ऋषिता गगंगराड़ेमध्यप्रदेश में केन्द्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना प्रधानमंत्री जल जीवन मिशन (Har Ghar Jal) के तहत सुरक्षा और स्थायित्व से जुड़े ग्रामीण पेयजल प्रकल्पों पर भारी अनियमितताओं का आरोप सामने आया है। राज्य के पूर्व विधायक किशोर समरीते की शिकायत पर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने जल आपूर्ति विभाग की मंत्री संपत्तिया उइके के खिलाफ मामला दर्ज करने और सात दिनों में विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश जारी किया है|

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि इस योजना में सरकारी फंड का दुरुपयोग भारी स्तर पर हो रहा है। लगभग ₹30,000 करोड़ की सरकारी राशि सैंकड़ों ठेकेदारों और अधिकारियों के मिलीभगत में गड़बड़ी से खर्च की गई। आरोप है कि इस दौरान 3,000 से अधिक फर्जी कार्य पूर्णता प्रमाणपत्र, नकली दस्तावेज और गलत बैंक गारंटी के माध्यम से यह घोटाला अंजाम दिया गया गया|

शिकायत में उठाए गए मुख्य आरोप

  1. फर्जी सर्टिफ़िकेट और नकली दस्तावेज – योजनाओं को पूरा दिखाने के लिए कथित तौर पर कई गांवों में फर्जी प्रमाणपत्र बनाए गए तथा वास्तविक काम न करके भी रिपोर्ट जमा कर दी गईं ।
  2. ठेकेदारों और अधिकारियों की सांठगांठ – शिकायत में यह आरोप भी शामिल है कि कई ठेकेदारों और विभागीय अधिकारियों ने अपने बीच सामंजस्य बना कर करोड़ों की अनियमितता की। वितरित कार्य वास्तविक नहीं थे, लेकिन भुगतान सरकारी फंड से कर दिया गया|
  3. बैंक गारंटी और नकली दस्तावेज – इस घोटाले में नकली बैंक गारंटी का उपयोग कर योजनाओं की मंज़ूरी ली गई। वे दस्तावेज़ फर्जी ईमेल डोमेन का सहारा लेते थे और बैंक द्वारा सत्यापन से बच निकले|

तीसरी पार्टी की प्रमाणिकता पर सवाल

केंद्र सरकार की आत्मादेशित तीसरी पार्टी एजेंसी ने मध्यप्रदेश के 1,271 “पूर्ण” घोषित किए गए गांवों में सर्वेक्षण किया। रिपोर्ट में स्पष्ट परिणाम मिले: केवल 209 जगहों पर ही योजना का ज़मीनी अमल सही रहा, जबकि 217 गांवों तक पानी पहुँचा ही नहीं, और कई जगहों पर तो नल कनेक्शन तक स्थापित नहीं किया गया जबकि वहां काम पूरी तरह ‘पूरा’ दिख रहा था | 778 गांवों के 390 सैंपलों में बैक्टीरियल संदूषण तो 50.8% सैंपलों में रासायनिक मिलावट मिली, जिससे योजना की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठे ।

प्राथमिकी तक की संभावना

  1. शिकायत में मांग की गई है कि फर्जी प्रमाणपत्रों एवं गारंटी जमा करवाने वालों के खिलाफ केस दर्ज किया जाए, दस्तावेज जब्त किए जाएं और दोषियों पर आपराधिक कार्रवाई हो।
  2. लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंडल के उच्च अधिकारियों को भी रिपोर्ट देने के लिए नोटिस भेजा गया है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि दिक्कत आने के बाद क्या कार्यवाही की गई या नहीं।

राजनीतिक हलचले और विपक्ष की प्रतिक्रिया

विपक्षी दलों ने इस मामले को तूल देते हुए सरकार पर कटाक्ष किया है:

  1. कांग्रेस समेत अन्य राजनीतिक दलों का कहना है कि यह घोटाला मध्यप्रदेश सरकार की सभी योजनाओं पर सवाल खड़े करता है।
  2. पूर्व विधायक किशोर समरीते की जांच की मांग पर विपक्ष ने जोर देते हुए इस पूरे मामले की सीबीआई या हाईकोर्ट मॉनिटर वाले SIT जांच की माँग की है।

राज्य सरकार की जवाबदेही

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने स्वयं मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत एक पहल की:

  1. मंत्री संपत्तिया उइके के खिलाफ निर्देशित जांच जारी है, जिसमें सात दिनों के अंदर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया।
  2. उसके साथ ही लोक स्वास्थ्य विभाग के परियोजना अधिकारियों को जवाबदेही तय करने हेतु पत्र लिखा गया है ।

कदम कहाँ तक पर्याप्त?

इस जाँच-प्रक्रिया की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि:

  1. क्या विभागीय अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ फॉरेंसिक, बैंक गारंटी, दस्तावेज़ों की सही जाँच पूरी होती है?
  2. क्या सरकारी राशि की वसूली संभव है?
  3. क्या भविष्य में ऐसे नियोजन को रोकने के लिए पारदर्शिता और तीसरी पार्टी सत्यापन प्रणाली मजबूत की जाएगी?

बात आगे की क्या?

जल जीवन मिशन देश में ग्रामीण पेयजल की स्थिति सुधारने की बड़ी योजना है, लेकिन मध्यप्रदेश में यह मामला योजना की पारदर्शिता, जवाबदेही और ज़मीनी प्रभाव पर गंभीर प्रश्न चिन्ह लगा रहा है। सात दिनों में आने वाली जांच रिपोर्ट ठोस आंदोलन का आधार बना सकता है। भविष्य में इस पर और राज्य-स्तरीय कार्रवाई की जाएगी या नहीं, यह मुख्यमंत्री कार्यालय की अगली रिपोर्ट पर निर्भर होगा। लेकिन फिलहाल यह मामला सार्वजनिक और राजनीतिक रूप से उबाल पर है।

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