रिपोर्ट, काजल जाटव: भारतीय राजनीति में कई ऐसे लोग हैं जो अपनी शिक्षा, बिजनेस और सामाजिक कामकाज का अनुभव लेकर आगे आए हैं। मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले के बड़वानी विधानसभा क्षेत्र से 2023 में पहली बार विधायक बने राजन मंडलोई इनमें से एक हैं। उनकी जीत भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के उम्मीदवार के रूप में हुई और इससे इलाके की राजनीति में नई जान आई।
शुरुआती जिंदगी और पढ़ाई
राजन मंडलोई का जन्म 5 जुलाई 1973 को आली, कुंठी में हुआ था, जो बड़वानी जिले का हिस्सा है। उनके पिता का नाम श्री हरेसिंह मंडलोई है। घर वाले उनके अंदर शिक्षा और समाजसेवा का जज्बा जगाने में मददगार साबित हुए। उन्होंने खूब मेहनत से अपनी पढ़ाई की और बी.ई., एम.बी.ए., एम.ए. और एल.एल.बी. जैसे कई कोर्स पास किए। इन सभी डिग्री ने उन्हें न सिर्फ टेक्निकल और कॉरपोरेट कौशल दिए, बल्कि कानून और सामाजिक मुद्दों को समझने की भी ताकत दी।
परिवार और निजी जिंदगी
राजन मंडलोई शादीशुदा हैं, और उनकी पत्नी, श्रीमती पल्लवी मंडलोई, सामाजिक कामों में उनका साथ देती हैं। उनके दो बच्चे हैं—एक बेटा और एक बेटी। पारिवारिक जीवन में सरलता और सादगी उनके व्यक्तित्व को और मजबूत बनाती है।
व्यवसाय और समाजसेवा राजन मंडलोई ने अपने करियर में बिजनेस और खेती दोनों को अपनाया है। उनके पास व्यापार और खेती का तजुर्बा होने के चलते वे लोगों की रोजमर्रा की छोटी-बड़ी परेशानियों को समझते हैं।
समाजसेवा का तंत्र
उनकी पहचान का बड़ा हिस्सा है समाजसेवा। वे शिक्षा का विस्तार, गांव-देहात का विकास, युवाओं के लिए रोजगार, और स्वास्थ्य सेवाओं पर ध्यान देते रहे हैं। गरीब और वंचित तबके की मदद करना, और समाज में न्याय को बढ़ावा देना, उनकी प्राथमिकता रही है।
राजनैतिक सफर
उनका राजनीतिक दौर 2023 में शुरू हुआ, जब उन्होंने पहली बार बड़वानी से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का टिकट लेकर चुनाव लड़ा। चुनाव में उनका निशाना था जनता की भलाई और विकास, और उन्होंने अपनी सरलता, पढ़ाई-लिखाई और जनता की सेवा को मुख्य मुद्दा बनाया। जनता ने उन्हें पहली ही बार में विधायक बना दिया। यह जीत कांग्रेस के लिए भी खास थी, क्योंकि यह सीट अक्सर राजनीतिक समीकरणों में जटिल मानी जाती थी।
जनता के बीच काम और पहल
विधायक बनने के बाद, राजन मंडलोई ने अपने इलाके के लिए कई छोटे-बड़े फैसले लिए :
- गांवों में सड़क और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने पर जोर दिया।
- शिक्षा संस्थानों को जरूरी संसाधन पहुंचाने और गरीब छात्रों का सहारा बनने का प्रयास किया।
- किसानों को उनकी फसलें बेचने में मदद और सही कीमत दिलाने के लिए कदम उठाए।
- पास के स्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति सुधारने खातिर काम किया।
- युवाओं को रोजगार और खुद का काम शुरू करने के मौके बताने पर ध्यान दिया।
उनका अंदाज सहज और लोगों के साथ खुला है। वे सीधे जनता से मिलते-जाते रहते हैं और इलाके की समस्या विधानसभा में उठाने के लिए तैयार रहते हैं।
वोटिंग और चुनाव का प्रदर्शन
2023 के विधानसभा चुनाव में बड़वानी सीट पर मुकाबला कड़ा था। बीजेपी और कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर थी। राजन मंडलोई ने कांग्रेस की तरफ से लड़ाई लड़ी और अपने प्रतिद्वंद्वी को हराकर जीत पाई।
उनके समर्थन में खासतौर पर ग्राम जनता, किसान समुदाय और पढ़े लिखे युवा लोग खड़े थे। उनकी पढ़ाई-लिखाई और साफ-सुथरी छवि ने उन्हें और लाभ पहुंचाया।
विवाद और आलोचनाएँ
चुनाव तक के उनके राजनीतिक सफर में, राजन मंडलोई कभी विवादों में नहीं फंसे। यह उनकी अच्छी बात मानी जाती है। हां, कुछ विरोधियों ने आरोप लगाया कि वे नए हैं और उनके पास ज्यादा प्रशासनिक अनुभव नहीं है। साथ ही, कभी-कभी क्षेत्रीय विकास और सरकारी योजनाओं के लागू करने को लेकर उनकी आलोचना भी हुई।
ये सारी बातें ज्यादा गंभीर नहीं हैं और लोकतंत्र का हिस्सा हैं।
भविष्य की योजना
राजन मंडलोई का फोकस आने वाले समय में शिक्षा, खेती और स्वास्थ्य पर रहेगा। वे चाहते हैं कि बड़वानी में उच्च शिक्षा और नई तकनीक के कोर्स ज्यादा हों। साथ ही, ग्रामीण इलाकों में किसानों को नई तकनीक से जोड़ने और युवाओं के लिए काम के मौके बनाने पर काम कर रहे हैं।
राजन मंडलोई ने अपनी शुरुआत शिक्षा और समाजसेवा से की। 2023 में पहली बार विधायक बनकर राजनीति में कदम रखा। उनकी साफ-सुथरी छवि, पढ़ाई-लिखाई का बैकग्राउंड और जनता से संपर्क ने उन्हें जल्दी ही लोकप्रिय बना दिया। अभी उनका राजनीतिक सफर शुरूआत ही है, लेकिन उनके काम करने का तरीका और सोच बताता है कि वे आने वाले समय में न सिर्फ बड़वानी, बल्कि पूरे मध्य प्रदेश में भी अपनी मजबूत पहचान बना सकते हैं।
