रिया सिन्हा: मध्यप्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) कैलाश मकवाणा ने अदम्य साहस और उत्कृष्ट कर्तव्यनिष्ठा का परिचय देने वाले प्रधान आरक्षक अरविंद रघुवंशी और क्लीनर छोटा केवट को नकद पुरस्कार से सम्मानित करने का आदेश दिया है। इन दोनों ने अपनी जान की परवाह न करते हुए एक बस दुर्घटना को टाला और उसमें सवार 40 यात्रियों की जान बचाई। डीजीपी ने पुलिसकर्मियों के इस वीरतापूर्ण कार्य को ‘देशभक्ति-जनसेवा’ के ध्येय वाक्य का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण बताया है और उनके सम्मान में पुरस्कार की घोषणा की है।
बस दुर्घटना टालने में दिखाई बहादुरी
यह घटना तब हुई जब प्रधान आरक्षक अरविंद रघुवंशी और क्लीनर छोटा केवट ने एक बस को अनियंत्रित होते हुए देखा, जिसके ब्रेक फेल हो गए थे। बस में लगभग 40 यात्री सवार थे और वह एक बड़े हादसे की तरफ बढ़ रही थी। बिना किसी देरी के, रघुवंशी और केवट ने असाधारण तत्परता दिखाते हुए बस पर नियंत्रण पाने की कोशिश की। उनके साहसी प्रयास और सूझबूझ से बस को सुरक्षित रोक लिया गया, जिससे उसमें सवार सभी यात्रियों की जान बच गई। उनका यह कार्य वास्तव में उत्कृष्ट मानवीय सेवा का प्रतीक है।
उत्कृष्ट कार्य को मिली विशेष पहचान
प्रधान आरक्षक अरविंद रघुवंशी और क्लीनर छोटा केवट के इस प्रेरणादायक कार्य की जानकारी मिलने पर डीजीपी कैलाश मकवाणा ने तुरंत उन्हें सम्मानित करने का फैसला किया। पुलिस महानिदेशक ने न केवल नकद पुरस्कार की घोषणा की है, बल्कि विभागीय स्तर पर भी उनके साहस की सराहना की है। डीजीपी मकवाणा का यह कदम पुलिस बल के मनोबल को बढ़ाने और अन्य कर्मचारियों को भी अपनी ड्यूटी के दौरान असाधारण साहस दिखाने के लिए प्रेरित करेगा, जिससे जनसेवा और सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता और मजबूत होगी।

