पर्यावरण और परंपरा के बीच संतुलन की नई कोशिश
सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक निर्णय में दिवाली पर पटाखों के उपयोग की अनुमति दे दी है। यह फैसला पिछले 10 वर्षों से लागू प्रतिबंध के बाद आया है। अदालत ने इसे एक “परीक्षण अवधि” (test period) बताया है, जिसके दौरान प्रदूषण स्तर पर नज़र रखी जाएगी। यदि प्रदूषण नियंत्रण में रहा, तो आने वाले वर्षों में भी यह छूट जारी रह सकती है।
क्यों लगा था प्रतिबंध
साल 2015 के बाद से बड़े शहरों में वायु विशेषता गंभीर स्तर तक पहुँचने लगी थी। इसके चलते सुप्रीम कोर्ट ने पटाखों की बिक्री और जलाने पर रोक लगा दी थी।
उस समय अदालत ने कहा था कि “जन स्वास्थ्य और पर्यावरण की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।”
नया निर्णय: सीमित छूट के साथ जिम्मेदारी भी
सुप्रीम कोर्ट ने इस बार स्पष्ट किया है कि
“यह अनुमति उत्सव की भावना को ध्यान में रखते हुए दी जा रही है, पर नागरिकों को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी।”
लोग अब पटाखे खरीद, बेच और फोड़ सकते हैं, लेकिन केवल ग्रीन क्रैकर्स (Green Crackers) के उपयोग की सलाह दी गई है। कोर्ट ने यह भी कहा है कि निर्धारित समय और सीमित मात्रा में ही पटाखे जलाने की अनुमति होगी।
जनभावनाएँ: राहत और जिम्मेदारी दोनों
कई लोगों ने इस फैसले का स्वागत किया है। स्थानीय दुकानदारों और निर्माताओं में खुशी की लहर है।
दिल्ली के एक पटाखा विक्रेता ने कहा —
“हम 10 साल बाद पहली बार उम्मीद की रोशनी देख रहे हैं। व्यापार फिर से चल पड़ेगा।”
वहीं पर्यावरणविदों ने लोगों से सावधानी बरतने की अपील की है।
पर्यावरण विशेषज्ञ रचना मेहरा के अनुसार —
“यह मौका है कि हम अपनी परंपरा को पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता के साथ निभाएँ। ज़रूरत है संतुलित उत्सव की।
प्रदूषण की निगरानी पर सख्ती
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों को आदेश दिया है कि दिवाली से पहले और बाद में वायु विशेषता की लगातार निगरानी की जाए। यदि प्रदूषण स्तर बढ़ा, तो छूट दोबारा वापस ली जा सकती है।
रोशनी के साथ जागरूकता भी जरूरी
यह फैसला लोगों के लिए खुशी का कारण है, लेकिन साथ ही एक नैतिक ज़िम्मेदारी भी लाता है। उत्सव तभी सार्थक है जब वह पर्यावरण और समाज दोनों के लिए सुरक्षित हो।दिवाली की असली रोशनी वही है जो खुशियों के साथ स्वच्छ हवा और सुरक्षित जीवन भी लाए।
स्रोत: द तत्व इंडिया (Instagram पोस्ट)
