Richa Chaddha is celebrating her birthday today

रिया सिन्हा: बॉलीवुड की गलियारों में अपनी धाक जमाने वाली अभिनेत्री ऋचा चड्ढा आज किसी पहचान की मोहताज नहीं हैं। उन्होंने साल 2008 में दिबाकर बनर्जी की फिल्म ‘ओए लकी! लकी ओए!’ से अपने करियर की शुरुआत की थी। हालांकि यह फिल्म एक कल्ट क्लासिक साबित हुई, लेकिन ऋचा को असली पहचान और शोहरत के लिए कुछ साल और इंतजार करना पड़ा। उनकी सहज अभिनय क्षमता ने फिल्म समीक्षकों का ध्यान पहली ही फिल्म से अपनी ओर खींच लिया था।

गैंग्स ऑफ वासेपुरका मोड़: जब नगमा खातूनबनकर छा गईं ऋचा

ऋचा चड्ढा के करियर में सबसे बड़ा मोड़ साल 2012 में आया, जब अनुराग कश्यप की फिल्म ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ रिलीज हुई। इस फिल्म में उन्होंने ‘नगमा खातून’ का किरदार निभाया, जो एक दबंग और निडर महिला थी। महज 20 की उम्र में उन्होंने एक उम्रदराज महिला और मां का किरदार इतनी शिद्दत से निभाया कि दर्शक दंग रह गए। इस फिल्म के बाद उन्हें फिल्म इंडस्ट्री में एक संजीदा और पावरहाउस परफॉर्मर के रूप में देखा जाने लगा।

भोली पंजाबन की एंट्री: लेडी डॉन बनकर पर्दे पर मचाया तहलका

ऋचा चड्ढा के करियर का सबसे आइकोनिक किरदार फिल्म ‘फुकरे’ में देखने को मिला। इस फिल्म में उन्होंने ‘भोली पंजाबन’ नाम की एक ‘लेडी डॉन’ का रोल निभाया। उनका यह अंदाज इतना मशहूर हुआ कि लोग उन्हें उनके असली नाम से ज्यादा ‘भोली पंजाबन’ के नाम से जानने लगे। एक ग्लैमरस लेकिन खतरनाक महिला गैंगस्टर के रूप में उन्होंने कॉमेडी और डर का ऐसा तड़का लगाया कि यह किरदार भारतीय सिनेमा के यादगार विलेन्स की लिस्ट में शामिल हो गया।

मसान से हीरामंडी तक का सफर: वर्सटिलिटी की नई मिसाल

ऋचा ने केवल कमर्शियल ही नहीं, बल्कि ‘मसान’ जैसी फिल्मों के जरिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी वाहवाही बटोरी। हाल ही में संजय लीला भंसाली की वेब सीरीज ‘हीरामंडी’ में ‘लज्जो’ के किरदार में उनके भावुक अभिनय ने एक बार फिर साबित कर दिया कि वह हर तरह के सांचे में ढल सकती हैं। आज वह न केवल एक सफल अभिनेत्री हैं, बल्कि एक निर्माता के रूप में भी बेहतरीन काम कर रही हैं। अपनी बेबाकी और दमदार किरदारों के दम पर उन्होंने इंडस्ट्री में अपनी एक अलग ही ‘लीग’ तैयार कर ली है।

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