Suvangi Pradhan: देश की राजधानी नई दिल्ली से, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने एक बड़ा दिया है जिसमें उन्होंने कहा है कि “मेरे निजी विचार में” आरएसएस पर पाबंदी लगनी चाहिए…उनके मुताबिक, आज देश में जो कानून-व्यवस्था की चुनौतियाँ हैं, उनमें आरएसएस और भाजपा के गठबंधन का व्यापक हाथ है…
देश में सामाजिक-राजनीतिक अशांति के लिए आरएसएस और भाजपा है जिम्मेदार
खरगे ने कहा कि आज जिस तरह देश में सामाजिक-राजनीतिक अशांति है, उसके लिए आरएसएस और भाजपा दोनों जिम्मेदार हैं…उन्होंने यह भी याद दिलाया कि भारत के पहले गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने भी आरएसएस के व्यवहार पर सवाल उठाते हुए पत्र लिखा था, जिसमें उन्होंने संघ के कार्यों पर चिंता जाहिर की थी…खरगे ने यह भी कहा है कि ये मेरा निजी विचार है ….यदि प्रधानमंत्री सच-मुच सरदार पटेल की बात समझते हैं, तो इस दिशा में कदम उठाएँ….
बयान के बाद राजनीतिक हलचल हुई तेज
उनके बयान के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है… विरोधियों ने खरगे के पिछले वक्तव्यों और क्रियाओं को भी उठाया है, जिसमें उन पर दृष्टिकोण बदलने का आरोप है…भाजपा ने कहा है कि जब खरगे खुद कभी राज्य शासन में थे, तब उन्होंने आरएसएस के आयोजन में हिस्सा लिया था… खरगे का यह बयान निश्चित तौर पर संवेदनशील विषय पर है क्योंकि आरएसएस पर पाबंदी का मूल प्रश्न भारत की राजनीतिक और सामाजिक संतुलन से जुड़ा है… लेकिन, तत्काल राजनीतिक-प्रभाव को देखते हुए, यह बयान कांग्रेस-भाजपा के बीच संवाद को और तीखा कर सकता है…
प्रियंक खरगे द्वारा सरकारी स्कूल-कॉलेज परिसरों में आरएसएस गतिविधियों पर लगाई गई रोक
खरगे के बयान के तुरंत बाद, कर्नाटक में उनके पुत्र प्रियंक खरगे द्वारा सरकारी स्कूल-कॉलेज परिसरों में आरएसएस गतिविधियों पर रोक लगाने की मांग उठाई गई है…इस तरह, कांग्रेस की ओर से दो स्तरीय रणनीति दिखाई दे रही है…. केंद्र-स्तर पर आरएसएस पर पाबंदी का आह्वान, और राज्य-स्तर पर उसके प्रभाव को नियंत्रित करने की कोशिश… अब इस तरह के बयान से चुनावी माहौल पर क्या असर होगा ईए तो आनेवाला समय ही बताएगा..
