रिपोर्ट, काजल जाटव: मध्यप्रदेश की राजनीति में श्री जगदीश देवड़ा का नाम जाता है। वे एक अनुभवी नेता हैं। वह बीजेपी के वरिष्ठ नेता हैं। उन्होंने मंदसौर और नीमच में बहुत काम किया है। साथ ही, उन्होंने राज्य के वित्त, योजना और आर्थिक मामलों का भी ध्यान रखा है। उनका जीवन सोशल वर्क, पढ़ाई, राजनीति और जनता के लिए समर्पित है।
शुरूआती जीवन और पढ़ाई
1 जुलाई 1957 को रामपुरा, जिला नीमच में जन्मे जगदीश देवड़ा का बचपन पढ़ाई में अच्छा था। उनके पिता गंगालाल देवड़ा एक अच्छा आदमी थे। उन्होंने एम.ए. और एल.एल.बी. की डिग्री ली। वह खेलकूद में भी अच्छा थे।
स्टूडेंट के समय ही उन्हें राजनीति में interest हुआ। 1979 में, वह शासकीय महाविद्यालय रामपुरा के छात्र संघ अध्यक्ष रहे। बाद में, वह विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन की सीनेट के सदस्य बने। इससे उन्हें नेतृत्व का अनुभव मिला।
राजनीति शुरूआत
जगदीश देवड़ा ने राजनीति की शुरुआत की। उन्होंने भारतीय जनता युवा मोर्चा (भा. ज. यु. मो.) से शुरू किया।
- वह मनासा मंडल अध्यक्ष और मंदसौर जिला महामंत्री रहे।
- उन्होंने अनुसूचित जाति मोर्चा का जिला संयोजक और प्रदेश अध्यक्ष का काम किया।
- उसके बाद, वह राष्ट्रीय कार्यसमिति सदस्य भी बने।
चुनाव और जनता का समर्थन
श्री देवड़ा सात बार विधायक बने हैं। यह बहुत अच्छा है।
- 1990: पहली बार मल्हारगढ़, मंदसौर से विधायक चुने गए।
- 1993: फिर से जीत गए।
- 2003: तीसरी बार विधायक बने। उनके पास राज्य मंत्री का काम था। उन्हें गृह, स्कूल, ऊर्जा विभाग संभालने को कहा गया।
- 2008: चौथी बार जीते। इस बार, वह ट्रांसपोर्ट, जेल, योजना और गृह विभाग देखें।
- 2013: पांचवी बार जीत गए।
- 2018: छठी बार जनता ने भरोसा दिखाया।
- 2023: सातवीं बार विधायक चुने गए।
उनकी जीत से पता चलता है कि वह साफ-सुथरे हैं और जनता उनके साथ है।
मंत्री और उपमुख्यमंत्री
श्री देवड़ा ने कई विभागों को संभाला।
- 2003–2008: गृह, स्कूल और ऊर्जा विभाग में काम किया। पढ़ाई बेहतर बनाने और बिजली देने पर ध्यान दिया गया।
- 2008–2013: परिवहन और निवेश का काम किया। पैसे का सही इस्तेमाल हो, इसी पर ध्यान दिया।
- 2020: उन्होंने अस्थायी विधानसभा अध्यक्ष का काम किया।
- 2 जुलाई 2020: मंत्री बने। उन्हें वित्त, व्यापार, योजना, और आर्थिक विभाग दिए गए।
- 13 दिसंबर 2023: वह उपमुख्यमंत्री बने।
वित्त और विकास
वह वित्त मंत्री के रूप में बहुत काम किया।
- उन्होंने सरकार का पैसा ठीक से खर्च किया।
- राजस्व को सुधारा।
- सड़क, पुल और स्कूल में पैसे लगाए।
- युवाओं और खेती को मदद दी।
उनकी नीतियों का मकसद है कि विकास हो। सरकार की योजनाएं सीधी जनता के जीवन को बेहतर बनाती हैं।
समाजसेवा और जनता से जुड़ाव
जगदीश देवड़ा हमेशा अपने क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं। उन्होंने मंदसौर और नीमच जिले में शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में कई पहल कीं —
- गरीब बच्चों के लिए छात्रवृत्ति योजनाएं,
- गाँवों में पेयजल और सड़क सुविधाओं का विस्तार,
- सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर युवाओं के लिए रोजगार प्रशिक्षण शिविरों का आयोजन।
विवाद और चुनौतियाँ
लंबे राजनीतिक करियर में श्री देवड़ा विवादों से लगभग दूर रहे हैं। हालांकि, कुछ अवसरों पर विपक्ष ने उन पर यह आरोप लगाया कि वे विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में पार्टी निष्ठा को प्राथमिकता देते हैं।
2020 में राज्य सरकार के गठन के दौरान, जब ज्योतिरादित्य सिंधिया गुट भाजपा में शामिल हुआ, तब मंत्रिमंडल में स्थान वितरण को लेकर असंतोष की खबरें आई थीं, लेकिन देवड़ा ने संयम बरतते हुए संगठन के निर्णयों को स्वीकार किया।
उनका नाम राजनीतिक शुचिता और संतुलन के प्रतीक के रूप में देखा जाता है।
जनमत और लोकप्रियता
मंदसौर और नीमच में देवड़ा का जनाधार मजबूत है। उन्हें एक ऐसे नेता के रूप में जाना जाता है जो आम लोगों से सीधा संवाद करते हैं। वे ग्राम स्तर तक सक्रिय रहते हैं और जनता की समस्याओं को सुनने के लिए समय निकालते हैं।
उनकी लोकप्रियता का अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि उन्होंने सातों बार विधानसभा चुनाव बड़े अंतर से जीते हैं — और हर बार उनकी छवि “सादगी और सेवाभाव वाले नेता” की रही है।
श्री जगदीश देवड़ा का राजनीतिक सफर इस बात का प्रमाण है कि समर्पण, ईमानदारी और निरंतर जनसंपर्क के बल पर कोई भी नेता लंबे समय तक जनता के दिलों में स्थान बना सकता है।
वे न केवल मंदसौर-नीमच क्षेत्र के विकास के सूत्रधार हैं, बल्कि मध्यप्रदेश सरकार में वित्तीय नीति के संरक्षक के रूप में भी स्थापित हैं।
उनका अब तक का सफर यह दर्शाता है कि वे सिर्फ एक राजनेता नहीं, बल्कि एक ऐसे जनसेवक हैं जिनका उद्देश्य है —
“जनता का विश्वास, राज्य का विकास।”
