Baljinder Kaur: आज के समय में वायु प्रदूषण एक गंभीर समस्या बन चुका है और स्मॉग इसका सबसे खतरनाक रूप है। सर्दियों के मौसम में उत्तर भारत के कई शहर स्मॉग की चपेट में आ जाते हैं। यह न केवल हमारी आँखों और साँस लेने की प्रक्रिया को प्रभावित करता है बल्कि फेफड़ों, हृदय और पूरे शरीर के लिए नुकसानदायक होता है।
स्मॉग क्या होता है?
स्मॉग शब्द Smoke (धुआँ) और Fog (कोहरा) से मिलकर बना है। जब हवा में मौजूद धुआँ, धूल, जहरीली गैसें और कोहरा आपस में मिल जाते हैं तो एक मोटी धुँधली परत बन जाती है जिसे स्मॉग कहते हैं। इससे दृश्यता कम हो जाती है और साँस लेना मुश्किल हो जाता है।
स्मॉग होने के मुख्य कारण
वाहनों से निकलने वाला धुआँ
पेट्रोल और डीज़ल से चलने वाले वाहनों से कार्बन मोनोऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड जैसी जहरीली गैसें निकलती हैं जो स्मॉग का बड़ा कारण हैं।
फैक्ट्रियों और उद्योगों का प्रदूषण
फैक्ट्रियों से निकलने वाला धुआँ और रासायनिक गैसें हवा को जहरीला बना देती हैं।
पराली जलाना
खेतों में फसल कटने के बाद पराली जलाने से बहुत अधिक धुआँ निकलता है जो स्मॉग को बढ़ाता है।
पटाखों का प्रयोग
त्योहारों के समय पटाखे फोड़ने से हवा में हानिकारक कण बढ़ जाते हैं।
मौसम और ठंडी हवा
सर्दियों में हवा की गति कम हो जाती है जिससे प्रदूषक ऊपर नहीं उठ पाते और स्मॉग बन जाता है।
स्मॉग के दुष्प्रभाव
आँखों में जलन और पानी आना
साँस लेने में तकलीफ
खाँसी और फेफड़ों की बीमारियाँ
बच्चों और बुजुर्गों पर अधिक असर
सड़क दुर्घटनाओं का खतरा
स्मॉग से बचाव के उपाय
बाहर निकलते समय मास्क पहनें
अनावश्यक बाहर जाना कम करें
घर के अंदर हवा साफ रखें
सार्वजनिक परिवहन का प्रयोग करें
पटाखों और कचरा जलाने से बचें
पौधारोपण करें
स्मॉग एक गंभीर पर्यावरणीय समस्या है लेकिन सही जानकारी और सावधानी से इसके प्रभाव को कम किया जा सकता है। यदि हम सभी मिलकर छोटे-छोटे कदम उठाएँ तो स्वच्छ हवा और स्वस्थ जीवन संभव है। स्वच्छ हवा हमारा अधिकार भी है और जिम्मेदारी भी।
