Muskan Garg: ग्रामीण भारत के लिए सरकार एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। लंबे समय से चल रही महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) की जगह अब ‘G Ram G’ नाम की नई योजना लाने की तैयारी है। सरकार संसद में इस संबंध में नया बिल पेश करने जा रही है, जिसके तहत ग्रामीण परिवारों को 125 दिन के रोजगार की गारंटी देने का प्रस्ताव है। यह बदलाव ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार देने के उद्देश्य से किया जा रहा है।
क्या है G Ram G योजना?
G Ram G योजना को एक आधुनिक और परिणाम-केंद्रित रोजगार गारंटी कार्यक्रम के रूप में पेश किया जा रहा है। इस योजना का फोकस सिर्फ रोजगार देने तक सीमित नहीं होगा, बल्कि गांवों में टिकाऊ संपत्तियों के निर्माण, कौशल विकास और स्थानीय जरूरतों के अनुसार काम उपलब्ध कराने पर रहेगा। सरकार का दावा है कि यह योजना रोजगार के साथ-साथ ग्रामीण बुनियादी ढांचे को भी मजबूत करेगी।
125 दिन रोजगार की गारंटी:
नई योजना के तहत पात्र ग्रामीण परिवारों को साल में कम से कम 125 दिन का काम देने की गारंटी होगी, जो मनरेगा के मौजूदा प्रावधान से ज्यादा है। इससे न केवल ग्रामीण आय बढ़ेगी, बल्कि पलायन पर भी अंकुश लगेगा। सरकार का मानना है कि ज्यादा कार्यदिवस मिलने से गांवों में आर्थिक स्थिरता आएगी।
काम के नए स्वरूप और तकनीक का इस्तेमाल:
G Ram G योजना में पारंपरिक मजदूरी के साथ-साथ डिजिटल ट्रैकिंग, समय पर भुगतान और पारदर्शिता पर विशेष जोर होगा। कामों में जल संरक्षण, सड़क निर्माण, ग्रामीण आवास, कृषि से जुड़े प्रोजेक्ट और हरित ऊर्जा जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जा सकती है। भुगतान प्रणाली को भी पूरी तरह डिजिटल बनाने की तैयारी है, ताकि मजदूरों को समय पर मजदूरी मिल सके।
विपक्ष और विशेषज्ञों की नजर:
जहां सरकार इस योजना को ग्रामीण भारत के लिए “गेम चेंजर” बता रही है, वहीं विपक्ष ने मनरेगा को हटाने के फैसले पर सवाल उठाए हैं। वही विशेषज्ञों का कहना है कि अगर G Ram G योजना को सही तरीके से लागू किया गया, तो यह रोजगार के साथ-साथ कौशल और उत्पादकता बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकती है।
ग्रामीण भारत के लिए नई उम्मीद:
अगर यह बिल संसद से पास हो जाता है, तो G Ram G योजना ग्रामीण रोजगार नीति में एक नया अध्याय साबित हो सकती है। बढ़ी हुई रोजगार गारंटी और बेहतर क्रियान्वयन से गांवों की तस्वीर बदले जाने की उम्मीद की जा रही है।
