रिपोर्ट, काजल जाटव: भारत और चीन के बीच लगभग चार साल बाद सीधी हवाई सेवाएं फिर से शुरू होने जा रही हैं। विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को एक प्रेस रिलीज़ जारी कर बताया कि दोनों देशों के बीच डायरेक्ट फ्लाइट्स शुरू करने पर समझौता हो गया है।
इसके तुरंत बाद इंडिगो एयरलाइंस ने घोषणा की कि वह 26 अक्टूबर 2025 से कोलकाता और ग्वांगझू (Guangzhou) के बीच दैनिक नॉन-स्टॉप उड़ानें शुरू करेगी। यह कदम दोनों देशों के बीच आर्थिक, व्यावसायिक और सांस्कृतिक संबंधों में नई जान डालने वाला माना जा रहा है।

समझौता कब और कैसे हुआ?
भारत और चीन के बीच सीधी उड़ानें मार्च 2020 में कोविड-19 महामारी के दौरान बंद कर दी गई थीं। महामारी के बाद दोनों देशों के बीच हवाई सेवाओं को पुनः शुरू करने को लेकर कई दौर की बातचीत चली, लेकिन सीमा विवाद और राजनीतिक तनाव के चलते समझौता लंबे समय तक टलता रहा।
हाल के महीनों में, जब दोनों देशों के अधिकारी व्यापारिक और कांसुलर स्तर पर फिर से संवाद बहाल करने लगे, तब सितंबर 2025 में नई दिल्ली और बीजिंग के बीच हुई बैठक में इस पर सहमति बनी। इसी बैठक में तय हुआ कि शुरुआत में सीमित उड़ानों के जरिए सेवा फिर से शुरू की जाएगी और धीरे-धीरे अन्य शहरों के बीच भी रूट खोले जा सकते हैं।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा,
“भारत और चीन के बीच सीधी उड़ानें दो देशों के बीच आपसी संपर्क और व्यापार को बढ़ावा देंगी। यह दोनों देशों के नागरिकों और व्यवसायों के लिए एक सकारात्मक कदम है।”
फ्लाइट का रूटीन और डिटेल्स क्या होंगी?
इंडिगो एयरलाइंस ने बताया कि वह इस समझौते के तहत 26 अक्टूबर 2025 से कोलकाता से ग्वांगझू के बीच दैनिक (Daily) नॉन-स्टॉप फ्लाइट्स शुरू करेगी।
फ्लाइट शेड्यूल इस प्रकार रहेगा:
- उड़ान संख्या: 6E-1801
- रूट: कोलकाता (CCU) → ग्वांगझू (CAN)
- प्रस्थान समय: सुबह 10:30 बजे (भारतीय समयानुसार)
- पहुंचने का समय: शाम 4:30 बजे (चीन समयानुसार)
- वापसी उड़ान: ग्वांगझू से रात 7:30 बजे रवाना होकर कोलकाता सुबह 9:00 बजे पहुंचेगी
- सेवा आवृत्ति: प्रतिदिन (7 दिन सप्ताह में)
- फ्लाइट का समय: लगभग 4 घंटे 30 मिनट
इंडिगो का यह मार्ग दोनों देशों के बीच यात्रा को सरल बनाएगा, क्योंकि अभी तक यात्रियों को बैंकॉक, सिंगापुर या हांगकांग जैसे तीसरे देश से होकर यात्रा करनी पड़ती थी, जिससे समय और लागत दोनों बढ़ जाते थे।
फ्लाइट टिकट कहां से बुक कर सकते हैं?
यात्री अपनी टिकटें कई माध्यमों से बुक कर सकते हैं:
- इंडिगो की आधिकारिक वेबसाइट (https://www.goindigo.in/) पर जाकर।
- मोबाइल ऐप के माध्यम से, जहां मल्टी-सिटी बुकिंग, सीट सिलेक्शन और भोजन विकल्प उपलब्ध रहेंगे।
- ऑनलाइन ट्रैवल पोर्टल्स जैसे Goibibo, MakeMyTrip, EaseMyTrip, Yatra, या Cleartrip पर।
- एयरपोर्ट टिकट काउंटर और अधिकृत ट्रैवल एजेंट्स के माध्यम से।
शुरुआती चरण में टिकटों की कीमत प्रतिस्पर्धी रखी जाएगी। शुरुआती ऑफर के तहत राउंड-ट्रिप टिकट करीब ₹25,000–₹28,000 के बीच मिलने की संभावना है, जबकि बिजनेस यात्रियों के लिए फ्लेक्सी पैकेज भी उपलब्ध रहेंगे।
इस फैसले के क्या फायदे होंगे?
भारत और चीन के बीच सीधी उड़ानों की बहाली से कई आर्थिक, सांस्कृतिक और रणनीतिक लाभ होंगे:
1. व्यापार और निवेश को नई गति मिलेगी
भारत और चीन के बीच द्विपक्षीय व्यापार सालाना 120 अरब डॉलर से अधिक का है। लेकिन महामारी और उड़ानों की कमी के कारण व्यापारिक यात्राएं मुश्किल हो गई थीं। अब कारोबारी, निवेशक और उद्योग प्रतिनिधि सीधे दोनों देशों के बीच यात्रा कर सकेंगे, जिससे व्यापारिक समझौतों, सप्लाई चेन और मैन्युफैक्चरिंग सहयोग को बढ़ावा मिलेगा।
2. छात्रों और शोधकर्ताओं को राहत
चीन की विश्वविद्यालयों में लगभग 20,000 भारतीय छात्र पढ़ाई कर चुके हैं, जिनमें से बड़ी संख्या महामारी के बाद वापसी नहीं कर पाई थी। अब उनके लिए फिर से कैंपस लौटना आसान होगा। साथ ही, शैक्षणिक सहयोग और रिसर्च एक्सचेंज प्रोग्राम्स को भी नई दिशा मिलेगी।
3. पर्यटन और सांस्कृतिक संपर्क को बढ़ावा
ग्वांगझू चीन का प्रमुख औद्योगिक और सांस्कृतिक शहर है, वहीं भारत के कोलकाता से भी कई ऐतिहासिक संबंध जुड़े हैं। सीधी उड़ानें पर्यटन, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और पीपल-टू-पीपल कनेक्ट को मजबूत करेंगी। आने वाले महीनों में बीजिंग और शंघाई के लिए भी नई उड़ानें शुरू होने की संभावना है।
4. समय और लागत की बचत
पहले यात्रियों को भारत से चीन जाने के लिए तीसरे देश में ट्रांजिट फ्लाइट लेनी पड़ती थी, जिससे यात्रा समय 10–12 घंटे तक बढ़ जाता था। नई सीधी उड़ान के साथ यह समय अब सिर्फ 4.5 घंटे रह जाएगा, जिससे यात्रा आसान, तेज़ और सस्ती हो जाएगी।
5. कूटनीतिक संबंधों में सुधार की दिशा
सीधी उड़ानों की बहाली को केवल आर्थिक कदम नहीं, बल्कि एक कूटनीतिक संकेत भी माना जा रहा है। यह दर्शाता है कि भारत और चीन तनावपूर्ण सीमाई मुद्दों के बावजूद व्यावहारिक सहयोग (pragmatic engagement) का रास्ता चुन रहे हैं।
भविष्य की संभावनाएं
विदेश मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, अगर यह रूट सफल रहा तो आने वाले महीनों में दिल्ली-बीजिंग, मुंबई-शंघाई और चेन्नई-चेंगडू के बीच भी सीधी उड़ानें शुरू की जा सकती हैं। इससे भारत और चीन के बीच यात्रियों की संख्या में 40–50% की बढ़ोतरी हो सकती है।
एविएशन इंडस्ट्री के विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता केवल हवाई संपर्क नहीं, बल्कि विश्वास बहाली (confidence-building) की दिशा में भी एक कदम है। दोनों देशों के बीच संवाद का कोई भी जरिया, चाहे वह व्यापार हो या यात्रा, क्षेत्रीय स्थिरता में योगदान दे सकता है।
भारत और चीन के बीच सीधी उड़ानों की बहाली केवल एक एयरलाइन घोषणा नहीं, बल्कि दो बड़ी एशियाई अर्थव्यवस्थाओं के बीच संपर्क और विश्वास का पुनर्निर्माण है। यह कदम उन लाखों यात्रियों के लिए राहत लेकर आया है जो सालों से इंतज़ार कर रहे थे कि दोनों देशों के बीच फिर से “सीधी राह” खुले।
जैसे-जैसे यह सेवा आगे बढ़ेगी, उम्मीद की जा रही है कि यह न केवल यात्रियों की सुविधा बढ़ाएगी, बल्कि भारत-चीन संबंधों में एक सकारात्मक मोड़ भी लाएगी — जहां प्रतिस्पर्धा की जगह सहयोग की भावना को बढ़ावा मिलेगा।
