Surbhi yadav: भारत में इस सप्ताह से लाखों मोबाइल यूज़र्स को चार बड़ी AI कंपनियों के नए सस्ते चैटबॉट्स का एक साल के लिए फ्री एक्सेस मिलने जा रहा है। गूगल ने जियो के साथ और Perplexity ने एयरटेल के साथ साझेदारी करके यह ऑफर शुरू किया है। इसका मतलब यह है कि अब कंपनियाँ मोबाइल डाटा पैक के साथ AI भी फ्री दे रही हैं, ताकि लोग AI को रोज़ के इस्तेमाल में शामिल करना शुरू कर दें।

कंपनियों की भारत पर नज़र, क्योंकि यहाँ यूज़र बेस सबसे बड़ा

यह सिर्फ उदारता दिखाने वाली नीति नहीं है, बल्कि भविष्य के बड़े बिज़नेस मॉडल की योजना है। भारत में दुनिया का सबसे बड़ा इंटरनेट यूज़र बेस है। यहाँ 900 मिलियन से ज़्यादा लोग इंटरनेट चलाते हैं। भारत का यूथ सबसे ज्यादा मोबाइल और ऑनलाइन समय देता है। कंपनियों का मक़सद है कि भारत के लोग अभी से AI के आदी बन जाएँ, ताकि आने वाले समय में जब पेमेंट आधारित मॉडल आए, तब लोग बिना हिचक पैसे दें और कंपनियाँ बड़े पैमाने पर revenue कमा सकें।

डाटा प्राइवेसी पर सवाल सबसे बड़ा

फ्री AI इस्तेमाल का दूसरा बड़ा पहलू डाटा प्राइवेसी है। भारत में अभी AI के लिए अलग और विस्तृत कानून नहीं है। DPDP एक्ट तो बन चुका है, लेकिन लागू होने की प्रक्रिया अभी बाकी है। कई विशेषज्ञ कह रहे हैं कि जब यह पूरा लागू होगा तो भारत की डिजिटल प्राइवेसी दुनिया में बहुत मजबूत हो सकती है। लेकिन फिलहाल नियम थोड़े लचीले हैं, जिसकी वजह से कंपनियाँ यहाँ आसानी से फ्री लॉन्च कर पा रही हैं और बड़े स्तर पर यूज़र डाटा इकट्ठा कर रही हैं।

भारत भविष्य में AI मार्केट का गेम चेंजर बन सकता है

कंपनियों को लगता है कि भारत से मिलने वाला लोकल और विविध डेटा उनके मॉडल को और स्मार्ट बनाएगा। अगर 5% फ्री यूज़र भी बाद में paid मॉडल पर चले गए, तो भी यह कंपनियों के लिए बहुत बड़ा लाभ है। यही कारण है कि अभी AI कंपनियाँ भारत में यूज़र्स जोड़ने की बड़ी दौड़ में जुटी हैं। भारत आने वाले समय में AI बाजार की दिशा तय करने वाला सबसे बड़ा देश बन सकता है।

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