रिया सिन्हा

सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव और वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने जलवायु कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी को ‘अवैध’ बताते हुए उनकी तत्काल रिहाई की मांग की है। 30 सितंबर 2025 को दोनों हस्तियों ने एक संयुक्त बयान जारी कर वांगचुक की हिरासत पर गंभीर सवाल उठाए और सरकार की कार्रवाई को लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए खतरा बताया।


सरकार की कार्रवाई पर गंभीर आरोप

प्रशांत भूषण ने आरोप लगाते हुए कहा कि केंद्र सरकार की कार्रवाई दुर्भावनापूर्ण और कानून के खिलाफ है। उन्होंने दावा किया कि गृह मंत्रालय ने पहले सोनम वांगचुक के गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) का विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (एफसीआरए) प्रमाणपत्र रद्द कर दिया। इसके बाद, उनके शिक्षण संस्थान का लाइसेंस भी निरस्त कर दिया गया और संस्थान को आवंटित भूमि भी वापस ले ली गई। भूषण ने इन कदमों को सरकार द्वारा बदले की भावना से की गई कार्रवाई बताया।


लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए खतरा

योगेंद्र यादव ने भी इस मामले में सरकार की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी न सिर्फ अनुचित है, बल्कि यह भारतीय लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए एक खतरे की घंटी है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि एक ऐसे कार्यकर्ता को हिरासत में लेना, जो शांतिपूर्ण तरीके से लद्दाख के लिए संवैधानिक सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण की मांग कर रहा था, सत्ता के दुरुपयोग को दर्शाता है। वांगचुक लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर दिल्ली में प्रदर्शन करने के लिए अपने साथियों के साथ आए थे, जिसके बाद उन्हें हिरासत में लिया गया था। दोनों सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सभी नागरिकों से वांगचुक की रिहाई के लिए आवाज उठाने की अपील की है।

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