रिपोर्ट, काजल जाटव: रतलाम जिले में जावरा विधानसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता डॉ. राजेन्द्र पांडेय चार बार से चुनाव जीत चुके हैं. उनका सफर राजनीति और समाजसेवा का है. वे लोगों की मदद और संपर्क में विश्वास करते हैं. उनका जीवन दिखाता है कि जब आप समाज की सेवा मकसद बनाते हैं, तो हर जगह सेवा का मौका मिलता है.
सरल जीवन और पढ़ाई
डॉ. पांडेय का जन्म 11 नवंबर 1960 को जावरा में हुआ। उनके पिता, डॉ. लक्ष्मी नारायण पांडेय, भी समाज में काम करते थे. इसलिए उन्हें बचपन से ही मदद करने का शौक था. उन्होंने पढ़ाई में एम.कॉम., डी.एच.बी., फार्मासिस्ट, आयुर्वेद रत्न और वैद्य विशारद की डिग्रियां ली. डॉक्टर बनने के साथ ही उन्होंने मरीजों का इलाज किया और जरूरतमंदों के लिए मुफ्त चिकित्सा शिविर भी लगाए.
सेवा से राजनीति
राजनीति में आने से पहले, डॉ. पांडेय ने भाजपा के मोर्चे से अपना काम शुरू किया. वे रतलाम जिले के पूर्व अध्यक्ष रहे. वे दूरसंचार समिति के सदस्य और कई सामाजिक कामों से जुड़े रहे, जैसे संस्कृति संगम जावरा, लायंस क्लब, गीता भवन ट्रस्ट, और युवक मंच.
उनको खेलों में भी रुचि थी. वे म.प्र. बास्केटबॉल का उपाध्यक्ष और जिला बॉडी बिल्डिंग अध्यक्ष भी रहे। यह दिखाता है कि वे अपने काम और समाज दोनों के लिए सक्रिय हैं।
राजनीतिक यात्रा
डॉ. पांडेय ने बीजेपी में अपनी जगह बनाई।
- 2003 में वे पहली बार जावरा से विधायक चुने गए।
- 2013, 2018, और 2023 में भी उन्होंने बहुत वोटों से जीत हासिल की।
- यह चार बार जीतना दर्शाता है कि लोग उन्हें पसंद करते हैं।
विधायक रहते हुए, उन्होंने जावरा में सड़क, स्कूल, पानी, खेती और स्वास्थ्य में सुधार किए। खासकर ग्रामीण इलाकों में डॉक्टर और खेती की मदद बढ़ाई।
उनके प्रयास से, जावरा में पानी की समस्या का स्थायी समाधान, नई सड़कें, और खिलाड़ियों के लिए खेल और पढ़ाई संस्थान बनवाए गए।
लोगों से जुड़ाव और काम करने का तरीका
डॉ. पांडेय को उनके समर्थक “जनसेवक विधायक” कहते हैं. वे रोज़ जनता की समस्याएं सुनते हैं, अपने घर से बाहर जाकर।
उनकी सबसे पहली बात है, वे सरल और सीधे हैं. वे मंदिर और त्योहारों में हिस्सा लेते हैं. हर जगह, वे मदद करने और लोगों से मिलकर काम करने में आगे रहते हैं।
वोट बैंक और लोकप्रियता
जावरा में ब्राह्मण, पटेल, ओबीसी और ग्रामीण मतदाता डॉ. पांडेय को जानते हैं।
उनकी डॉक्टर की योग्यता और सेवा की छवि के कारण वे केवल पार्टी के कामों पर भरोसा नहीं करते, बल्कि सीधा जनता से मिलकर समर्थन लेते हैं।
2023 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के प्रत्याशी को लगभग 20,000 से ज्यादा वोट से हराया और चौथी बार जीते।
विवाद और आलोचनाएँ
हालांकि डॉ. पांडेय का जीवन ज्यादा विवादों में नहीं रहा, कुछ मौके पर उन पर आरोप लगे कि जावरा में काम की रफ्तार धीमी है और आधिकारियों पर नियंत्रण कम है.
कुछ विरोधियों ने कहा कि वह बहुत संयमित हैं और आक्रामक विरोध से दूर रहते हैं। लेकिन, उनकी ईमानदारी, मेहनत और आसान छवि ने जनता का भरोसा हासिल किया है।
डॉ. राजेन्द्र पांडेय का राजनीति का रास्ता सिर्फ एक विधायक बनने का नहीं है। वह एक ऐसे शख्स की कहानी है जिसने डॉक्टर, समाजसेवी और नेता तीनों ही काम किए।अभी भी वह क्षेत्र में नए प्रोजेक्ट, रोजगार और पढ़ाई को आगे बढ़ाने में लगे हैं।
डॉ. पांडेय आज भी सादगी, सेवा और समर्पण का प्रतीक हैं, जैसे शुरुआत में थे — और यही उनकी ताकत है।
