रिपोर्ट, काजल जाटव: भारतीय राजनीति में कैलाश विजयवर्गीय का नाम बहुत ज्यादा जाना जाता है। वह संगठन, सत्ता और रणनीति—तीनों में ही माहिर हैं। वह मध्यप्रदेश से हैं और वहां से शुरू होकर देशभर में अपनी पहचान बना ली है। उन्होंने छात्र राजनीति से शुरुआत की। फिर सात बार विधायक चुने गए। भाजपा के राष्ट्रीय नेताओं के साथ काम किया है। विजयवर्गीय का राजनीतिक रास्ता मेहनत और सफलता से भरा रहा है।

प्रारंभिक जीवन और शिक्षा

कैलाश विजयवर्गीय का जन्म 13 मई, 1956 को इंदौर में हुआ। उनके पिता का नाम शंकरदयाल विजयवर्गीय है। उन्होंने विज्ञान (B.Sc.) और कानून (LLB) की पढ़ाई की। शुरू से ही वह समाज की मदद और सांस्कृतिक कामों में लगे रहते थे। उन्हें संगीत और खेल भी अच्छा लगता था। शादी के बाद उनकी पत्नी का नाम आशा विजयवर्गीय है। उनके दो बेटे हैं।

छात्र राजनीति से शुरुआत

उनका राजनीति का सफर 1975 में शुरू हुआ। उन्होंने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के साथ काम किया। इमरजेंसी के समय में उन्होंने युवाओं को संगठित किया। 1983 में वह इंदौर नगर निगम में पार्षद बने। 1985 में वरिष्ठ समिति के अध्यक्ष भी चुने गए। इस दौरान वह भारतीय जनता युवा मोर्चा से जुड़े। पहली जिम्मेदारी संगठन के मंत्री की थी। फिर वह राष्ट्रीय स्तर पर काम करने लगे।

विधायकी और विधानसभा का काम

उन्होंने पहली बार 1990 में इंदौर-1 सीट से विधायक बनाए गए। इसके बाद 1993, 1998, 2003, 2008, 2013 और 2023 में फिर विधायक चुने गए। वह सात बार विधानसभा का हिस्सा रहे। इस समय उन्होंने कई विभाग देखे। इनमें सड़क, शहर का काम, व्यापार, सूचना और पर्यावरण का काम शामिल है।

उनकी तरीका सिखाता है कि वह तेज और सख्त बनना पसंद करते हैं।

इंदौर नगर निगम और महापौर का दौर

2000 में वह इंदौर नगर निगम के महापौर बन गए। वहां उन्होंने शहरी विकास पर ध्यान दिया। लोग उन्हें “विकास का आदमी” कहने लगे। वह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय महापौर संगठनों से जुड़े। इससे उन्हें दुनिया में भी पहचान मिली।

राष्ट्रीय राजनीति और संगठन का काम

2000 के बाद विजयवर्गीय ने देश में राजनीति करनी शुरू की। वह भाजपा के प्रवक्ता बन गए। फिर उन्हें संगठन में जिम्मेदारी दी गई। गुजरात और दूसरे राज्यों में चुनाव का काम किया। 2015 के बाद वह पश्चिम बंगाल में भी काम करने लगे। वहां चुनाव में उन्हें काफी जिम्मेदारी दी गई। वह संगठन को मजबूत बनाने में मदद कर रहे हैं।

वोटबैंक और जनाधार

कैलाश विजयवर्गीय का आधार इंदौर और उसके आसपास का मालवा-निमाड़ क्षेत्र रहा है। इंदौर-1 विधानसभा क्षेत्र में वह बहुत मजबूत हैं। यहाँ का व्यापारिक आदमी, पारंपरिक हिंदू वोटबैंक और शहरी मध्यमवर्ग ही उनके समर्थन का मुख्य आधार हैं।

उनकी पहचान एक ऐसे नेता की है, जो सीधे जनता से बात करता है। वह जमीन पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं को भी अच्छी तरह संगठित करता है।

विवाद और आलोचनाएँ

जहाँ उनकी उपलब्धियों का जिक्र है, वहीं विवाद भी जुड़े रहे हैं।

  • बल्ला कांड (2019): इंदौर में एक नगर निगम के अधिकारी से झगड़ा हुआ। उनके बेटे आकाश विजयवर्गीय ने क्रिकेट बैट से हमला किया। यह खबर टीवी पर दिखी। इस घटना की वजह से पार्टी को भी परेशानी हुई।
  • विवादित बयान: उनके बोल और टिप्पणियाँ कई बार विवाद का कारण बनी हैं। उन्होंने विपक्षी नेताओं पर तीखा प्रहार किया। उन पर आलोचना भी हुई।
  • भ्रष्टाचार के आरोप: उनके करियर में भ्रष्टाचार के आरोप लगे। उन्होंने शहरी विकास और जमीन से जुड़ी योजनाओं में गलत काम किया। अदालत में किसी के खिलाफ सबूत नहीं मिले।

उपलब्धियाँ और योगदान

  • इंदौर को स्मार्ट सिटी बनाने में उन्होंने मदद की। शहर का नियम-कानून ठीक किया।
  • युवा मोर्चा के साथ उन्होंने टीम मजबूत की। युवा लोगों को राजनीति में लाने की कोशिश की।
  • उद्योग और व्यापार विभाग में रहते हुए उन्होंने निवेश बढ़ाने का काम किया। मप्र को निवेश के लिए अच्छा जगह बनाने में मदद की।

कैलाश विजयवर्गीय का जीवन दिखाता है कि छात्र राजनीति से निकला व्यक्ति कैसे अपना नाम बनाता है। सात बार विधायक बनना, महापौर और राष्ट्रीय प्रवक्ता सभी उनके काम का नतीजा है।

जानकारी में मतभिन्नता और आलोचना के बावजूद, उनका जुड़ाव मजबूत है। उनका अनुभव और कौशल उन्हें आज भी अहम नेता बनाता है। वे भाजपा के मुख्य रणनीतिकार और संगठन की अहम चीज हैं।

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