कामना कासोटिया भोपाल:
कॉमेडियन और अभिनेता कैपिल शर्मा के कनाडा स्थित कैफे, ‘कैप्स कैफे‘ (Kap’s Cafe), पर चौथे महीने में तीसरी बार गोलीबारी की घटना सामने आई है। यह हमला 16 अक्टूबर 2025 को सुबह करीब 4:30 बजे हुआ, जब अज्ञात हमलावरों ने कैफे की इमारत पर कई गोलियां चलाईं। हालांकि इस हमले में कोई घायल नहीं हुआ, लेकिन कैफे की खिड़कियों और दीवारों पर स्पष्ट गोली के निशान देखे गए। कैफे उस समय बंद था, जिससे कोई जनहानि नहीं हुई।
हमले के बाद की स्थिति
इस हमले के बाद, लॉरेंस बिश्नोई गैंग के सदस्य गोल्डी ढिल्लों और कुलविर सिधु (नेपाली) ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर हमले की जिम्मेदारी ली। वीडियो में उन्होंने बॉलीवुड और पंजाबी उद्योग से जुड़े लोगों को चेतावनी दी कि “गोलियां कहीं से भी आ सकती हैं”। यह बयान गैंग के बढ़ते प्रभाव और धमकी भरे रवैये को दर्शाता है।
पिछली घटनाएँ
यह पहली बार नहीं है जब कैप्स कैफे को निशाना बनाया गया है। इससे पहले 10 जुलाई और 7 अगस्त 2025 को भी कैफे पर गोलीबारी की घटनाएँ हुई थीं। पहली घटना के बाद, खालिस्तानी संगठन बाबर खालसा इंटरनेशनल के सदस्य हरजीत सिंह लड्डी ने हमले की जिम्मेदारी ली थी। दोनों हमलों में भी कोई जनहानि नहीं हुई थी, लेकिन इन घटनाओं ने सुरक्षा चिंताओं को जन्म दिया है।
जांच और प्रतिक्रिया
कनाडा की सुर्रे पुलिस सेवा (SPS) ने इस ताजा हमले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू कर दी है। स्थानीय अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि या वीडियो की जानकारी साझा करें। इस बीच, सुर्रे के मेयर ब्रेंडा लॉक ने इस हमले की निंदा करते हुए कहा कि “हमारे शहर को हिंसा से डराया नहीं जा सकता”।
कनाडा की सरकार ने लॉरेंस बिश्नोई गैंग को आतंकवादी संगठन घोषित किया है, और इस मामले में भारतीय अधिकारियों से भी सहयोग की उम्मीद जताई है।
समुदाय की प्रतिक्रिया
कैप्स कैफे की टीम ने इस हमले के बाद सोशल मीडिया पर एक बयान जारी किया, जिसमें उन्होंने कहा, “हम इस सदमे को महसूस कर रहे हैं, लेकिन हम हार नहीं मानेंगे। हिंसा हमारे आत्मविश्वास या समुदाय की भावना को नहीं तोड़ सकती।” स्थानीय भारतीय समुदाय ने भी इस हमले की निंदा की है और सुरक्षा बढ़ाने की मांग की है।
कैपिल शर्मा का कैप्स कैफे अब तक तीन बार हमलों का शिकार हो चुका है, जो कि संगठित अपराध और अंतरराष्ट्रीय गैंग गतिविधियों की ओर इशारा करता है। इन घटनाओं ने न केवल कैफे मालिक और उनके कर्मचारियों की सुरक्षा को चुनौती दी है, बल्कि कनाडा में भारतीय समुदाय की सुरक्षा और उनके व्यवसायों पर भी सवाल उठाए हैं। स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय अधिकारियों की संयुक्त कार्रवाई इस समस्या के समाधान के लिए आवश्यक है।
