Suvangi Pradhan: भारत और रूस के बीच हाल में हुए दौरे के दौरान व्लादिमीर पुतिन के भारत आगमन ने द्विपक्षीय रिश्तों में कुछ महत्वपूर्ण मोड़ ला दिए। सबसे प्रमुख बदलाव रहा है, रूस ने भारत को तेल और ऊर्जा सप्लाई में अनिश्चितता को खत्म करने का भरोसा दिया है। पुतिन ने कहा कि रूस भारत को अविरल ईंधन उपलब्ध कराता रहेगा, ताकि भारत की बढ़ती ऊर्जा माँग पूरी हो सके।
दोनों देशों ने लगभग 19 जरूरतमंद समझौते किये हैं
इस समझौते में उर्वरक, ऊर्जा, निर्यात-आयात, व्यापार बढ़ाने की दिशा में समझौतें शामिल हैं। इसके तहत एक विशेष उदाहरण यह है कि भारत की उर्वरक कंपनियाँ रूस में एक संयंत्र स्थापित करने जा रही हैं, ताकि भारत के कृषि-उर्वरक सुरक्षा को और मजबूत किया जा सके। इस दौरे में फाइटर जेट और विभिन्न बड़े रक्षा सौदे जैसे कि नए जेट विमानों की घोषणा नहीं हुई। इस तरह, रक्षा सहयोग के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ने की उम्मीदें रही, पर ठोस विशाल सौदे अभी घोषित नहीं हुए।
भारत और रूस के रिश्तों में ऊर्जा और व्यापार क्षेत्र में गति आई है
भारत की ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए, रक्षा सहयोग के पुराने प्लेटफॉर्म बन रहे हैं, नए बड़े सौदों में अभी गति उतनी नहीं दिखी। भारत के लिए यह भी एक संकेत है कि वह अपने रणनीतिक संतुलन को बनाये रखने की कोशिश कर रहा है। रूस के साथ मजबूत संबंध के बावजूद, वह पश्चिमी दबाव, अन्य साझेदारों और घरेलू रक्षा-उत्पादन योजनाओं को भी ध्यान में रख रहा है।
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पुतिन के इस भारत दौरे ने भरोसे के कई संकेत दिए हैं विशेषकर तेल-सप्लाई में और नए व्यापार एवं निवेश के द्वार खोले हैं, लेकिन रक्षा क्षेत्र में बड़ा खुला सौदा इस दौर में नहीं हुआ है।

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