Toshi Gupta: भारत की सबसे बड़ी जनजाति मध्य प्रदेश में के झाबुआ, अलीराजपुर, खरगोन और बड़वानी जिलों में मौजूद हैं। जिसका नाम भील जनजाति हैं। यहां की कुल आबादी 4,618,068 से ज्यादा हैं। आपको बताना चाहेंगे, भील जनजाति की जनजाति सबसे बड़ी हैं। साथ ही इसको दूसरे नामों से भी जाना जाता हैं। जैसे- बरेला, पटेलिया, राठिया और बेगास।

भील जनजाति की क्या खासियत हैं ?

भील जनजाति अपने आप में ही खास हैं। आपको जानकर थोड़ी हैरानी होगी कि यहां से शराब बनाने वाले फूल का उत्पाद किया जाता हैं। दरअसल, यहां महुआ नाम का फूल उगता हैं। जो स्वाद में मीठा होता हैं। जिसकी मात्रा यहां बहुत ज्यादा होती हैं। इस महुआ फूल के जरिए शराब बनाई जाती हैं। पहले यह फूल भील से बहार भेजा जाता हैं। फिर कुछ दिनों की मेहनत के बाद इस फूल से शराब बन कर तैयार होती हैं।

महुआ फूल की क्या खासियत हैं ?

1- आदिवासी लोग महुआ फूलों को इकट्ठा करके बेचते हैं, जिससे उन्हें आमदनी होती है।
2- महुआ फूल बदन दर्द, सुजन कम करने के काम आता हैं।
3- यह फूल सब्जी में डालकर भी खाया जाता हैं।
4- महुआ फूल जानवरों दुआरा खाया जाता हैं। जिससे उन्हें पोषण मिलता हैं।

आखिर महुआ फूल भील जनजाति के लिए क्यों इतना ख़ास हैं ?

भील जनजाति के महुआ फूल केवल फूल नहीं बल्कि एक आध्यात्मिक प्रतीक भी है। महुआ फूल भील में त्योहारों, रीति-रिवाज़ों में प्रयोग किया जाता है। आपको बता दे, इसे “कल्याण का पेड़” कहा जाता है। क्योंकि जीवन के हर शुभ काम में इसका उपयोग होता है।

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