रिपोर्ट, काजल जाटव: मध्य प्रदेश की राजनीति में अब जो नाम बहुत सम्मान और प्रभाव के साथ देखा जाता है, वह है डॉ. मोहन यादव. वह अभी मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं। उज्जैन दक्षिण विधानसभा क्षेत्र से वो बीजेपी के विधायक हैं। उनका राजनीतिक सफर संघर्ष, मेहनत और लगातार काम करने का है। 13 दिसंबर 2023 को उन्होंने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। वे उन नेताओं में हैं जिन्होंने अपने संगठन और राजनीति में मेहनत से अपनी पहचान बनाई।
प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
डॉ. मोहन यादव का जन्म 25 मार्च 1965 को उज्जैन में हुआ। उनके पिता श्री पूनमचंद यादव एक साधारण परिवार से थे। उन्होंने अपने बेटे को पढ़ाई और सेवा का संस्कार दिया।
उन्होंने पढ़ाई उज्जैन के माधव विज्ञान महाविद्यालय से शुरू की। उसके बाद उन्होंने बी.एस.सी., एल.एल.बी., एम.ए. (राजनीति विज्ञान), एम.बी.ए. और पी.एच.डी. की पढ़ाई की। इन सारी पढ़ाइयों ने उन्हें ना सिर्फ अच्छा शिक्षित बनाया, बल्कि उन्हें नीतियां और प्रशासन की भी समझ दी।
स्कूल के समय ही वे छात्र राजनीति से जुड़ गए थे। 1982 में माधव कॉलेज के छात्रसंघ के संयुक्त सचिव चुने गए। फिर 1984 में अध्यक्ष बने। इस दौरान वे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से भी जुड़े। 1989-90 में वे प्रदेश सहमंत्री और 1991-92 में राष्ट्रीय मंत्री रहे। इसी समय उनके राजनीति करियर की शुरुआत हुई।
संगठनात्मक और राजनीतिक यात्रा
छात्र राजनीति से लेकर बीजेपी के अलग-अलग स्तरों पर उनका काम चलता रहा।
- 1997 में वे भाजपा युवा मोर्चा प्रदेश कार्यसमिति में शामिल हुए।
- 1999 में उन्हें उज्जैन संभाग प्रभारी बनाया गया।
- 2000-2003 में वे भाजपा नगर जिला महामंत्री बने।
- 2004 में उन्होंने भाजपा प्रदेश कार्यसमिति में जगह ली।
इसके अलावा, उन्होंने विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन की कार्य परिषद, सिंडिकेट सदस्य, मध्यप्रदेश ओलंपिक संघ के उपाध्यक्ष और अखिल भारतीय कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष का काम किया।
उनका प्रशासनिक अनुभव 2004 से 2010 तक रहा। उस समय वे उज्जैन विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष थे। उस समय उन्होंने उज्जैन के शहरी विकास, सड़क, मकान और बुनियादी चीजों पर काम शुरू किया।
विधायक और मंत्री के रूप में काम
डॉ. यादव ने पहली बार 2013 में उज्जैन दक्षिण से चुनाव जीता. उनकी साफ और जनता से जुड़ाव वाली छवि लोग पसंद करते थे।
- 2018 में वे फिर से विधायक बने।
- जुलाई 2020 में उन्हें मध्य प्रदेश सरकार में उच्च शिक्षा मंत्री बनाया गया।
मंत्री रहते हुए उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में कई बड़े बदलाव किए।
- राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को लागू किया. यह मध्य प्रदेश में पहला राज्य था जिसने इसे जमीन पर उतारा।
- हिंदी में तकनीकी पढ़ाई शुरू की. मेडिकल और इंजीनियरिंग की पढ़ाई हिंदी में हुई, जो खास थी।
- नए कॉलेज बनाए. उनके टाइम में 54 से ज्यादा सरकारी कॉलेज खोले गए और 36 इनक्यूबेशन सेंटर बने।
- ऑनलाइन स्टडी सिस्टम शुरू किया. बच्चों की पढ़ाई को आसान बनाने के लिए नई तकनीक लाई।
मुख्यमंत्री के रूप में काम
13 दिसंबर 2023 को जब डॉ. मोहन यादव ने मुख्यमंत्री की शपथ ली, तो बहुत लोग प्रेरित हुए।
उन्होंने कहा कि उनका focus जनता की सेवा और बेहतर शासन पर है।
उनके नेतृत्व में अब प्रदेश में कई नई योजनाएं आईं। जैसे, वैदिक घड़ी, महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ, और डूंगला में इंटरनेशनल वेधशाला. ये सब सरकारी और सांस्कृतिक प्रोजेक्ट्स हैं, जो उनकी सोच दर्शाते हैं।
सांस्कृतिक और आध्यात्मिक योगदान
डॉ. यादव सिर्फ नेता नहीं हैं, वो संस्कृति और धर्म के बारे में जानते हैं।
- उन्होंने चैत्र शुक्ल प्रतिपदा पर भारतीय नये साल मनाने की परंपरा बनाई।
- विक्रम संवत पर आधारित पंचांग हर साल उन्हीं के नजरिए से छपता है।
- महाकालेश्वर से गोरेश्वर महादेव (दंगवाड़ा) यात्रा, कृष्ण-सुदामा यात्रा और विक्रमोत्सव जैसे आयोजन उज्जैन की पहचान को दुनियाभर में फैलाते हैं।
- वो इतिहास, पर्यटन और भारतीय धर्म की किताबें लिखते हैं, या उन्हें संपादित करते हैं।
चुनावी सफलता और जनता से जुड़ाव
डॉ. यादव ने 2013, 2018 और 2023 के चुनाव में बीजेपी की तरफ से खड़े होकर बहुत अच्छी जीत हासिल की।
2023 में उन्होंने करीब 55% से ज्यादा वोट लिए और अपने सबसे बड़े मुकाबले वाले को हरा दिया। उनकी लोकप्रियता उनके काम और मिलनसार स्वभाव की वजह से है।
विवाद और आलोचनाएँ
हालांकि उनका नाम ज्यादा विवादों में नहीं आया, फिर भी कभी-कभी सवाल खड़े हुए—
- उच्च शिक्षा मंत्रालय में रहते हुए कुछ नियुक्तियों में पारदर्शिता पर सवाल उठे, पर उन पर सीधे आरोप नहीं लगे।
- मुख्यमंत्री बनने के बाद महाकाल लोक प्रोजेक्ट में कुछ भ्रष्टाचार की शिकायतें आईं, अभी जांच चल रही है।
- विपक्ष ने कहा कि वह धार्मिक गतिविधियों में ज्यादा लगे हैं और विकास की जगह आयोजन पर ध्यान देते हैं।
इन सब के बाद भी, लोग उन्हें पसंद करते रहे क्योंकि उन्होंने हर आलोचना का जवाब काम से दिया।
डॉ. मोहन यादव का जीवन दिखाता है कि राजनीति सिर्फ सत्ता नहीं, सेवा का जरिया है।
उन्होंने शिक्षा, संस्कृति और प्रशासन में अच्छा काम किया है। उज्जैन से उभरकर मुख्यमंत्री बनने का सफर उनके प्रयास, मेहनत और जनता का भरोसा है।
आज वे मध्य प्रदेश को “आध्यात्मिक शहर से विकास का मॉडल राज्य” बनाने का काम कर रहे हैं।

