रिपोर्ट, काजल जाटव: गाजा में एक बार फिर से हिंसा भड़क उठी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की युद्धविराम की अपील और सख्त चेतावनी के बावजूद इजरायल ने गाजा पर शनिवार को हवाई हमला किया, जिसमें कम से कम 70 फिलिस्तीनी नागरिक मारे गए हैं। मृतकों में कई महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, यह हमला गाजा शहर के घनी आबादी वाले हिस्सों में किया गया, जहाँ लोगों को सैन्य ठिकानों के बीच शरण लेनी पड़ी थी।

यह घटना ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका सक्रिय रूप से हमास और इजरायल के बीच युद्धविराम की कोशिशों में जुटा है। लेकिन इस नए हमले ने स्थिति को और जटिल बना दिया है, और एक बार फिर से यह सवाल उठ खड़ा हुआ है कि क्या इस संघर्ष का कोई अंत संभव है।
ट्रंप की चेतावनी: “इजरायल को तुरंत बमबारी रोकनी होगी”
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को व्हाइट हाउस में एक आपात बैठक के बाद बयान जारी करते हुए कहा था कि
“हम मध्य पूर्व में और निर्दोष लोगों का खून नहीं देखना चाहते। मैंने इजरायल से स्पष्ट कहा है कि अब समय आ गया है जब बमबारी रोकी जाए और संवाद की शुरुआत की जाए।”
ट्रंप ने कहा कि हमास ने युद्धविराम के लिए अपनी प्रारंभिक सहमति दे दी थी, और अमेरिका की मध्यस्थता में एक अस्थायी संघर्षविराम की योजना तैयार की जा रही थी। उन्होंने इजरायल को चेतावनी दी थी कि अगर उसने अमेरिकी अपील की अनदेखी की, तो इससे “कूटनीतिक परिणाम” हो सकते हैं।
हालांकि, ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों ने अब संकेत दिए हैं कि इजरायल की ओर से इस चेतावनी को गंभीरता से नहीं लिया गया, क्योंकि अगले ही दिन यानी शनिवार को गाजा पर बमबारी शुरू कर दी गई।
हमले में 70 से अधिक नागरिकों की मौत, सैकड़ों घायल
अल जजीरा और अन्य स्थानीय स्रोतों के मुताबिक, शनिवार को हुए हवाई हमलों में कम से कम 70 लोग मारे गए और 200 से अधिक घायल हुए हैं। गाजा सिटी और खान यूनिस इलाके में सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है।
गवाहों का कहना है कि हमले आधी रात के बाद शुरू हुए, जब ज्यादातर लोग अपने घरों में सो रहे थे। कई इमारतें पूरी तरह ध्वस्त हो गईं, और बचावकर्मी मलबे में फंसे लोगों को निकालने में जुटे हैं।
गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि मृतकों में 25 बच्चे और 14 महिलाएं शामिल हैं।
इजरायल का दावा: हमास के ठिकानों पर कार्रवाई
दूसरी ओर, इजरायली रक्षा बल (IDF) ने बयान जारी कर कहा कि उन्होंने गाजा में हमास के रॉकेट लॉन्चिंग ठिकानों और कमांड सेंटरों पर हमला किया है।
इजरायल का दावा है कि ये हमले “आत्मरक्षा” के तहत किए गए हैं क्योंकि हमास की ओर से दक्षिणी इजरायल पर रॉकेट दागे गए थे।
IDF प्रवक्ता ने कहा,
“हम नागरिकों को निशाना नहीं बना रहे हैं। हमास जानबूझकर अपने ठिकाने आवासीय इलाकों में बनाता है, जिससे आम लोग हताहत होते हैं।”
हालांकि, संयुक्त राष्ट्र और मानवीय संगठनों ने इजरायल के इस कदम की कड़ी आलोचना की है, यह कहते हुए कि युद्धविराम की कोशिशों के दौरान इस तरह के हमले शांति प्रक्रिया को कमजोर करते हैं।
ट्रंप प्रशासन की प्रतिक्रिया: ‘अस्वीकार्य हिंसा’
हमले की खबर आने के बाद वॉशिंगटन से अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ट्वीट करते हुए कहा:
“हमने इजरायल से संयम बरतने की अपील की थी। गाजा में जो हुआ, वह अस्वीकार्य है। निर्दोष लोगों की जान बचाने के लिए तुरंत युद्धविराम लागू किया जाना चाहिए।”
अमेरिकी विदेश विभाग ने भी बयान जारी कर कहा कि अमेरिका “स्थिति की समीक्षा कर रहा है” और जल्द ही इजरायल से स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। ट्रंप प्रशासन के सूत्रों का कहना है कि अमेरिका ने इस हमले को “वॉर्निंग इग्नोरेंस” के रूप में देखा है — यानी कि इजरायल ने अमेरिकी चेतावनी को नजरअंदाज किया।
गाजा में बिगड़ता मानवीय संकट
गाजा पहले ही भोजन, पानी और चिकित्सा सुविधाओं की भारी कमी से जूझ रहा है। लगातार बमबारी के कारण हजारों लोग बेघर हो चुके हैं। अस्पतालों में दवाओं की किल्लत है और बिजली की आपूर्ति भी बाधित हो रही है।
संयुक्त राष्ट्र के मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय (OCHA) के अनुसार, गाजा में अब 1,50,000 से अधिक लोग अपने घरों से विस्थापित हो चुके हैं।
रेड क्रॉस ने चेतावनी दी है कि अगर संघर्ष जारी रहा तो गाजा में “पूर्ण मानवीय आपदा” की स्थिति पैदा हो जाएगी।
हमास की प्रतिक्रिया: “यह हमारे लोगों पर युद्ध है”
हमास के प्रवक्ता फव्जी बरहूम ने बयान जारी कर कहा कि इजरायल की बमबारी “शांति प्रक्रिया को नष्ट करने की कोशिश” है।
उन्होंने कहा, “हमने युद्धविराम की बात मान ली थी, लेकिन इजरायल ने हमारे विश्वास को तोड़ा। यह हमारे लोगों के खिलाफ युद्ध है, और हम इसका जवाब देंगे।”
हमास ने साथ ही चेतावनी दी कि अगर हमले जारी रहे तो वे “बड़े पैमाने पर जवाबी कार्रवाई” करेंगे।
संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने बयान जारी कर कहा कि वे इस नई हिंसा से गहराई से चिंतित हैं और सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है।
ब्रिटेन, फ्रांस और रूस ने भी इजरायल से “तुरंत युद्धविराम” की मांग की है।
मानवाधिकार संगठनों ने कहा कि यह हमला “युद्ध अपराधों” की श्रेणी में आ सकता है, क्योंकि यह घनी आबादी वाले क्षेत्रों में बिना चेतावनी के किया गया।
क्या ट्रंप युद्धविराम लागू कर पाएंगे?
ट्रंप प्रशासन इस समय एक कठिन कूटनीतिक स्थिति में है। एक तरफ अमेरिका लंबे समय से इजरायल का प्रमुख सहयोगी रहा है, वहीं दूसरी ओर अब ट्रंप खुद मध्य पूर्व में शांति स्थापना के “आर्किटेक्ट” बनना चाहते हैं।
लेकिन जब अमेरिकी चेतावनी के बावजूद इजरायल ने हमला किया है, तो यह सवाल उठता है कि क्या अमेरिका अपने प्रभाव का उपयोग कर पाएगा या नहीं।
गाजा में हुई इस नई तबाही ने साबित कर दिया है कि युद्धविराम की राह अभी भी बहुत कठिन है।
70 से अधिक लोगों की मौत केवल आंकड़े नहीं हैं, बल्कि यह इस संघर्ष के मानवीय मूल्य की याद दिलाते हैं — और इस बात की भी कि शांति की कीमत अक्सर निर्दोष लोगों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ती है।
