रिया सिन्हा
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में करारी हार के बाद महागठबंधन के सहयोगी राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) और कांग्रेस के बीच तनाव बढ़ गया है। परिणाम घोषित होने के बाद से ही दोनों दलों के नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है, जिससे गठबंधन के भविष्य पर सवालिया निशान लग गया है। कांग्रेस ने चुनाव में खराब प्रदर्शन के लिए आरजेडी के साथ गठबंधन को जिम्मेदार ठहराया है। कांग्रेस 61 सीटों पर चुनाव लड़ी थी, लेकिन सिर्फ 6 सीटें ही जीत पाई, जबकि आरजेडी 143 सीटों पर लड़कर 25 सीटें जीतने में सफल रही। इस निराशाजनक प्रदर्शन के बाद दोनों दलों में आंतरिक कलह खुलकर सामने आ गई है।
गठबंधन की रणनीति पर सवाल
कांग्रेस के कुछ नेताओं का मानना है कि आरजेडी के साथ गठबंधन से उन्हें ऊंची जातियों के वोटों का नुकसान हुआ है, जो पहले कांग्रेस के समर्थक माने जाते थे, लेकिन अब भाजपा की ओर चले गए हैं। इसके अलावा, एनडीए के ‘जंगलराज’ कैंपेन ने भी गठबंधन सहयोगियों पर नकारात्मक प्रभाव डाला। कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता असित नाथ तिवारी ने तो यहां तक कह दिया कि अगर कांग्रेस की कोई ताकत नहीं है, तो आरजेडी ने उनसे गठबंधन क्यों किया? उन्होंने घटक दलों को एक-दूसरे का सम्मान करने की सलाह दी। हार के कारणों की समीक्षा के लिए कांग्रेस आलाकमान की बैठकें भी हो चुकी हैं, जिसमें कई नेताओं ने गठबंधन तोड़ने की मांग की है।
आरजेडी का तीखा पलटवार: “औकात” वाला बयान
कांग्रेस के आरोपों पर आरजेडी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। आरजेडी के प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस को जो भी वोट मिले हैं, वह आरजेडी की बदौलत हैं। उन्होंने तो यहां तक कह दिया कि “अगर कांग्रेस अकेले चलना चाहती है, तो उसे हर हाल में ऐसा करना चाहिए। उसे अपनी औकात पता चल जाएगी।” मंडल ने यह भी कहा कि आरजेडी चुनाव दर चुनाव कांग्रेस की गलत मांगों को झेलती आ रही है। आरजेडी का यह कड़ा रुख दिखाता है कि हार के बाद दोनों दलों के बीच दरार काफी गहरी हो चुकी है, जो आने वाले समय में गठबंधन के लिए बड़ा खतरा साबित हो सकती है।

