Muskan Garg: जागो युवाओं जागो प्रकृति को बचाना है,
युवा शक्ति की ताकत क्या है पूरी दुनिया को दिखलाना है।।

भारत की प्राचीनतम पर्वत श्रृंखलाओं में से एक अरावली पर्वत आज अस्तित्व के संकट से जूझ रही है। इसी गंभीर विषय को लेकर बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जी ने हाल ही में एक भावुक और प्रभावशाली अपील की है। उन्होंने सरकार, समाज और युवाओं से अरावली पर्वत को बचाने के लिए आगे आने की गुहार लगाई है।

अरावली: भारत की प्रकृति की रीढ़:
अरावली पर्वत श्रृंखला राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली और गुजरात तक फैली हुई है। यह न केवल भारत की जलवायु संतुलन में अहम भूमिका निभाती है, बल्कि भूजल संरक्षण, वन्यजीवों के आवास और मरुस्थलीकरण रोकने में भी महत्वपूर्ण है। विशेषज्ञों के अनुसार, अगर अरावली पूरी तरह नष्ट हुई तो दिल्ली-एनसीआर और आसपास के क्षेत्रों में रेगिस्तान जैसी स्थिति बन सकती है।

पंडित धीरेंद्र शास्त्री की चेतावनी:
पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने अपने प्रवचनों के दौरान कहा कि
“अगर अरावली नहीं बचेगी, तो आने वाली पीढ़ियों को शुद्ध हवा, पानी और हरियाली केवल किताबों में मिलेगी।” उन्होंने खनन माफिया, अवैध कटाई और अंधाधुंध शहरीकरण को अरावली के विनाश का मुख्य कारण बताया। उनका कहना है कि विकास जरूरी है, लेकिन प्रकृति को नष्ट करके किया गया विकास आत्मघाती है।

धर्म और पर्यावरण का संबंध:
शास्त्री जी ने पर्यावरण संरक्षण को धर्म से जोड़ते हुए कहा कि सनातन संस्कृति में प्रकृति को माता का दर्जा दिया गया है। “पर्वत, नदियां और वन हमारे देवता हैं। इनका संरक्षण करना केवल कानून नहीं, बल्कि हमारा नैतिक कर्तव्य है। ”उन्होंने लोगों से अपील की कि वह धार्मिक आयोजनों के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी आंदोलन बनाएं।

युवाओं से विशेष अपील:
पंडित धीरेंद्र शास्त्री जी ने देश के युवाओं से खास तौर पर आगे आने को कहा। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर ट्रेंड चलाने से लेकर जमीनी स्तर पर पौधारोपण, जागरूकता अभियान और प्रशासन पर दबाव बनाना ये सभी कदम जरूरी हैं।

सरकार और समाज की जिम्मेदारी:
श्री धीरेन्द्र शास्त्री जी ने केंद्र और राज्य सरकारों से सख्त कानून लागू करने, अवैध खनन पर पूर्ण प्रतिबंध और अरावली को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने की मांग की। साथ ही, समाज से भी यह अपेक्षा की कि वह केवल दर्शक न बने, बल्कि सक्रिय भागीदार बने।

पंडित धीरेंद्र शास्त्री जी की यह गुहार सिर्फ एक संत की आवाज नहीं, बल्कि भारत की प्रकृति की करुण पुकार है। अरावली को बचाना मतलब भविष्य को बचाना है। अगर आज कदम नहीं उठाए गए, तो कल पछताने के अलावा कुछ नहीं बचेगा। अब समय है कि धर्म, समाज और सरकार मिलकर अरावली के संरक्षण के लिए निर्णायक कदम उठाएं।


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