रानू यादव: भारत में हाल के समय में राजनीतिक उथल-पुथल, चुनाव और नई सरकारी नीतियों का मिला-जुला परिदृश्य देखने को मिला है। इस समय देश में एक तरफ जहां लोकसभा चुनाव 2024 के बाद बनी नई सरकार की नीतियों पर चर्चा हो रही है, वहीं विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।
राजनीतिक उथल-पुथल और चुनाव!
हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव 2024 के बाद किसी एक पार्टी को पूर्ण बहुमत नहीं मिला, जिससे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को अपने सहयोगियों के साथ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के रूप में सरकार बनानी पड़ी। इस गठबंधन सरकार के गठन से देश की राजनीति में एक नया दौर शुरू हुआ है, जहां केंद्र सरकार को महत्वपूर्ण फैसलों के लिए अपने सहयोगियों पर अधिक निर्भर रहना पड़ रहा है।
इसके अलावा, हाल ही में दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) चुनाव 2025 में भी राजनीतिक दलों के छात्र संगठनों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिली, जिसमें अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने अध्यक्ष सहित तीन पदों पर जीत हासिल की, जबकि भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) ने उपाध्यक्ष का पद जीता।
1.राजनीतिक उथल-पुथल
लोकसभा चुनाव 2024 के बाद भारतीय राजनीति में महत्वपूर्ण बदलाव आए हैं।
गठबंधन की सरकार:
* भाजपा के लिए चुनौती: भाजपा ने 2014 और 2019 में पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाई थी, लेकिन इस बार वह 272 के बहुमत के आंकड़े को पार नहीं कर सकी। इस कारण उसे राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के रूप में अपने सहयोगियों पर निर्भर रहना पड़ा।
* सहयोगी दलों की भूमिका: जनता दल (यूनाइटेड) के नेता नीतीश कुमार और तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) के चंद्रबाबू नायडू जैसे नेताओं ने सरकार बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इससे सरकार के लिए बड़े निर्णय लेना और भी चुनौतीपूर्ण हो गया है क्योंकि उन्हें अपने सहयोगियों की राय का भी सम्मान करना होता है।
* विपक्ष की मजबूती: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के नेतृत्व में विपक्षी गठबंधन इंडिया (I.N.D.I.A.) ने 200 से अधिक सीटें जीतीं, जिससे वे एक मजबूत विपक्ष के रूप में उभरे हैं। इससे सरकार के लिए संसद में विधेयक पास कराना या महत्वपूर्ण नीतियों पर सहमति बनाना और भी मुश्किल हो गया है।
2.चुनाव और उनका प्रभाव
चुनाव सिर्फ सत्ता पक्ष का फैसला नहीं करते, बल्कि वे नीतियों और जनमत को भी प्रभावित करते हैं।
हालिया चुनाव:
* लोकसभा चुनाव 2024: इन चुनावों में मतदाताओं ने बेरोजगारी, महंगाई, और कृषि से जुड़े मुद्दों पर अधिक ध्यान दिया, जिससे कई मौजूदा सांसदों को हार का सामना करना पड़ा।
* राज्य विधानसभा चुनाव: कई राज्यों में जल्द ही चुनाव होने वाले हैं, जैसे महाराष्ट्र और हरियाणा, जहां राजनीतिक दल अपनी रणनीतियों को बदल रहे हैं।
* स्थानीय चुनाव (जैसे डूसू): ये चुनाव युवाओं के बीच राजनीतिक चेतना को दर्शाते हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) चुनाव में एबीवीपी की जीत से यह संकेत मिला है कि राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा का प्रभाव अभी भी युवा मतदाताओं के एक वर्ग के बीच बना हुआ है।
नई सरकारी नीतियाँ और उनका प्रभाव!
हाल की कुछ प्रमुख सरकारी नीतियाँ और उनका प्रभाव इस प्रकार हैं:
1. जीएसटी 2.0 (GST 2.0)
हाल ही में सरकार ने जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) में बड़े बदलाव किए हैं। अब 4 स्लैब की जगह केवल दो स्लैब (5% और 18%) रह गए हैं। इस बदलाव से कई रोजमर्रा की चीज़ें, जैसे साबुन, शैम्पू, टूथपेस्ट, और यहां तक कि कुछ उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुएं (जैसे फ्रिज और एसी) भी सस्ती हो गई हैं।
इस नीति का उद्देश्य कर प्रणाली को सरल बनाना और आम लोगों पर वित्तीय बोझ कम करना है, जिससे अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिल सके।
2. जाति जनगणना और आरक्षण
कुछ राज्यों में हुई जाति जनगणना (जैसे बिहार में) ने राष्ट्रीय स्तर पर इस मुद्दे को फिर से चर्चा में ला दिया है। इसके बाद, केंद्र सरकार ने भी राष्ट्रीय स्तर पर जाति जनगणना कराने की घोषणा की है। इस कदम से भविष्य में आरक्षण और सामाजिक न्याय से जुड़ी नीतियों में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं, जो भारतीय राजनीति में एक नई बहस को जन्म दे रहा है।
3. किसान और कृषि नीतियाँ
किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र को आधुनिक बनाने के लिए सरकार ने कई कदम उठाए हैं। कृषि उपकरणों और उर्वरकों पर जीएसटी दरों में कटौती की गई है, जिससे किसानों के लिए लागत कम हो रही है। इसके अलावा, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना जैसी नीतियां किसानों को मौसम से होने वाले नुकसान से बचाने में मदद कर रही हैं।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, भारत में वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य गतिशील और बदलावों से भरा हुआ है। नई गठबंधन सरकार को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, वहीं नई नीतियां देश की आर्थिक और सामाजिक दिशा को प्रभावित कर रही हैं। चुनाव, चाहे वह राष्ट्रीय हों या स्थानीय, लोकतंत्र में जनता की भागीदारी और उनकी आकांक्षाओं को दर्शाते रहते हैं।
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