रिपोर्ट, काजल जाटव: मध्य प्रदेश की राजनीति में आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र धरमपुरी का विशेष महत्व है। यहां से निर्वाचित विधायक श्री कालु सिंह ठाकुर भारतीय जनता पार्टी के ऐसे नेता हैं, जिन्होंने लगातार जनसेवा और संगठनात्मक कार्यों के बल पर अपनी पहचान बनाई है। उनका राजनीतिक सफर संघर्ष से शुरू होकर आज विधायक के रूप में जनसेवा तक पहुंचा है।

प्रारंभिक जीवन और शिक्षा

श्री कालु सिंह ठाकुर का जन्म 2 नवम्बर 1969 को धार जिले के चीफ खोदरा गांव में हुआ। वे एक साधारण किसान परिवार से आते हैं। उनके पिता का नाम श्री भारत सिंह ठाकुर है। ग्रामीण परिवेश में पले-बढ़े कालु सिंह ने आठवीं कक्षा तक शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद वे सीधे कृषि कार्यों में सक्रिय हो गए। कृषि कार्य करते हुए उन्होंने समाज की समस्याओं और किसानों की वास्तविक स्थिति को करीब से देखा।

पारिवारिक जीवन

श्री कालु सिंह का वैवाहिक जीवन संतुलित और पारिवारिक मूल्यों से जुड़ा हुआ है। उनकी पत्नी का नाम श्रीमती सुमन बाई एवं श्रीमती राधा बाई है। परिवार में उनके तीन पुत्र हैं। यह पारिवारिक पृष्ठभूमि उन्हें धरातल से जोड़कर रखती है, साथ ही जनमानस से सीधा संवाद बनाए रखने में सहायक है।

राजनीतिक यात्रा

कालु सिंह ठाकुर ने राजनीति में कदम सामाजिक कार्यों के माध्यम से रखा। धीरे-धीरे वे भाजपा संगठन से जुड़े और आदिवासी अंचल में पार्टी को मजबूत बनाने का कार्य किया।

  • 2013 में उन्होंने पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ा और जीत दर्ज करते हुए धरमपुरी से विधायक बने।
  • एक दशक बाद, 2023 में पुनः जनता का विश्वास प्राप्त कर दूसरी बार विधायक चुने गए।

उनका चुनावी सफर इस बात का प्रमाण है कि धरमपुरी की जनता ने उनके कार्यों और ईमानदार छवि पर भरोसा किया है।

कार्य और योगदान

धरमपुरी क्षेत्र आदिवासी, किसान और मजदूर वर्ग की समस्याओं से जूझता रहा है। कालु सिंह ठाकुर ने इन्हीं मुद्दों पर अपनी प्राथमिकताएं तय कीं।

  1. कृषि एवं सिंचाई – किसानों के लिए सिंचाई योजनाओं को लेकर उन्होंने लगातार विधानसभा में आवाज उठाई। नहरों और तालाबों के जीर्णोद्धार का कार्य कराया गया।
  2. सड़क और बिजली – गांव-गांव तक सड़कें और बिजली पहुंचाने में उनका योगदान उल्लेखनीय रहा। कई ग्रामीण इलाकों में विद्युत आपूर्ति बेहतर हुई है।
  3. शिक्षा एवं स्वास्थ्य – आदिवासी बच्चों के लिए छात्रवृत्ति योजनाओं का लाभ दिलाने और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को सुदृढ़ करने में वे सक्रिय रहे।
  4. जनसंपर्क – वे नियमित रूप से क्षेत्र के गांवों का दौरा करते हैं और जनता की समस्याओं को सीधे सुनते हैं

विधानसभा में भूमिका और वोट

कालु सिंह ठाकुर अक्सर किसानों और आदिवासियों की बात करते हैं। वह भूमि, शिक्षा, स्वास्थ्य और आदिवासी योजनाओं के बारे में बोलते रहे हैं।

  • उन्होंने भाजपा की योजनाओं का समर्थन किया, जैसे प्रधानमंत्री आवास, उज्ज्वला, और कृषि कानून।
  • विपक्ष के कई प्रस्तावों का विरोध भी किया।

उनका वोटिंग पैटर्न दिखाता है कि वह पार्टी के भरोसे हैं, लेकिन क्षेत्र के मुद्दों पर वह बोलते हैं।

विवाद और चुनौतियां

कालु सिंह ठाकुर आम तौर पर ईमानदार और सरल समझे जाते हैं। लेकिन राजनीति में विवाद आते हैं।

  • कुछ बातों पर आरोप लगे कि क्षेत्र में विकास धीमा है।
  • बिना रोजगार के अभी भी आदिवासी युवा संघर्ष कर रहे हैं।
  • चुनाव में विरोधियों ने कहा कि वह पार्टी के पीछे चलते हैं और क्षेत्र की बात नहीं कर पाते।

इन बातों के बावजूद, लोग उन्हें पसंद करते हैं। 2023 के चुनाव में वह जीत गए। कालु सिंह ठाकुर का जीवन बताता है कि सामान्य घर का आदमी भी साफ दिल से राजनीति कर सकता है। धरमपुरी की जनता ने दो बार उन्हें चुना है।

उनके काम और लगन ने उन्हें जनता से जोड़े रखा है। आने वाले सालों में, उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार पर काम करना होगा। अगर वह इन पर कदम उठाते हैं, तो वे और भी सम्मान पाएंगे।

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