रिपोर्ट, काजल जाटव: मध्यप्रदेश में कई नेता हैं जिनका जीवन संघर्ष का रहा है। श्री भंवरसिंह शेखावत भी उनमें से एक हैं। वह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से वरिष्ठ नेता हैं और बदनावर से विधायक चुने गए हैं। वह राजनीति में बहुत समय से हैं। वह सिर्फ जनता का प्रतिनिधि नहीं हैं, बल्कि जवानों, छात्रों और समाज सेवा में भी शामिल रहे हैं। उन्होंने सहकारिता के काम भी किए हैं।

प्रारंभिक जीवन और शिक्षा

भंवरसिंह शेखावत का जन्म 19 अगस्त 1949 को राजस्थान के सीकर जिले के सिलोकपुरा गाँव में हुआ। उनके पिता का नाम श्री धूलसिंह शेखावत है। वह एक किसान परिवार से हैं। उन्होंने कठिनाइयों के बीच पढ़ाई की। उन्होंने एम.ए. (अर्थशास्त्र और राजनीति विज्ञान) और एलएलबी की डिग्री ली। पढ़ते वक्त ही उन्हें समाज और राजनीति में रुचि हुई।

सैनिक जीवन और पहली तैयारी

श्री शेखावत का जीवन सिर्फ राजनीति तक नहीं है।

  • 1964 से 1970 तक वह भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट के तौर पर थे। इस दौरान देशकी सेवा और अनुशासन ने उन्हें मजबूत किया।
  • 1970 के बाद वह छात्र राजनीति में आए।
  • 1975-77 के आपातकाल में वह जेल गए। यह समय उनके जीवन का अहम पल था।

राजनीतिक यात्रा

भंवरसिंह शेखावत की राजनीति का सफर बहुत लंबा और आसान नहीं रहा।

  • 1983-87 में वह इंदौर नगर पालिका के पार्षद और उपमहापौर बने।
  • इसी समय वह मध्यप्रदेश जनता युवा मोर्चा के उपाध्यक्ष और महामंत्री थे।
  • 1990-93 में वह भाजपा इंदौर के अध्यक्ष थे। वह कई आंदोलनों में भाग गए। इस दौरान वह 20 बार जेल गए
  • उन्होंने सहकारी क्षेत्र में भी काम किया। वह मध्यप्रदेश सहकारी आवास संघ के डायरेक्टर, मध्यप्रदेश सहकारी बैंक के अध्यक्ष और NAFED के सदस्य रहे।
  • 1993 में पहली बार विधायक चुने गए।
  • लंबे समय बाद, 2013 में फिर विधायक बने।
  • 2023 में फिर जनता ने भरोसा दिखाया और उन्हें विधानसभा भेजा।

कार्य और योगदान

भंवरसिंह शेखावत ने अपने राजनीतिक जीवन में विकास और सहकारिता पर जोर दिया।

  • सहकारिता और कृषि – वे किसानों को मजबूत बनाने के लिए सहकारी समितियों और बैंकों का इस्तेमाल करते थे।
  • ग्रामीण विकास – उन्होंने ग्रामीण इलाकों में सड़क, बिजली और सिंचाई योजनाओं पर काम किया।
  • शिक्षा और स्वास्थ्य – उन्होंने गांवों में स्कूल और अस्पताल बनाए।
  • युवा और खेल – वे युवाओं को खेल और सहकारिता के जरिए संगठित करने में मदद करते थे।

विधानसभा में भूमिका और वोट

विधानसभा में शेखावत एक सक्रिय और बोलने वाले नेता के रूप में जाने जाते हैं।

  • वे कांग्रेस की बात मानते हुए सरकार की आलोचना करते थे और जनता के मुद्दे उठाते थे।
  • उनने कृषि, कर्ज, आदिवासी अधिकार, नौकरी और पढ़ाई जैसे मुद्दों पर बात की।
  • वोटिंग में वे कांग्रेस का समर्थन करते थे, पर कभी-कभी अपने क्षेत्र के हितों के बारे में अलग बात भी कहते थे।

विवाद और आलोचनाएँ

राजनीति में विवाद आम बात है, और शेखावत इससे अलग नहीं रहे।

  • उन पर आरोप लगा कि सहकारी संस्थानों में उन्होंने कुछ फैसलों में पक्षपात किया।
  • बदनावर में विकास धीमा होने पर विपक्ष ने उन्हें आलोचना की।
  • उन पर यह भी आरोप लगे कि उन्होंने अधिक समय भाजपा में बिताया, फिर कांग्रेस में आकर उनके विचार बदल गए।

इन सब बातों के बावजूद, लोग उन्हें अनुभव वाले, मेहनती और जनता से जुड़े नेता मानते हैं। इसलिए वे बार-बार जीतते आए हैं। भंवरसिंह शेखावत का जीवन राजनीति, समाज और संघर्ष का मिश्रण है। वे एक सैनिक से शुरू होकर तीन बार विधायक बने। उनका सहकारिता में काम, किसानों के लिए किए गए कदम और जनता से बात करना अलग है।

आज बदनावर की जनता उन्हें तीसरी बार चुन रही है। उन्हें अब शिक्षा, स्वास्थ्य और नौकरी को ही पूरा ध्यान देना है। अगर वे इन मुद्दों का सही हल कर लेते हैं, तो वे प्रदेश की राजनीति में मजबूत और पंसद किए जाने वाले नेता बन जाएंगे।

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