Suvangi Pradhan: पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि भारत में मुस्लिम महिलाओं के साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार बढ़ रहा है और हिजाब जैसे धार्मिक प्रतीकों को निशाना बनाया जाना गंभीर चिंता का विषय है। बयान में कहा गया कि भारत में मुस्लिमों के प्रति नफरत और असहिष्णुता में लगातार इजाफा हो रहा है।
भारत में एक मुस्लिम महिला डॉक्टर का हिजाब उतारने के कथित मामले को लेकर पाकिस्तान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है
यह प्रतिक्रिया बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से जुड़े एक कार्यक्रम के बाद सामने आई है, जहां एक सरकारी आयोजन के दौरान महिला डॉक्टर का हिजाब हटवाए जाने का आरोप लगा। विपक्षी दलों और मानवाधिकार संगठनों ने इस घटना को संविधान में प्रदत्त धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन बताया है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत खुद को एक धर्मनिरपेक्ष देश बताता है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट दिखाई दे रही है। बयान में यह भी कहा गया कि मुस्लिम महिलाओं की धार्मिक पहचान पर इस तरह की रोक-टोक अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों के खिलाफ है।
पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भारत में अल्पसंख्यकों की स्थिति पर ध्यान देने की अपील भी की
भारत में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कुछ नेताओं ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से स्पष्टीकरण की मांग की है, जबकि जदयू की ओर से कहा गया कि घटना को तोड़-मरोड़ कर पेश किया जा रहा है और किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का इरादा नहीं था। पार्टी नेताओं का कहना है कि मुख्यमंत्री सभी धर्मों का सम्मान करते हैं और यह मामला महज एक औपचारिकता से जुड़ा था।
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में बहस तेज हो गई है
मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि हिजाब या किसी भी धार्मिक प्रतीक को हटाने के लिए मजबूर करना व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हनन है। उन्होंने मांग की कि इस मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश बनाए जाएं। घटना ने एक बार फिर भारत में धार्मिक स्वतंत्रता, अल्पसंख्यकों के अधिकार और राजनीतिक संवेदनशीलता को लेकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस को तेज कर दिया है।

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