रिया सिन्हा
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने विजयादशमी के शुभ अवसर पर अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूरे कर लिए हैं। इस शताब्दी वर्ष का मुख्य कार्यक्रम नागपुर में संघ मुख्यालय के रेशिमबाग मैदान में आयोजित हुआ, जहाँ सरसंघचालक मोहन भागवत ने स्वयंसेवकों को संबोधित किया। संघ की स्थापना 1925 में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार द्वारा विजयादशमी के दिन नागपुर में की गई थी। इस सौ साल की यात्रा के उपलक्ष्य में, संघ ने देश भर में साल भर चलने वाले आयोजनों की शुरुआत की है।
राष्ट्र निर्माण और सेवा पर ज़ोर
आरएसएस की 100 वर्षों की यह यात्रा त्याग, निःस्वार्थ सेवा, राष्ट्र निर्माण और अनुशासन की मिसाल मानी जाती है। संघ का मूल उद्देश्य नागरिकों में सांस्कृतिक जागरूकता और राष्ट्रीय चरित्र निर्माण को बढ़ावा देना रहा है। नागपुर में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद सहित कई गणमान्य व्यक्ति शामिल हुए।
इस ऐतिहासिक मौके पर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली में आयोजित एक समारोह में संघ के योगदान को दर्शाने वाला एक विशेष स्मारक डाक टिकट और ₹100 का सिक्का भी जारी किया। मोदी ने संघ के स्वयंसेवकों की राष्ट्र सेवा और त्याग की भावना की सराहना करते हुए कहा कि ‘राष्ट्र प्रथम’ ही संघ के हर कार्य का मूल मंत्र रहा है। संघ के शताब्दी वर्ष में पूरे देश के हर ब्लॉक तक पहुँचने और शाखाओं की संख्या को एक लाख से अधिक करने का लक्ष्य रखा गया है।
