कामना कासोटिया भोपाल:

नई रणनीति, आधुनिक तकनीक और स्वदेशी निर्माण की बदौलत भारत ने ग्लोबल वायुशक्ति में हासिल किया महत्वपूर्ण स्थान

इस सप्ताह एक बेहद अहम रक्षा-खबर सामने आई है। विश्व-संख्या में दर्ज किए जाने वाले World Directory of Modern Military Aircraft (WDMMA) की ताज़ा रैंकिंग के अनुसार भारत की वायुसेना अब चीन की वायुसेना को पछाड़ते हुए तीसरे स्थान पर पहुँच चुकी है।

इस उपलब्धि को सिर्फ एक संख्या के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। यह संकेत है भारत के लिए — रणनीति, स्वदेशी निर्माण, आधुनिक विमान बेड़े और सैन्य तत्परता के क्षेत्र में मिले व्यापक बदलावों का।
आइए जानें इस बदलाव के पीछे क्या-क्या कारण हैं और इसका क्या-क्या महत्व है।

बदलते हालात का विश्लेषण

  • WDMMA की रैंकिंग में वायुसेनाओं की तुलना सिर्फ विमान संख्या से नहीं, बल्कि टीवीआर (True Value Rating) नामक मापदंड से की जाती है, जिसमें शामिल हैं: उपकरणों की गुणवत्ता, तैनाती-तीव्रता, आधुनिकीकरण, लॉजिस्टिक्स, प्रशिक्षण आदि।
  • 2022 की रिपोर्ट में भारत की वायुसेना को लगभग 69.4 की टीवीआर स्कोर दी गई थी, जबकि उसी सूची में चीन की वायुसेना को 63.8 के साथ चौथे स्थान पर रखा गया था।
  • इस प्रकार, भारत ने संख्या से तो चीन से पीछे हो सकता है, लेकिन रणनीतिक सामर्थ्य, मिश्रित विमान-बेड़े, स्वदेशी कार्यक्रम और तैनाती-क्षमता के दृष्टिकोण से खुद को बेहतर स्थिति में स्थापित किया है।

इस सफलता के प्रमुख कारण

स्वदेशी उत्पादन एवं आधुनिककरण

भारत ने पिछले वर्षों में अपने विमान-विकास और रक्षा-उद्योग में एक गंभीर रुख अपनाया है। स्वदेशी विमान बनाने, रख-रखाव क्षमताएँ बढ़ाने और अद्यतित हथियार प्रणालियों को अपनाने में तेजी आई है।
साथ ही, बहुस्तरीय विमान बेड़े जैसे कि इनराष्ट्र के साथ-साथ विदेशी मॉडल भी शामिल हैं — इससे विविध मिशन-क्षमता में वृद्धि हुई है।

रणनीतिक दृष्टिकोण में बदलाव

भारत ने अपने वायुसेना-कौशल को सिर्फ क्षेत्रीय रक्षा तक सीमित न रखकर, व्यापक दृष्टि से तैयार किया है। साथ ही, हवाई शक्ति को वायु, हल्के बल और रणनीतिक प्रक्षेपण की क्षमताओं से जोड़ा गया है। यह बदलाव वायुसेना को एक ‘प्रतिद्वंद्वी’ वायुसेना की दृष्टि से भी सक्षम बनाता है।

सक्रिय विकास एवं निर्णय-निर्धारण

मौजूदा भू-राजनीतिक परिदृश्यों ने भारत को यह सीख दी है कि सिर्फ आंकड़े या विमान संख्या काफी नहीं — उपयोगिता, तत्परता और क्षमताओं का संयोजन मायने रखता है। भारत ने इस दिशा में कदम बढ़ाए हैं, जो WDMMA जैसी रिपोर्टों में परिलक्षित हो रहा है।

इसका भारत-और-विश्व पर क्या असर होगा?

  • इस उपलब्धि से भारत को न सिर्फ राष्ट्रीय आत्मविश्वास बढ़ेगा बल्कि क्षेत्रीय एवं वैश्विक स्तर पर उसकी स्थिति भी मजबूत होगी। इससे विदेश नीति, रक्षा साझेदारियों और रणनीतिक संवाद में उसे एक बेहतर-पोजीशन मिलेगा।
  • इसके साथ-साथ, यह अन्य अर्थों में भी संकेत है — जैसे कि भारत-के-लिए वायुशक्ति अब सिर्फ रक्षा का साधन नहीं बल्कि रणनीतिक प्रभाव का माध्यम बन रही है।
  • यह चीन जैसी बड़ी वायुसेना को क़रीब पहुंचने या “सामान्य स्थान” पर ला देने का संकेत भी है; जबकि अमेरिका-रूस जैसी महान शक्तियों के बाद तीसरे स्थान पर आना एक बड़ा बदलाव है।

आज जब हम कहते हैं कि Indian Air Force दुनिया की तीसरी सबसे शक्तिशाली वायुसेना बन गई है — तो यह सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि एक परिवर्तन का प्रतीक है। इस बदलाव ने दिखाया है कि यदि योजना, उत्पादन-क्षमता और रणनीति एक साथ काम करें, तो परिणाम कितने प्रभावित कर सकते हैं।

भारत ने एक लंबी दूरी तय की है — लेकिन यह शुरुआत है। आगे की चुनौतियों से निपटना भी उतना ही महत्वपूर्ण होगा जितना इस उपलब्धि का जश्न मनाना।

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