Muskan Garg: नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट ने टीवी एंकर और आज तक की वरिष्ठ पत्रकार अंजना ओम कश्यप के पक्ष में बड़ा फैसला सुनाते हुए एक फर्जी यूट्यूब चैनल पर स्थायी निषेधाज्ञा जारी की है। यह आदेश न्यायमूर्ति तेजस करिया की एकल पीठ द्वारा दिया गया है।

मामला क्या था?
आज तक चैनल और अंजना ओम कश्यप ने एक फैंक यूट्यूब चैनल “@AnajanaomKashya” के खिलाफ मामला दायर किया था। बाद में आरोप लगाया गया था कि चैनल डिपफेक तकनीक का उपयोग करके उनकी पहचान का दुरुपयोग कर रहा था। बिना उनकी अनुमति के, अंजना की तस्वीरें, गढ़ी हुई वीडियो क्लिप्स और समाचार क्लिप्स चैनल पर अपलोड की जा रही थीं।

हाईकोर्ट का पक्ष और तर्क:
कोर्ट ने पाया कि इस नकली चैनल के नाम में सिर्फ एक अक्षर का फर्क था: “‘Kashya’” की जगह “‘Kashyap’” होना था: जिससे जानबूझकर भ्रम पैदा किया गया था। कोर्ट ने कहा कि इन फर्जी पेजों और वीडियो क्लिप्स से अंजना की प्रतिष्ठा को बहुत बड़ा नुकसान हो सकता है, क्योंकि उनमें मूल “एडिटोरियल कंट्रोल” नहीं था। न्यायमूर्ति तेजस करिया ने यह भी माना कि ऐसे नकली चैनल व्यक्तित्व अधिकारों और बौद्धिक संपदा अधिकारों का उल्लंघन करते हैं।

चैनल पहले ही हटाया गया था:
दिल्ली हाईकोर्ट ने जून 2025 में एक अंतरिम आदेश जारी करते हुए गूगल को 48 घंटे के अंदर उस फर्जी यूट्यूब चैनल को हटाने का आदेश दिया था। Google ने बाद में न्यायालय के आदेश का पालन किया और उस चैनल को हटा दिया गया।

फैसला और नतीजा:
अब कोर्ट ने स्थायी निषेधाज्ञा जारी की है, जिसका अर्थ है कि जो व्यक्ति इस फर्जी चैनल को चला रहा था, उसे अंजना का नाम, फोटो या चेहरा इस्तेमाल करने से पूरी तरह से प्रतिबंधित किया जाएगा। चैनल ऑपरेटर सुनवाई के दौरान कोर्ट में नहीं आया और कोई जवाब भी नहीं दिया: इसलिए मामला एक्स-पार्टे निपट गया। अंजना ओम कश्यप ने हर्जाने की मांग नहीं की थी, उनका मुख्य उद्देश्य था अपनी पहचान और अपनी प्रतिष्ठा की सुरक्ष करना।

व्यापक प्रभाव:
यह निर्णय डिजिटल युग में एक गहरी चेतावनी है, खासकर जब AI और डिपफेक टेक्नोलॉजी तेजी से विकसित हो रही हैं और इसका गलत इस्तेमाल हो सकता है और हो भी रहा है। कोर्ट ने कहा कि ऐसी गतिविधियाँ न सिर्फ कानूनी अधिकारों का उल्लंघन करती हैं, बल्कि झूठा समाचार और गुमराह करने वाली समाचार भी फैला सकती हैं।

दिल्ली हाईकोर्ट की यह रचना डिजिटल निजता और पत्रकारिता की रक्षा के लिए एक स्पष्ट संकेत है। अंजना ओम कश्यप की जीत सिर्फ उनके लिए नहीं, बल्कि उन सभी के लिए महत्वपूर्ण है जिनकी जानकारी और निजी फोटो वीडियो ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर हो गलत इस्तेमाल में आ सकती हैं।





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