Muskan Garg: कातिल मांझे ने एक बार फिर इंसानियत को शर्मसार कर दिया है। पतंग उड़ाने में इस्तेमाल होने वाले चाइनीज मांझा इतना घातक बन गया है कि अब यह सिर्फ गले नहीं काटता, बल्कि पूरे परिवारों को मार डालता है। हाल ही में हुए हादसे में 70 फीट ऊंचे फ्लाईओवर से नीचे गिरने से माता-पिता की दर्दनाक मौत हो गई। यह घटना सिर्फ दिल दहला देने वाली नहीं है, बल्कि समाज और प्रशासन पर कड़े सवाल भी खड़े करती है।
कैसे हुआ यह भयावह हादसा?
जानकारी के मुताबिक, परिवार बाइक पर सवार होकर फ्लाईओवर से गुजर रहा था। तभी अचानक रास्ते में तेज धार वाला मांझा बाइक सवारों में उलझ गया। मांझे की चपेट में आने से बाइक का संतुलन बिगड़ा और देखते ही देखते बाइक 70 फीट नीचे जा गिरी। इस भयावह गिरावट में तीनों की मौके पर ही मौत हो गई। चश्मदीदों के मुताबिक, कुछ ही पलों में खुशहाल सफर मौत के मंजर में बदल गया।
‘मांझा’ क्यों बन चुका है कातिल?
आजकल उपलब्ध चाइनीज मांझा और नायलॉन:
• बेहद तेज और मजबूत होता है
• धातु और कांच के चूर्ण से बना होने के कारण रेजर से भी ज्यादा धारदार होता है।
• हवा में अदृश्य रहता है, जिससे बचाव लगभग नामुमकिन हो जाता है।
यही वजह है कि यह मांझा सिर्फ इंसानों ही नहीं, बल्कि पक्षियों और जानवरों के लिए भी जानलेवा साबित हो रहा है।
कानून है, लेकिन पालन नहीं:
हालांकि कई राज्यों में चाइनीज मांझे पर पूर्ण प्रतिबंध है, इसके बावजूद:
• चोरी-छिपे इसकी बिक्री जारी है।
• ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भी यह आसानी से उपलब्ध है।
• कार्रवाई केवल हादसों के बाद होती है।
यह सवाल उठना लाज़मी है कि जब कानून मौजूद है, तो फिर तीन जानें क्यों गईं?
एक परिवार उजड़ा, कई सपने टूटे:
इस हादसे ने सिर्फ तीन जिंदगियां नहीं छीनीं, बल्कि:
• एक घर का चिराग बुझा
• माता-पिता के सपने अधूरे रह गए
• मासूम बच्ची का भविष्य हमेशा के लिए खत्म हो गया
• मौके पर मौजूद लोगों की आंखें नम थीं और सिस्टम पर गुस्सा साफ झलक रहा था।
अब भी नहीं चेते तो और कितनी जानें जाएंगी?
यह घटना एक चेतावनी है कि अगर अब भी:
• चाइनीज मांझे की बिक्री पर सख्ती नहीं हुई,
• दोषियों पर कड़ी कार्रवाई नहीं हुई,
• आम लोग जिम्मेदारी नहीं समझे,
तो ऐसे हादसे दोहराते रहेंगे।
अब वक्त है सख्त फैसलों का:
कातिल मांझे पर सिर्फ कागजों में नहीं, बल्कि जमीन पर प्रतिबंध जरूरी है। एक पतंग उड़ाने की खुशी, किसी की जिंदगी से बड़ी नहीं हो सकती। आज जरूरत है जागरूकता, सख्ती और संवेदनशीलता की ताकि कोई और परिवार इस तरह उजड़ने से बच सके।
