रिपोर्ट, काजल जाटव: मंदसौर जिले के गरोठ विधानसभा क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी के विधायक श्री चंद्रसिंह सिसौदिया म.प्र. की राजनीति में एक जमीनी और प्रभावशाली नेता के रूप में पहचाने जाते हैं। वे उन जनप्रतिनिधियों में शामिल हैं जिनकी राजनीतिक यात्रा ग्राम पंचायत से शुरू होकर विधानसभा तक पहुँची है। समाज सेवा, संगठनात्मक कौशल और जनता के बीच मजबूत पकड़ ने उन्हें दो बार विधायक बनने का अवसर दिया।

प्रारंभिक जीवन और शिक्षा

4 जुलाई 1963 को कोटका खुदी, तहसील गरोठ, जिला मंदसौर (म.प्र.) में जन्मे श्री सिसौदिया का बचपन ग्रामीण परिवेश में बीता। उनके पिता श्री नाथूसिंह सिसौदिया एक सम्मानित किसान थे। शिक्षा के क्षेत्र में उन्होंने बी.कॉम की डिग्री प्राप्त की और उसके बाद कृषि एवं मेडिकल व्यवसाय में कदम रखा। व्यापारिक कार्यों के साथ-साथ उनका झुकाव समाज सेवा और स्थानीय मुद्दों की ओर भी रहा, जिसने आगे चलकर उन्हें राजनीति की राह पर अग्रसर किया।

परिवार और व्यक्तिगत जीवन

श्री सिसौदिया का पारिवारिक जीवन सादगी और पारंपरिक मूल्यों पर आधारित है। उनकी पत्नी श्रीमती लाभकुँवर गृहिणी हैं, और उनके तीन पुत्र हैं। परिवार में सामाजिक सेवा की भावना और क्षेत्र के विकास के प्रति समर्पण का संस्कार गहराई से जुड़ा हुआ है।

राजनीतिक यात्रा की शुरुआत

राजनीति में श्री सिसौदिया का प्रवेश ग्राम पंचायत स्तर से हुआ, जहाँ वे सरपंच के पद पर रहे। इसके बाद वे जनपद पंचायत गरोठ के निर्विरोध अध्यक्ष चुने गए — जो उनके लोकप्रिय और निर्विवाद नेतृत्व का प्रमाण है। इस दौरान उन्होंने ग्रामीण विकास, सड़क निर्माण, पेयजल व्यवस्था और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य किए।

उनकी सक्रियता केवल पंचायत स्तर तक सीमित नहीं रही। उन्होंने सहकारी साख संस्था और मार्केटिंग सोसायटी त्यामगढ़ में सदस्य के रूप में किसानों के हितों के लिए कार्य किया। किसानों के ऋण, फसल बीमा और मंडी व्यवस्था सुधार की दिशा में उनके प्रयासों को क्षेत्र में काफी सराहा गया।

भाजपा संगठन में भूमिका

चंद्रसिंह सिसौदिया लंबे समय से भारतीय जनता पार्टी से जुड़े रहे हैं। उन्होंने भाजपा के विभिन्न दायित्वों को बखूबी निभाया —

  • भारतीय जनता युवा मोर्चा में मंडल अध्यक्ष और जिला मंत्री,
  • दो बार मंडल महामंत्री,
  • जिला अध्यक्ष और जिला उपाध्यक्ष,
  • साथ ही प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य के रूप में भी कार्य किया।

उनकी संगठनात्मक निष्ठा और कार्यकर्ताओं से जुड़ाव ने उन्हें भाजपा में मजबूत पहचान दिलाई। वे भाजपा की विचारधारा — “सेवा ही संगठन” — को व्यवहार में उतारने वाले नेता माने जाते हैं।

विधानसभा में राजनीतिक सफर

2015 के उपचुनाव में उन्होंने गरोठ विधानसभा सीट से पहली बार जीत दर्ज की और 14वीं विधानसभा के सदस्य बने। 20 जुलाई 2015 को उन्होंने विधायक पद की शपथ ली। यह जीत न केवल उनके लिए बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए गौरव का क्षण थी, क्योंकि उन्होंने गरोठ में भाजपा का जनाधार मज़बूत किया।

2023 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने पुनः जीत हासिल की, जिससे यह साबित हुआ कि जनता का विश्वास आज भी उनके साथ अडिग है। उनकी जीत का बड़ा कारण जनता से उनका सीधा संपर्क, क्षेत्रीय मुद्दों पर सजगता, और किसान हितैषी नीतियों के समर्थन में उनका स्पष्ट रुख रहा।

विकास कार्य और जनता से जुड़ाव

अपने कार्यकाल में श्री सिसौदिया ने गरोठ क्षेत्र में कई विकास कार्य करवाए, जिनमें प्रमुख हैं:

  • ग्रामीण सड़कों का निर्माण एवं मरम्मत,
  • स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार — सरकारी अस्पतालों में आवश्यक उपकरणों की व्यवस्था,
  • शिक्षा संस्थानों में भवन निर्माण एवं छात्रवृत्ति योजनाओं का विस्तार,
  • सिंचाई योजनाओं के माध्यम से किसानों को पानी की उपलब्धता,
  • युवाओं के लिए खेल मैदानों और प्रशिक्षण केंद्रों की स्थापना।

वे स्वयं राजीव मेडिकल स्टोर्स से जुड़े हैं और स्वास्थ्य क्षेत्र की जरूरतों को प्रत्यक्ष रूप से समझते हैं। यही कारण है कि वे क्षेत्र में प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ करने पर विशेष ध्यान देते हैं।

समाजसेवा और सामाजिक संगठन

राजनीति से परे श्री सिसौदिया समाजिक कार्यों में भी सक्रिय रहे हैं। वे अखिल भारतीय सिसौदिया राजपूत समाज के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रहे हैं और समाज में शिक्षा, युवा मार्गदर्शन एवं पारिवारिक एकता को बढ़ावा देने के लिए लगातार कार्यरत हैं। इसके अलावा वे जय भारत मंच (RSS संबद्ध संगठन) के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में भी जुड़े रहे हैं, जहाँ उन्होंने राष्ट्र निर्माण की दिशा में युवा शक्ति को संगठित करने का कार्य किया।

विवाद और आलोचनाएँ

जहाँ राजनीतिक जीवन उपलब्धियों से भरा है, वहीं कुछ विवाद भी समय-समय पर उनके सामने आए। स्थानीय स्तर पर विपक्षी दलों ने कभी-कभी उन पर संगठन में पक्षपात के आरोप लगाए, तो कुछ विकास कार्यों की गति को लेकर सवाल उठे। हालांकि, इन विवादों ने उनकी छवि को बड़ा नुकसान नहीं पहुँचाया। उन्होंने हर आलोचना का जवाब कार्य से देने की नीति अपनाई।

श्री चंद्रसिंह सिसौदिया का राजनीतिक जीवन एक प्रेरणादायक उदाहरण है कि कैसे ग्राम पंचायत से लेकर विधानसभा तक की यात्रा कर्मठता, ईमानदारी और जनसेवा के बल पर पूरी की जा सकती है। वे गरोठ विधानसभा के उन नेताओं में हैं जो “राजनीति को सेवा का माध्यम” मानते हैं।

उनका सफर बताता है कि जब राजनीति का उद्देश्य केवल सत्ता नहीं, बल्कि समाज की बेहतरी हो, तो जनता हमेशा साथ खड़ी रहती है।

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