Suvangi Pradhan: भारत दौरे पर पहुंचे रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का स्वागत नई दिल्ली में विशेष सम्मान के साथ हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रोटोकॉल तोड़ते हुए स्वयं एयरपोर्ट जाकर उनकी अगवानी की। इस दौरान एक दिलचस्प दृश्य देखने को मिला, पुतिन अपनी बख्तरबंद लिमोज़िन छोड़कर प्रधानमंत्री मोदी के साथ टोयोटा SUV में बैठे और दोनों स्थल तक साथ पहुंचे।
यह कदम दोनों नेताओं के निजी विश्वास और आपसी समीकरण का प्रतीक
दिल्ली पहुंचते ही पुतिन को पारंपरिक सैन्य सम्मान दिया गया, जिसमें 21 तोपों की सलामी भी शामिल थी। इसके साथ ही त्रि-सेवा गार्ड ने औपचारिक स्वागत समारोह में रूस के राष्ट्रपति को गार्ड ऑफ ऑनर प्रस्तुत किया। समारोह के बाद प्रधानमंत्री मोदी और पुतिन ने द्विपक्षीय बैठक की, जिसमें रक्षा, ऊर्जा, व्यापार और आर्कटिक सहयोग से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर बातचीत हुई।
पुतिन ने शांति का प्रतीक रामधुन सुनी और गांधी समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित की
इस मुलाकात का एक अहम और भावनात्मक पहलू तब सामने आया जब मोदी ने पुतिन को रूसी भाषा में अनूदित श्रीमद्भगवद्गीता की प्रति उपहार में दी। पुतिन ने इसे विशेष रूप से मूल्यवान बताते हुए कहा कि भारतीय दर्शन और आध्यात्मिकता दुनिया को संतुलन का संदेश देती है। राजनयिक कार्यक्रमों के बीच पुतिन ने राजघाट पहुंचकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि भी दी। रूसी राष्ट्रपति का यह आयोजन भारतीय संस्कृति और गांधीवादी आदर्शों के प्रति सम्मान का संकेत माना गया।
पुतिन का यह दौरा ऐसे समय हुआ है जब वैश्विक स्तर पर कई चुनौतियाँ
दोनों नेताओं की बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में भारत-रूस संबंधों को “अटूट और भरोसेमंद” बताते हुए आने वाले वर्षों में सहयोग और मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई गई। यह दौरा न सिर्फ कूटनीति के लिहाज़ से अहम रहा, बल्कि प्रतीकात्मक क्षणों जैसे कि गीता का उपहार और राजघाट में रामधुन ने विश्व राजनीति के बीच मानवीय पहलू को भी मजबूत तरीके से रेखांकित किया।

