Suvangi Pradhan: सऊदी अरब में हुए भीषण सड़क हादसे में मारे गए 45 भारतीय नागरिकों के शव अब देश वापस नहीं लाए जा सकेंगे। स्थानीय प्रक्रियाओं और कानूनी औपचारिकताओं के चलते सभी का अंतिम संस्कार सऊदी में ही किया जाएगा। हादसे में मारे गए लोगों के परिजन पहले ही मानसिक सदमे में हैं, वहीं अब मुआवजे को लेकर भी अनिश्चितता गहराती जा रही है।


कुल मिलाकर 45 भारतीयों सहित कई अन्य देशों के नागरिकों की गई थी जान
यह दुर्घटना पिछले सप्ताह मक्का के पास उस समय हुई थी, जब उमरा के लिए जा रहे भारतीय श्रद्धालुओं से भरी बस की आमने सामने से आ रहे एक ईंधन टैंकर से टक्कर हो गई। टकराते ही बस में आग लग गई और देखते ही देखते हालात बेकाबू हो गए। मौके पर ही कई लोगों की मौत हो गई जबकि गंभीर रूप से झुलसे यात्री अस्पताल में दम तोड़ते चले गए। भारतीय दूतावास ने जानकारी दी है कि सऊदी अरब के कानून के अनुसार, ऐसे हादसों में शवों को स्वदेश भेजना बेहद मुश्किल होता है। पोस्टमॉर्टम, पहचान की प्रक्रिया, अनुमति और अन्य कानूनी चरणों में कई सप्ताह लग सकते हैं। इतना लंबा इंतजार शवों की स्थिति और धार्मिक प्रक्रियाओं को देखते हुए संभव नहीं होता, इसलिए परिजनों की सहमति से पीड़ितों को सऊदी में ही सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।


मुआवजे के मुद्दे पर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है
सऊदी में निजी बस ऑपरेटरों पर देयता (लायबिलिटी) के नियम जटिल हैं और कई मामलों में बीमा कंपनियों पर निर्भर रहते हैं। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, ऑपरेटर के पास पर्याप्त इंश्योरेंस नहीं था, जिससे प्रभावित परिवारों को मिलने वाला मुआवजा बेहद कम या प्रतीकात्मक हो सकता है। भारतीय अधिकारियों ने सऊदी प्रशासन से औपचारिक बातचीत शुरू कर दी है ताकि मृतक परिवारों को अधिकतम सहायता दिलाई जा सके।


हादसे में मारे गए अधिकांश यात्री दक्षिण भारत के राज्यों से थे
कई गरीब परिवारों ने जीवनभर की बचत उमरा यात्रा के लिए जुटाई थी। अब उनके घरों में मातम पसरा है और परिजन सरकार से आर्थिक सहायता और न्याय की मांग कर रहे हैं। भारत सरकार ने कहा है कि पीड़ित परिवारों को कानूनी सहायता, बीमा दावा प्रक्रिया और अन्य औपचारिकताओं में पूरी मदद दी जाएगी

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