Toshi Gupta: गोवा भारत का छोटा सा शहर हैं। जो की अपनी खूबसूरती से लाखों लोगों को अपनी ओर खिचता हैं। वैसे तो यहां ज्यादातर लोग अपने वकेशंस के लिए आते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि कैथोलिक लोग यहां अपना खास त्योहार मनाने आते हैं। जी हां वह लोग साओ जोआओ फेस्टिवल मनाने आते हैं। हर साल 24 जून को वह साओ जोआओ फेस्टिवल मनाते हैं। यह फेस्टिवल गोवा में बहुत ही शानदार तरीके से मनाया जाता हैं।
आखिर क्या है साओ जोआओ फेस्टिवल ?, क्यों गोवा के लोगों के लिए साओ जोआओ फेस्टिवल खास हैं? चलिए जानते हैं।
क्या हैं साओ जोआओ फेस्टिवल ?
साओ जोआओ गोवा का एक मशहूर फेस्टिवल हैं। जिसको बड़े ही धूम धाम से मनाया जाता हैं। इस फेस्टिवल को कैथोलिक धर्म के लोग मनाते हैं। हर साल 24 जून को साओ जोआओ फेस्टिवल मनाया जाता हैं। इस खास दिन सेंट जॉन द बैपटिस्ट के जन्म दिवस को सेलिब्रेट किया जाता हैं। इसे बहुत ही अलग तरीके से मनाया जाता हैं। इस दिन कैथोलिक धर्म के युवा पुरुष नदियों और तालाबों में छलांग लगाते हैं। जिसके बाद काफी देर तक पानी में तरते हैं।
यह फेस्टिवल सिर्फ गोवा में ही क्यों मनाया जाता हैं ?
साओ जोआओ फेस्टिवल गोवा के लिए बहुत खास हैं। दरअसल, पोर्तुगी कैथोलिक रिलिजन को बस गोवा में ही लाए थे। जिसमें सेंट जॉन द बैपटिस्ट को कैथोलिक रिलिजन के महा गुरु का दर्जा दिया गया। तभी से कैथोलिक कम्युनिटी के लोग इस फेस्टिवल को मनाते हैं। ज्यादातर यह त्योहार गोवा के नार्थ इलाकों में मनाया जाता हैं। जैसे सिओलिम, सलिगो, अंजुना और बर्देज़।
कौन थें सेंट जॉन द बैपटिस्ट ?
सेंट जॉन द बैपटिस्ट कैथोलिक रिलिजन के गुरू थे। बैपटिस्ट का जन्म ईसा मसीह के जन्म से 6 महीने पहले हुआ था। उनका जन्म किसी चमत्कार से कम नहीं था। वह बहुत ही साधारण जीवन जीते थे। ऐसा माना जाता है कि, जॉन द बैपटिस्ट ने ही जीसस को जॉर्डन नदीं में डुबाया था। साथ ही पवित्र जीवन जीने का आर्शिवाद दिया था।
