रिपोर्ट, काजल जाटव: मध्यप्रदेश की राजनीति में अनुसूचित जनजाति वर्ग से आने वाली नेताओं में कुमारी निर्मला भूरिया का नाम विशेष स्थान रखता है। भारतीय जनता पार्टी से पाँच बार विधायक निर्वाचित होकर उन्होंने यह सिद्ध कर दिया कि समर्पण, ईमानदारी और जनसेवा ही जनाधार बनाने के सबसे सशक्त साधन हैं।
प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
निर्मला भूरिया का जन्म 4 जुलाई 1967 को झाबुआ जिले के ग्राम माछिलया में हुआ। उनके पिता श्री दिलीपसिंह भूरिया एक प्रतिष्ठित सामाजिक कार्यकर्ता थे, जिनका प्रभाव निर्मला भूरिया के व्यक्तित्व और राजनीति में आने की प्रेरणा बना। वे अविवाहित रहीं और पूरा जीवन समाज सेवा और राजनीति को समर्पित किया। स्नातक की शिक्षा प्राप्त करने के बाद उन्होंने समाज सेवा को ही अपना ध्येय बनाया।
राजनीतिक जीवन की शुरुआत
निर्मला भूरिया का सार्वजनिक जीवन बहुत ही कम उम्र से शुरू हो गया था। वर्ष 1990 में उन्हें मध्यप्रदेश युवक कांग्रेस का संयुक्त सचिव नियुक्त किया गया। इसके तीन साल बाद, 1993 में वे पहली बार पेटलावद विधानसभा से निर्वाचित हुईं। यही उनके राजनीतिक करियर का पहला बड़ा मोड़ था।
1994 में वे मध्यप्रदेश कांग्रेस (इंडिकेटिव) की संयुक्त सचिव बनीं। हालांकि राजनीति में उनका रुझान धीरे-धीरे भारतीय जनता पार्टी की ओर बढ़ा और 1998 में वे भाजपा युवा मोर्चा की प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य बनीं। इसी वर्ष वे पुनः विधायक निर्वाचित हुईं और महिला एवं बाल कल्याण समिति की सदस्यता संभाली।
भाजपा में सक्रिय भूमिका
1999 में उन्हें भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा का प्रदेश उपाध्यक्ष चुना गया और साथ ही राष्ट्रीय कार्यकारिणी की सदस्य भी बनीं। इस दौरान उनका कद पार्टी में लगातार बढ़ता गया। वे कई अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों में भारत का प्रतिनिधित्व भी कर चुकी हैं—जैसे चीन में महिला सम्मेलन, मलेशिया और हांगकांग में युवा महोत्सव तथा लंदन, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया, नीदरलैंड, इटली और दुबई जैसे देशों की यात्राएँ।
मंत्री पद और कार्यकाल
2003 में तीसरी बार विधायक बनने के बाद उन्हें भाजपा विधायक दल की मंत्री बनाया गया। वर्ष 2008 में वे राज्य मंत्री के रूप में लोक स्वास्थ्य परिवार कल्याण और चिकित्सा शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी संभालती रहीं। इस दौरान ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए कई योजनाओं की शुरुआत की गई।
2013 में चौथी बार और 2023 में पाँचवीं बार पेटलावद से विधायक चुनी गईं। यह उनकी लोकप्रियता और जनता के बीच विश्वास का प्रमाण है।
समाज सेवा और विशेष रुचियाँ
निर्मला भूरिया ने सदैव अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़े वर्गों के उत्थान को प्राथमिकता दी। उनकी सक्रियता विशेषकर शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय रही। वे झाबुआ जिले में महिला शिक्षा और समाज सेवा के कार्यों के लिए जानी जाती हैं।
वोट और जनाधार
पेटलावद विधानसभा क्षेत्र में निर्मला भूरिया ने कई बार अपने प्रतिद्वंद्वियों को बड़े अंतर से पराजित किया। कांग्रेस और भाजपा दोनों ही दलों में उनकी जड़ें मजबूत रही हैं, लेकिन भाजपा से जुड़ने के बाद उनके वोट बैंक ने स्थिरता प्राप्त की। झाबुआ और आसपास के आदिवासी क्षेत्रों में उनका जनाधार आज भी बेहद मजबूत है।
विवाद और आलोचनाएँ
निर्मला भूरिया का राजनीतिक जीवन अपेक्षाकृत विवादों से मुक्त रहा है। हालांकि, उनके कार्यकाल के दौरान कुछ मुद्दे चर्चा में रहे।
- कांग्रेस से भाजपा की ओर रुझान – उनके शुरुआती दौर में कांग्रेस से सक्रियता और बाद में भाजपा में आना कुछ नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच आलोचना का विषय रहा।
- विकास कार्यों पर सवाल – विपक्षी दलों ने कई बार आरोप लगाया कि झाबुआ और पेटलावद क्षेत्र में अपेक्षित विकास नहीं हुआ। विशेषकर सड़कों और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी को लेकर सवाल उठाए जाते रहे।
- स्थानीय गुटबाज़ी – भाजपा के भीतर ही कई बार स्थानीय स्तर पर गुटबाज़ी की ख़बरें सामने आईं, जिसमें उनका नाम भी जुड़ा।
कुमारी निर्मला भूरिया का राजनीतिक सफर निरंतरता और जनसेवा का उदाहरण है। पाँच बार विधायक बनने वाली वे आदिवासी समाज की उन नेताओं में से एक हैं, जिन्होंने न केवल राजनीति में स्थान बनाया, बल्कि समाज सेवा को भी जीवन का अभिन्न अंग बनाए रखा। विवादों और चुनौतियों के बावजूद वे अपने क्षेत्र में लोकप्रिय हैं और आदिवासी समाज की प्रतिनिधि आवाज़ बनी हुई हैं।
