कामना कासोटिया भोपाल:
यूपीएससी की 100वीं वर्षगांठ : एक शताब्दी का सफ़र और नई चुनौतियाँ
भारत के प्रशासनिक ढांचे की रीढ़ कही जाने वाली संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने आज अपनी 100वीं वर्षगांठ धूमधाम से मनाई। राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, वरिष्ठ नौकरशाहों और पूर्व सिविल सेवकों की मौजूदगी में आयोजित इस ऐतिहासिक समारोह ने न सिर्फ आयोग के गौरवशाली इतिहास को याद किया बल्कि भविष्य की चुनौतियों और अवसरों पर भी गहन चर्चा हुई।
शताब्दी वर्ष का महत्व
1926 में गठित संघ लोक सेवा आयोग का उद्देश्य देश के लिए सक्षम और निष्पक्ष सिविल सेवकों का चयन करना था। उस समय इसे ब्रिटिश शासन की प्रशासनिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर बनाया गया था। लेकिन स्वतंत्रता के बाद इसका स्वरूप पूरी तरह से भारतीय लोकतंत्र की जरूरतों के अनुसार ढाला गया।
आज, यूपीएससी केवल एक भर्ती एजेंसी नहीं बल्कि योग्यता, निष्पक्षता और पारदर्शिता का प्रतीक बन चुका है। पिछले सौ वर्षों में इसने लाखों युवाओं को सिविल सेवा के माध्यम से देश सेवा का अवसर प्रदान किया है।
कार्यक्रम की मुख्य झलकियाँ
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने समारोह में कहा कि “यूपीएससी केवल एक संस्था नहीं, बल्कि यह भारत के लोकतंत्र का विश्वास है। इसने सुनिश्चित किया है कि प्रशासनिक सेवाओं में प्रवेश केवल प्रतिभा और मेहनत के आधार पर हो, न कि विशेषाधिकारों या प्रभाव के आधार पर।”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में युवाओं से अपील की कि वे सिविल सेवाओं को केवल नौकरी न मानें बल्कि इसे राष्ट्र निर्माण का माध्यम समझें। उन्होंने कहा कि आने वाले दशक में भारत को “विकसित राष्ट्र” बनाने की दिशा में सिविल सेवकों की भूमिका निर्णायक होगी।
शताब्दी विशेष प्रदर्शनी और सम्मान
समारोह में एक विशेष प्रदर्शनी का आयोजन किया गया जिसमें आयोग की स्थापना से लेकर वर्तमान तक की यात्रा को दस्तावेज़ों, दुर्लभ तस्वीरों और तकनीकी विकास के जरिए प्रदर्शित किया गया। इसके अलावा विभिन्न राज्यों और सेवाओं में उत्कृष्ट कार्य करने वाले सेवानिवृत्त अधिकारियों को भी सम्मानित किया गया।
यूपीएससी ने इस अवसर पर एक स्मारक डाक टिकट और स्मारक सिक्का भी जारी किया, जो संस्था के 100 वर्षों की उपलब्धियों का प्रतीक है।
सिविल सेवा की बदलती चुनौतियाँ
समारोह में यह भी चर्चा का विषय रहा कि आने वाले समय में यूपीएससी और सिविल सेवकों के सामने किस प्रकार की चुनौतियाँ होंगी।
- तकनीकी बदलाव : आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा और डिजिटल गवर्नेंस जैसे क्षेत्रों में प्रशासनिक दक्षता की जरूरत होगी।
- जनसंख्या दबाव और शहरीकरण : नीतियों के क्रियान्वयन में और अधिक संवेदनशीलता और तत्परता की आवश्यकता होगी।
- वैश्विक परिप्रेक्ष्य : जलवायु परिवर्तन, अंतरराष्ट्रीय संबंध और आर्थिक प्रतिस्पर्धा जैसी चुनौतियों का सामना करने के लिए प्रशासनिक सेवाओं को नए कौशल सीखने होंगे।
यूपीएससी की 100वीं वर्षगांठ सिर्फ एक संस्था की उपलब्धियों का जश्न नहीं, बल्कि भारत की लोकतांत्रिक यात्रा का उत्सव है। यह हमें याद दिलाती है कि एक सशक्त राष्ट्र वही है जहां प्रशासन निष्पक्ष, जवाबदेह और नागरिकों की सेवा में समर्पित हो।
पिछली एक शताब्दी की तरह आने वाले सौ वर्षों में भी यूपीएससी भारत की प्रशासनिक रीढ़ को मज़बूत करता रहेगा और नई पीढ़ियों को राष्ट्र सेवा की प्रेरणा देता रहेगा।
