रिपोर्ट, काजल जाटव: रतलाम जिले की ग्रामीण राजनीति में एक नाम है जो कई सालों से सुर्खियों में रहता है। उसका नाम है भारतीय जनता पार्टी के विधायक श्री मथुरालाल डामर।
रतलाम-ग्रामीण सीट से उनका नाम ऐसे नेताओं में आता है, जो राजनीति को सिर्फ सत्ता के लिए नहीं, बल्कि समाज की मदद के लिए काम मानते हैं।
प्रारंभिक जीवन और पृष्ठभूमि
3 अगस्त 1955 को ग्राम कुंडाल (पोस्ट सरवड़, जिला रतलाम) में जन्मे मथुरालाल डामर एक सरल किसान परिवार से हैं। उनके पिता श्री नाथाजी किसान थे और खेती ही उनके परिवार की मुख्य कमाई थी।
बचपन में उन्होंने खेती करने वाले लोगों की रोज की बातें और परेशानियों को समझा। सातवीं कक्षा तक पढ़ाई करने के बाद, उन्होंने खेती और समाज सेवा पर ध्यान देना शुरू किया।
सामाजिक जीवन और सरपंच के रूप में पहचान
राजनीति में आने से पहले, मथुरालाल डामर ने अपने गांव और आस-पास के इलाकों में काम कर लोगों का भरोसा जीता। वे ग्राम पंचायत के सरपंच भी रहे। उस समय, उन्होंने गांव में नल-जल, सड़क और बच्चों की पढ़ाई के लिए काम किया।
उनकी मेहनत को देखकर, उन्हें सेवा सहकारी समिति जमुनिया का अध्यक्ष बनाया गया। इस पद पर रहते हुए, उन्होंने किसानों को सही समय पर खाद, बीज और पानी दिलाने में मदद की।
राजनीतिक सफर की शुरुआत
लोगों में उनकी लोकप्रियता के कारण, भाजपा ने उन्हें 2013 में अपना उम्मीदवार बनाया।
साल 2013 में, उन्होंने पहली बार रतलाम-ग्रामीण सीट से चुनाव जीता। यह उनके जीवन का नया पड़ाव था।
पहले कार्यकाल में, उन्होंने गांव की सड़क, बिजली, पानी और पानी की व्यवस्था पर ध्यान दिया।
2023 के चुनाव में, उन्होंने फिर से जीत हासिल की। इस बार, उन्होंने अपने विरोधियों को हरा दिया। इससे पता चलता है कि जनता आज भी उन्हें पसंद करती है।
काम और सफलता
श्री डामर अपने इलाके में खेती से जुड़ी योजनाओं को लेकर जाने जाते हैं। वह किसानों के लिए फसल का बीमा, पानी की व्यवस्था और फसलों के समर्थन मूल्य से जुड़ी बातें विधानसभा में कहते हैं।
इसके अलावा, उन्होंने ग्रामीण रास्तों का बनाना, आंगनवाड़ी घरों में सुधार, प्राथमिक अस्पतालों का विस्तार और स्कूल बच्चों के लिए छात्रवृत्ति योजना पर काम किया है।
उनकी खास रुचि भजन और लोकसंस्कृति में भी है। वह कई बार धार्मिक आयोजनों में भजन गाते हैं। इससे लोगों से उनकी बात होती है।
लोगों से जुड़ाव और वोट
मथुरालाल डामर को एक ईमानदार और आसान आदमी माना जाता है। वह जनता के बीच जाकर उनकी बात सुनते हैं।
ग्रामीण इलाकों में, खास कर किसानों, आदिवासियों और महिलाओं में उनकी अच्छी छवि है। 2023 के चुनाव में इन्हीं वर्गों का समर्थन मिला और उन्होंने फिर से विधायक बने।
बिचलन और आलोचना
राजनीति में बहुत समय से सक्रिय होने के बावजूद, मथुरालाल डामर का नाम अब तक किसी बड़े विवाद में नहीं आया है। कुछ विपक्षी कहते हैं कि वह धीमे काम करते हैं, खास कर इलाके में अधूरे कामों को लेकर।
लेकिन, श्री डामर ने इन बातों का जवाब शांतिपूर्वक दिया। वह कहते हैं कि “लोगों के काम में देर हो सकती है, पर सच में कोशिश करने वाला आखिरकार सफल होता है।”
श्री मथुरालाल डामर एक ऐसे आदमी हैं जो जमीन से आए हैं और अभी भी अपने इलाके में हैं। उनके कामों में दिखावा नहीं, बल्कि ईमानदारी है। उन्होंने दिखाया कि साफ सोच और जनता से सच्चा जुड़ाव हो तो सीमित संसाधनों में भी बड़ा काम हो सकता है।
रतलाम-ग्रामीण के लोग अभी भी उन्हें अपना मानते हैं। वे गांव में आराम से चलते हैं, लोगों से मिलते हैं और उनकी समस्याओं को समझते हैं। श्री मथुरालाल डामर सिर्फ भाजपा का आदमी नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश की राजनीति में एक जमीन से जुड़ा नेता हैं।
