रिया सिन्हा: देश की राजधानी दिल्ली में कड़ाके की ठंड और घने कोहरे के बीच वायु प्रदूषण का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। सोमवार, 22 दिसंबर 2025 को भी दिल्ली की हवा ‘बेहद खराब’ (Very Poor) श्रेणी में बनी रही। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) सुबह के समय 390 के आसपास दर्ज किया गया, जो ‘गंभीर’ श्रेणी के बेहद करीब है। आनंद विहार और वजीरपुर जैसे हॉटस्पॉट्स में तो यह आंकड़ा 420 के पार पहुंच गया है।
धुंध और ठंड का डबल अटैक: विजिबिलिटी हुई शून्य
दिल्ली-एनसीआर में मौसम के बदलते मिजाज ने प्रदूषण की स्थिति को और अधिक चिंताजनक बना दिया है। मौसम विभाग ने दिल्ली के लिए ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी किया है, क्योंकि घने कोहरे के कारण दृश्यता (Visibility) शून्य से 50 मीटर के बीच सिमट गई है। हवा की गति कम होने की वजह से प्रदूषक तत्व (Pollutants) जमीन के करीब ही फंसे हुए हैं, जिससे स्मॉग की एक गहरी चादर पूरे शहर पर लिपटी नजर आ रही है।
स्वास्थ्य पर संकट: अस्पतालों में बढ़ी सांस के मरीजों की संख्या
जहरीली हवा का सीधा असर अब दिल्लीवासियों की सेहत पर दिखने लगा है। डॉक्टरों के अनुसार, पिछले एक हफ्ते में अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और सांस लेने में तकलीफ की शिकायतों वाले मरीजों की संख्या में 20% तक की वृद्धि हुई है। विशेषज्ञों ने विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को सुबह और शाम के समय घर से बाहर न निकलने की सलाह दी है। PM 2.5 के सूक्ष्म कण सीधे फेफड़ों में पहुंचकर रक्त संचार में मिल रहे हैं, जो दीर्घकालिक बीमारियों का कारण बन सकते हैं।
ग्रैप-4 की पाबंदियां और सरकारी प्रयास
प्रदूषण के खतरनाक स्तर को देखते हुए दिल्ली-एनसीआर में ‘ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान’ (GRAP) का चौथा चरण लागू है। इसके तहत ट्रकों के प्रवेश पर पाबंदी, निर्माण कार्यों पर रोक और स्कूलों को ऑनलाइन मोड पर चलाने जैसे कड़े कदम उठाए गए हैं। गुरुग्राम प्रशासन ने प्रदूषण के चलते सरकारी दफ्तरों के समय में भी बदलाव किया है। हालांकि, इन तमाम उपायों के बावजूद हवा की गुणवत्ता में कोई बड़ा सुधार देखने को नहीं मिल रहा है।

