रिपोर्ट, काजल जाटव: मध्यप्रदेश की राजनीति में नई युवा पीढ़ी के नेताओं में एक नाम तेजी से सामने आया है—डॉ. विक्रांत भूरिया। डॉक्टर होने के साथ-साथ समाजसेवी भी, डॉ. भूरिया ने न सिर्फ मेडिकल फील्ड में अपना हाथ बंटाया, बल्कि राजनीति के जरिये भी लोगों की सेवा का रास्ता चुना। 2023 में पहली बार झाबुआ विधानसभा सीट से कांग्रेस के टिकट पर खड़े होकर जीत हासिल की, और आदिवासी क्षेत्र में कांग्रेस की पकड़ को मजबूत किया।
प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
24 फरवरी 1984 को भोपाल में जन्मे विक्रांत भूरिया के पिता, कांतीलाल भूरिया, कांग्रेस में प्रमुख नेता रहे हैं। खास माहौल में पलने-बढ़ने वाले विक्रांत का झुकाव शुरू से ही सेवा के साथ रहा। उन्होंने मेडिकल की पढ़ाई में उल्लेखनीय सफलता हासिल की।
- एम.बी.बी.एस. और एम.एस. (जनरल सर्जरी) की डिग्री हासिल की।
- छात्र जीवन में गोल्ड मेडल भी प्राप्त किया।
उनकी शादी डॉ. शीना भूरिया से हुई है। उनके दो बच्चे हैं—एक बेटा और एक बेटी।
चिकित्सा और समाजसेवा
राजनीति में कदम रखने से पहले, डॉ. भूरिया ने अपनी मेडिकल प्रैक्टिस से समाज की मदद की। गरीबों को ईमानदारी से सेवा देना उनकी प्राथमिकता रही।
उनका सेवाभाव का एक बड़ा हिस्सा तब दिखा जब उन्होंने एक हवाई जहाज में यात्रियों की जान बचाने के लिए तुरंत कदम उठाए। गरज के साथ मेडिकल मदद दी, जो राष्ट्रीय खबर बन गई। इंडिगो ने भी उनका धन्यवाद किया।
राजनीतिक सफर
डॉ. विक्रांत भूरिया का राजनीति में शुरुआत युवाओं के बीच से ही हुई।
- 2010-11: जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन का प्रदेश अध्यक्ष।
- 2020-2024: मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष।
युवा कांग्रेस में रहते हुए, उन्होंने बेरोजगारी, शिक्षा, स्वास्थ्य और किसानों के मुद्दों को जोरशोर से उठाया। उनकी नेतृत्व में संघर्ष और जुझारूपन साफ देखा जा सकता है।
विधानसभा चुनाव 2023
झाबुआ क्षेत्र आदिवासी समुदाय का प्रमुख इलाका है और कांग्रेस का पारंपरिक गढ़ रहा है। 2023 के चुनाव में, कांग्रेस ने डॉ. विक्रांत भूरिया को उम्मीदवार बनाया।
उनके चुनाव अभियान की खास बात ये थी:
- जनसंर्पक पर खास ध्यान।
- आदिवासी युवाओं और महिलाओं को साथ जोड़ा।
- अपने डॉक्टर वाले छवि को समाज सेवा से जोडऩे का प्रयास।
इसी वजह से, वह पहली बार विधायक चुने गए। उनकी जीत दर्शाती है कि जनता युवा और नए चेहरे को मौका देना चाहती है।
काम और प्राथमिकताएँ
विधायक बनने के बाद डॉ. भूरिया ने जिन मुद्दों पर ध्यान दिया है, उनमें खासकर ये हैं:
- स्वास्थ्य सेवाएँ – खासतौर पर आदिवासी इलाकों में अस्पताल और स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाना।
- शिक्षा – बच्चों के बेहतर स्कूल, कॉलेज पहुंचाना और खासकर लड़कियों की पढ़ाई पर जोर देना।
- कृषि और रोज़गार – किसानों के लिए नई योजनाएं लाना और युवाओं को रोजगार दिलाने पर फोकस।
- आदिवासी अधिकार – उनके परंपरागत अधिकारों और रीति-रिवाजों की सुरक्षा करना।
विवाद और आलोचनाएँ
हालांकि डॉ. भूरिया को एक जागरूक और समाजसेवक नेता माना जाता है, लेकिन राजनीति की दुनिया में कदम रखते ही उन्हें कुछ विवादों का सामना भी करना पड़ा है।
- विपक्ष ने आरोप लगाया कि उनके राजनीतिक सफर का लाभ उनके पिता कांतीलाल भूरिया की विरासत से है।
- कुछ लोगों का मानना है कि एक डॉक्टर से नेता बने भूरिया को प्रशासन का बड़ा अनुभव नहीं है।
- चुनाव के समय उन पर यह भी आरोप लगे कि वे स्वास्थ्य के बजाय राजनीति पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं।
इन आलोचनाओं के बावजूद, जनता ने उन्हें बहुत समर्थन दिया और विधानसभा का टिकट भी दिलाया।
डॉ. विक्रांत भूरिया का रास्ता दिखाता है कि अगर किसी में सेवा का जज़्बा और नेतृत्व की भूख हो, तो वह समाज में बड़ा बदलाव ला सकता है। अब डॉक्टर से नेता बने भूरिया की पहचान सिर्फ झाबुआ में ही नहीं, पूरे मध्य प्रदेश में तेजी से बन रही है।
उनके सामने बहुत सी चुनौतियाँ हैं— खासकर आदिवासी क्षेत्रों की मूलभूत समस्याएं, बेरोज़गारी, शिक्षा और स्वास्थ्य की कमी। लेकिन उनकी युवा ऊर्जा, जोश और जनता से सीधे जुड़ाव यह उम्मीद जगाता है कि वे आने वाले समय में प्रदेश की राजनीति में बड़े नेताओं में शुमार होंगे।
