Muskan Garg: प्रधानमंत्री मोदी ने 28 नवंबर 2025 को “श्री संस्थान गोकर्ण पारतागाली जीवोत्तम मूत“, गोवा में भगवान श्रीराम की 77 फुट ऊँची कांस्य प्रतिमा का अनावरण किया। यह प्रतिमा, जिसका निर्माण “राम सुतार” के हाथों हुआ है, भगवान राम की अब तक की सबसे ऊँची स्थायी मूर्ति बताई जा रही है। यह समारोह उस मठ के 550वें “सार्ध-पंचशतामनोत्सव” के हिस्से के रूप में आयोजित किया गया था जो वहां की ऐतिहासिक और धार्मिक विरासत का प्रतीक है।


भव्य उद्घाटन और समारोह श्रद्धा से भरे श्रद्धालु और सांस्कृतिक जोश:
प्रधानमंत्री मोदी ने स्थान तक पहुंचने के लिए विशेष हेलिपैड का उपयोग किया था। समारोह में गोवा के राज्यपाल, मुख्यमंत्री, अन्य वरिष्ठ नेता और हजारों श्रद्धालु मौजूद थे। प्रतिमा का स्वरूप, अयोध्या में स्थापित राम मंदिर की शैली से मेल खाता है हाथ में धनुष-बाण लिए, चेहरे पर सौम्यता और भक्ति का भाव लिए हुए भगवान श्री राम की प्रतिमा सभी का मन मोह रही है। इसके अलावा, उसी मौके पर एक नया रामायण थीम पार्क का भी उद्घाटन किया गया जिससे यह धार्मिक स्थल, श्रद्धा के साथ-साथ सांस्कृतिक और पर्यटन केंद्र भी बन जाएगा।

सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व और राष्ट्र के लिए संदेश:
इस अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह सिर्फ एक मूर्ति नहीं है, बल्कि भारतीय संस्कृति, आस्था और हमारी बुनियाद “संस्कार और विरासत” का पुनरावलोकन है। उन्होंने कहा कि जब समाज एकता से चलेगा, तभी देश बड़ी उन्नति की ओर बढ़ेगा। मठ के 550 वर्षों के इतिहास को याद करते हुए, उन्होंने यह भी जोड़ा कि यह संस्थान और यह प्रतिमा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी।

श्रद्धालुओं, पर्यटन और विरासत का नया केंद्र:
77-फुट की इस प्रतिमा और रामायण थीम पार्क के साथ, गोवा का यह मठ अब देश और दुनिया से भक्तों, पर्यटकों और इतिहास प्रेमियों के लिए एक नया आकर्षण बन सकता है। विशेष रूप से, धार्मिक पर्यटन, सांस्कृतिक आयोजन और आध्यात्मिक यात्राओं के लिए यह स्थान भविष्य में लोकप्रिय स्थान बन सकता है।

आस्था, कला और पहचान का संगम:
गोवा में स्थापित यह विशाल राम प्रतिमा सिर्फ कंक्रीट या कांस्य से बनी मूर्ति नहीं बल्कि हमारी भारतीय धरोहर, हमारी आस्था और हमारी सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है। 77 फुट ऊंची भगवान राम की यह प्रतिमा इसका भव्य शिल्प और धार्मिक महत्त्व इसे इतिहास में एक खास स्थान देते है। यह अनावरण न केवल आज के लिए है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणा “संस्कार, श्रद्धा और आस्था” का संदेश भी देता है। ऐसे मॉन्यूमेंट्स हमें याद दिलाते हैं कि हमारी संस्कृति की जड़ें कितनी गहरी हैं, और हमारी पहचान कितनी मजबूत है।

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