गीता राय : मध्यप्रदेश में आयुष्मान भारत योजना के तहत आयुष्मान कार्ड बनाने की प्रक्रिया बेहद धीमी गति से चल रही है इसका खामियाजा बुजुर्गों और श्रमिकों को भुगतना पड़ रहा है, जिन्हें समय पर स्वास्थ्य लाभ नहीं मिल पा रहा हैस्थिति यह है कि वय वंदना योजना के अंतर्गत प्रदेश में 34 लाख 72 हजार 386 बुजुर्गों के आयुष्मान कार्ड बनाए जाने थे,लेकिन जून के पहले सप्ताह तक केवल 14 लाख 25 हजार 397 कार्ड ही बन पाए हैं।
वय वंदना योजना के कार्ड
मध्यप्रदेश में वरिष्ठ नागरिकों के लिए संचालित वय वंदना योजना के तहत कार्ड निर्माण की प्रगति बेहद धीमी रही। इंदौर को दो लाख 83 हजार 67 कार्ड बनाने का लक्ष्य मिला था, लेकिन वहां केवल 73 हजार 409 कार्ड ही बनाए जा सके। इस तरह इंदौर का औसत 26 प्रतिशत पर सिमट गया।
भोपाल को एक लाख 51 हजार 505 कार्ड बनाने थे, मगर वहां भी लक्ष्य से काफी पीछे रहते हुए केवल 45 हजार 497 कार्ड तैयार हुए और औसत 30 प्रतिशत रहा।
जबलपुर को एक लाख 36 हजार 638 कार्ड बनाने थे, लेकिन यहां महज 32 हजार 468 कार्ड ही बन सके, जो कुल लक्ष्य का मात्र 24 प्रतिशत है।
ग्वालियर में एक लाख 39 हजार 156 कार्ड बनाए जाने थे, परन्तु सिर्फ 41 हजार 535 कार्ड बनाकर 30 प्रतिशत का औसत ही प्राप्त हो सका। योजना के तहत वरिष्ठ नागरिकों को विभिन्न सुविधाएं और पेंशन का लाभ पहुंचाया जाना था, लेकिन कमजोर क्रियान्वयन के चलते बड़ी संख्या में पात्र हितग्राही इससे वंचित हैं। अब प्रशासन पर योजना की गति तेज करने का दबाव बढ़ रहा है ताकि समय रहते सभी वरिष्ठ नागरिकों को योजना का लाभ मिल सके।
श्रमिक परिवारों के आयुष्मान कार्ड की रफ्तार धीमी
भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के तहत श्रमिक परिवारों के आयुष्मान कार्ड बनाए जाने की रफ्तार भी धीमी है। भोपाल में दो लाख 31 हजार छह कार्ड बनाए जाने थे लेकिन एक लाख 33 हजार 807 कार्ड ही बन सके।
