लादते देखा। कुछ लोगों की हालत ऐसी थी कि उन्हें जिंदा मानना मुश्किल था।”वहीं, एक निजी अस्पताल के एक नर्सिंग स्टाफ, जिन्होंने नाम ना बताने की शर्त पर बात की, कहते हैं, सरकारी अधिकारियों को हमने कई बार आते देखा। वे मौतों की पुष्टि को लेकर बेहद सतर्क थे — जैसे उन्हें एक तय सीमा में ही रहना है।”

सरकारी आंकड़े बनाम ज़मीनी हकीकत सरकार द्वारा जारी किए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार इस हादसे में 17 लोगों की मौत हुई और करीब 50 घायल हुए। लेकिन ज़मीनी रिपोर्ट, चश्मदीदों की गवाही और कुछ अस्पताल कर्मियों के बयानों से जो तस्वीर उभर रही है, वह कुछ और ही कहती है।

घटनास्थल पर मौजूद एक स्थानीय पत्रकार ने बताया, “हमने अपनी आंखों से 20 से ज़्यादा शवों को एंबुलेंस में लादते देखा। कुछ लोगों की हालत ऐसी थी कि उन्हें जिंदा मानना मुश्किल था।

वहीं, एक निजी अस्पताल के एक नर्सिंग स्टाफ, जिन्होंने नाम ना बताने की शर्त पर बात की, कहते हैं, “सरकारी अधिकारियों को हमने कई बार आते देखा। वे मौतों की पुष्टि को लेकर बेहद थे — जैसे उन्हें एक तय सीमा में ही रहना है।

परिवारों की पीड़ा और सवालइस हादसे में जिन परिवारों ने अपने प्रियजनों को खोया है, उनके लिए यह सिर्फ एक तकनीकी या आंकड़ों का मामला नहीं है, बल्कि एक ऐसा जख्म है जो हर दिन गहराता जा रहा है।

नीतू शर्मा, जिनके पति इस विमान में सवार थे और अब तक लापता हैं, कहती हैं, सरकार से बार-बार जवाब मांगा, लेकिन सिर्फ आश्वासन मिले। न शव मिला, न जानकारी। अगर वो मरे हैं तो उनका नाम लिस्ट में क्यों नहीं है? और अगर जिंदा हैं तो अब तक कहां हैं?”

पारदर्शिता पर सवालजब कोई राष्ट्रीय विमान सेवा हादसे का शिकार होती है, तो हर पहलू की निष्पक्ष जांच और पारदर्शी रिपोर्टिंग अनिवार्य हो जाती है। लेकिन इस मामले में जो संदेह गहराता जा रहा है, वह कहीं ना कहीं सरकारी व्यवस्था पर से भरोसा उठने जैसा है।

कई सवाल अब भी जवाब मांग रहे हैं:

क्या सरकार जानबूझकर मौतों की संख्या को कम दिखा रही है?क्या यह कोई प्रशासनिक चूक छुपाने की कोशिश है। या फिर यह मीडिया और सोशल मीडिया पर आने वाले दबाव से बचने की रणनीति है?

किसी भी देश के लिए हादसों को छुपाना नहीं, बल्कि उनसे ईमानदारी से निपटना ज़रूरी होता है। पीड़ित परिवारों को न सिर्फ इंसाफ चाहिए, बल्कि पूरी सच्चाई जानने का अधिकार भी। जब सरकारें आंकड़ों का खेल खेलने लगें और इंसानी जिंदगियों को सिर्फ रिपोर्ट की पंक्तियों में सीमित कर दें — तब लोकतंत्र की आत्मा पर चोट लगती है।

यह ज़रूरी है कि, एयर इंडिया हादसे की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच हो, और सच्चाई सामने आए — ताकि ना सिर्फ पीड़ितों को न्याय मिले, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाएं टाली जा सकें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *