Suvangi Pradhan: भारत और अमेरिका के बीच चल रही अहम ट्रेड वार्ता निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। भारत ने अमेरिका के सामने अपना फाइनल ऑफर रखते हुए साफ कहा है कि भारतीय उत्पादों पर लगाए गए 50 प्रतिशत तक के ऊंचे टैरिफ को घटाकर 15 प्रतिशत किया जाए।
भारत ने रूसी कच्चे तेल की खरीद को लेकर लगाए गए जुर्माने को पूरी तरह खत्म करने की मांग की है
भारत का तर्क है कि मौजूदा ऊंचे टैरिफ से भारतीय निर्यातकों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता प्रभावित हो रही है। खासतौर पर टेक्सटाइल, स्टील, इंजीनियरिंग गुड्स, फार्मा और आईटी से जुड़े उत्पादों पर ज्यादा असर पड़ा है। भारत का कहना है कि यदि टैरिफ को 15 प्रतिशत तक लाया जाता है, तो दोनों देशों के बीच व्यापार संतुलन बेहतर होगा और द्विपक्षीय व्यापार को नई गति मिलेगी।
रूसी तेल के मुद्दे पर भारत ने कहा है कि उसकी ऊर्जा सुरक्षा सर्वोपरि है
भारत ने अमेरिका को बताया कि वह अंतरराष्ट्रीय कानूनों के दायरे में रहते हुए तेल आयात करता है और रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीदना उसकी घरेलू अर्थव्यवस्था और महंगाई नियंत्रण के लिए जरूरी है। भारत का मानना है कि रूसी तेल पर पेनाल्टी से न केवल भारतीय रिफाइनरियों पर दबाव बढ़ता है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता भी आती है। भारत ने यह भी संकेत दिया है कि अगर अमेरिका उसकी मांगों पर सकारात्मक रुख अपनाता है, तो भारत अमेरिकी कृषि उत्पादों, रक्षा उपकरणों और हाई-टेक सामानों के लिए अपने बाजार में और सहूलियत देने पर विचार कर सकता है।
अमेरिका की ओर से अब तक इस फाइनल ऑफर पर आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है
यदि दोनों देश समझौते पर पहुंचते हैं, तो इसका असर केवल भारत-अमेरिका व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक सप्लाई चेन और ऊर्जा बाजार पर भी पड़ेगा। अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि अमेरिका भारत के इस फाइनल ऑफर पर क्या फैसला करता है और क्या यह ट्रेड वार्ता किसी बड़े समझौते का रास्ता खोल पाएगी।
