Suvangi Pradhan: देश में बढ़ते साइबर अपराध और मोबाइल फ्रॉड को देखते हुए केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। दूरसंचार विभाग ने सभी स्मार्टफोन कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे अगले 90 दिनों के भीतर प्रत्येक नए मोबाइल फोन में एक अनिवार्य साइबर सिक्योरिटी एप प्री इंस्टॉल करें। इस फैसले का उद्देश्य मोबाइल चोरी, सिम क्लोनिंग, ऑनलाइन ठगी और डिजिटल सुरक्षा से जुड़े मामलों पर अंकुश लगाना है।
मोबाइल उपभोक्ताओं की सुरक्षा अब राष्ट्रीय प्राथमिकता का हिस्सा है
पिछले कुछ महीनों में साइबर फ्रॉड की घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए कई नई तकनीकी पहल शुरू की गई हैं। इनमें सबसे प्रमुख है ‘संचार साथी’ एप, जिसे लॉन्च होने के बाद अब तक 7 लाख से अधिक चोरी या गुम हुए मोबाइल फोन रिकवर करने में सफलता मिली है। यह एप उपयोगकर्ताओं को अपने मोबाइल का IMEI स्टेटस चेक करने, चोरी की शिकायत दर्ज करने और संदिग्ध नंबर की जानकारी देने जैसी सुविधाएँ प्रदान करता है।
डिजिटल फ्रॉड के मामलों में तेज़ी से हुई बढ़ोतरी को देखते हुए यह कदम बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है
नई नीति के तहत स्मार्टफोन कंपनियों को ऐसे एप को डिवाइस में पहले से इंस्टॉल करना होगा, ताकि फोन खरीदते ही यूज़र्स अपने डेटा और डिवाइस को सुरक्षित रख सकें। सरकार का मानना है कि इससे उपभोक्ताओं को साइबर अपराधियों से बचाने में बड़ी मदद मिलेगी और डिजिटल इकोसिस्टम में भरोसा बढ़ेगा। हाल के वर्षों में साइबर अपराधी मोबाइल चोरी कर उसके IMEI नंबर बदलने या फर्जी पहचान बनाकर सिम कार्ड का दुरुपयोग करने की घटनाओं को अंजाम दे रहे थे। ‘संचार साथी’ जैसे एप इन गतिविधियों पर रोक लगाने में कारगर सिद्ध हो रहे हैं।
संचार साथी से अब तक 7 लाख फोन रिकवर
सरकार का कहना है कि अगले तीन महीनों में यह सिस्टम पूरी तरह लागू हो जाएगा, जिसके बाद सभी नए मोबाइल फोन बेहतर सुरक्षा फीचर्स के साथ बाजार में उपलब्ध होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय भारत को डिजिटल सुरक्षा के क्षेत्र में एक नए स्तर पर लेकर जाएगा और उपभोक्ताओं का भरोसा मजबूत करेगा।
