भारतीय वायुसेना में शामिल होने वाला पहला फाइटर जेट मिग – 21
26 सितंबर 2025 को अब आधिकारिक तौर पर मिग 21 रिटायर हो चुका है . 26 तारीख को चंडीगढ़ एयरफोर स्टेशन पर मिग -21 के लिए एक भव्य विदाई समारोह आयोजित किया गया, जिसमें रक्षामंत्री राजनात सिंह, और चीफ मार्शल एपी सिंह, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान , सेना और नौसेना के प्रमुख , छै पूर्व वायुसेना प्रमुख, पूर्व सैनिक और उनके परिवार वाले पहुंचे . यह समारोह मिग – 21 की वीरता की कहानी को सलाम करने का एक भावुक पल था.

1965 में मिग – 21 का योगदान
1) 1965 के युद्ध में मिग-21 की संख्या कम थी और पायलटों का प्रशिक्षण अधूरा. लेकिन फिर भी, इसने रक्षात्मक उड़ानों से अनुभव लिया. यह युद्ध मिग-21 के लिए सीखने का मौका था. 
2) 1971 का युद्ध मिग-21 का सुनहरा दौर था. भारतीय हवाई सेना के मिग-21 ने पश्चिमी मोर्चे पर हवाई श्रेष्ठता हासिल की. उन्होंने 4 पाकिस्तानी एफ-104 स्टारफाइटर, 2 शेनयांग एफ-6, 1 एफ- 86 सेबर और 1 सी-130 हर्क्यूलिस गिराए. दो एफ-104 की पुष्टि हुई. 

पाकिस्तान के टुकड़े करने में अहम भूमिका
3)1971 युद्ध में,अमृतसर से उड़कर ढाका के गवर्नर हाउस पर 500 किलो के बम गिराए, और युद्ध में भारत की जीत में बड़ा योगदान दिया.

बालाकोट एयरस्ट्राइक में मिग 21 का योगदान
4) 2019 के बालाकोट एयरस्ट्राइक में मिग 21, जो सेकेंड जनरेशन फाइटर एयरक्राफ्ट है, उसने पाकिस्तान के चौथे पीढ़ी के फाइटर जेट F 16 को मार गिराया. और उस वक्त मिग 21 को भारत के पायलट अभिनंदन वर्दमान चला रहे थे.

5) ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी, नाल एयरबेस पर मिग 21 को अलर्ट मोड पर रखा गया था.

60 साल से ज्यादा सेवा करने के बाद, मिग-21 को 2025 में रिटायर किया जा रहा है. यह भारतीय हवाई सेना का मुख्य विमान रहा. पायलट इसे अपना भरोसेमंद साथी मानते थे.

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