Suvangi Pradhan: बेटियां अगर ठान लें तो हर मुश्किल रास्ता आसान हो जाता है…इन्हीं हौसलों और सपनों को सलाम करती है नई डिजिटल शॉर्ट फिल्म चैंपियन स्टोरी जो आठ बेटियों की सच्ची कहानियों पर आधारित है… इन कहानियों में संघर्ष है, जुनून है, और है वो जज़्बा जो इन्हें चैंपियन बनाता है…
देश के कोने कोने से आने वाली 8 लड़कियों पर तैयार की गई है फिल्म
चैंपियन स्टोरी एक सोशल इनिशिएटिव के तौर पर तैयार की गई फिल्म है, जिसका मकसद है देश के कोने कोने से आने वाली उन लड़कियों की प्रेरणादायक यात्राओं को सामने लाना जिन्होंने सीमित संसाधनों के बावजूद बड़ी कामयाबियां हासिल कीं है…फिल्म में शामिल आठ बेटियां अलग-अलग पृष्ठभूमियों से आती हैं, किसी ने खेल के मैदान में नाम रोशन किया, तो किसी ने विज्ञान, कला या शिक्षा के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई है…
भारत के अलग अलग हिस्सों में की गई है फिल्म की शूटिंग
निर्देशक के मुताबिक, इस शॉर्ट फिल्म का मकसद सिर्फ प्रेरित करना नहीं, बल्कि समाज को यह याद दिलाना है कि अगर अवसर मिले तो हर बेटी कुछ बड़ा कर सकती है… राजस्थान के एक छोटे गाँव से लेकर मणिपुर के पहाड़ी इलाकों तक, हर कहानी में एक अनोखी संघर्ष यात्रा और जीत का अहसास है…फिल्म की एक प्रमुख किरदार पूजा यादव हरियाणा की पहलवान हैं, जिन्होंने पारिवारिक विरोध और आर्थिक तंगी के बावजूद नेशनल लेवल पर मेडल जीता…वहीं नागालैंड की नेंसिहला जेमी शिक्षा के क्षेत्र में बदलाव की मिसाल बनीं, उन्होंने अपने गाँव की पहली लड़कियों की स्कूल लाइब्रेरी शुरू की…फिल्म में इन बेटियों की कहानी सिर्फ इंटरव्यू के ज़रिए नहीं दिखाई गई, बल्कि उनके जीवन के असली पलों को फिर से सजीव किया गया है…
सोशल मीडिया पर भी खूब चर्चा बटोर रही है यह फिल्म
कई दर्शकों ने इसे “बेटियों के संघर्ष और सफलता की सच्ची गाथा बताया है…निर्माताओं का कहना है कि यह तो बस शुरुआत है, आगे और भी राज्यों की बेटियों की कहानियों को शामिल करते हुए चैंपियन स्टोरी का अगला सीज़न लाने की योजना है…कहानी का संदेश साफ है की अगर विश्वास और मेहनत हो, तो हर बेटी बन सकती है अपनी कहानी की चैंपियन..
