कामना कासोटिया भोपाल:

लखनादौन से तीसरी बार विधायक बने योगेन्द्र सिंह (बाबा), 18,621 मतों से दर्ज की जीत

लखनादौन विधानसभा (क्रमांक 117, अनुसूचित जनजाति सीट) से कांग्रेस प्रत्याशी योगेन्द्र सिंह (बाबा) ने 2023 के चुनाव में शानदार जीत हासिल की है। लगातार तीसरी बार जनता का भरोसा जीतते हुए उन्होंने भाजपा उम्मीदवार विजय उइके को 18,621 मतों से हराया। सिंह को कुल 1,14,519 मत मिले, जबकि उइके को 95,898 मत पर संतोष करना पड़ा।

यह जीत उनके राजनीतिक करियर की सबसे बड़ी जीत मानी जा रही है। 2013 और 2018 के चुनावों में भी उन्होंने विजय उइके को मात दी थी, लेकिन उस समय का मार्जिन क्रमशः लगभग 12,000 के आसपास रहा था। इस बार बढ़ते समर्थन ने यह संकेत दिया है कि क्षेत्र की जनता उनके विकास कार्यों और जनसंपर्क से प्रभावित है।

सामाजिक पृष्ठभूमि

योगेन्द्र सिंह का जन्म 1 फरवरी 1972 को रायपुर जिले के सरायपाली में हुआ। पिता स्वर्गीय बी. बी. सिंह के संस्कार और कृषि से जुड़े पारिवारिक जीवन ने उन्हें गाँव और किसानों की समस्याओं से जोड़े रखा। एम.ए. (समाजशास्त्र) तक शिक्षित सिंह का मुख्य व्यवसाय खेती है। वे विवाहित हैं, पत्नी का नाम प्रीति सिंह है और दो पुत्रियों के पिता हैं।

राजनीति की शुरुआत से विधानसभा तक

सिंह ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत संगठनात्मक पदों से की। वे मध्यप्रदेश आदिवासी सेवा मंडल, भोपाल के कार्यकारी अध्यक्ष रह चुके हैं। घनसौर ब्लॉक सिवनी में पीसीसी डेलीगेट और प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अनुसूचित जनजाति विभाग के महामंत्री भी रहे।

2013 में पहली बार विधायक बने, फिर 2018 में जनता ने दोबारा भरोसा जताया। 2023 में तीसरी बार जीत ने उनके नेतृत्व को और मजबूत कर दिया।

विकास कार्य और उपलब्धियाँ

पिछले दस सालों में सिंह ने अपने क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण परियोजनाएँ स्वीकृत कराई हैं:

  • शिक्षा के क्षेत्र में: लखनादौन में एक केंद्रीय विद्यालय (केन्द्रीय विद्यालय) और घनसौर ब्लॉक में कॉलेज भवन की स्वीकृति।
  • स्वास्थ्य सुविधाओं में: 100 बिस्तरों वाला अस्पताल, घनसौर ब्लॉक में ऑक्सीजन प्लांट की व्यवस्था।
  • जल सिंचाई: गाँवों में पेयजल पहुँचाने और सिंचाई की सुविधा बढ़ाने के लिए लगभग 12 बाँधों का निर्माण।

इन कार्यों ने ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्र के लोगों को राहत दी है और यही उनकी लोकप्रियता का आधार भी बना।

जनता की अपेक्षाएँ

लखनादौन आदिवासी बहुल इलाका है, जहाँ लंबे समय तक बुनियादी सुविधाओं की कमी रही। सड़कों, बिजली, स्वास्थ्य और शिक्षा में संतुलित विकास न होने से यहाँ के लोग अक्सर उपेक्षित महसूस करते थे। सिंह के नेतृत्व में कुछ ठोस पहलें जरूर हुईं, लेकिन जनता की अपेक्षा है कि अब इन योजनाओं का लाभ हर गाँव तक पहुँचे और रोजगार के नए अवसर पैदा हों।

भविष्य की राह

योगेन्द्र सिंह की लगातार तीसरी जीत यह साबित करती है कि जनता ने उनके काम को सराहा है। 18,621 मतों के अंतर ने उनके राजनीतिक कद को और बढ़ा दिया है। अब चुनौती होगी कि वे चुनावी वादों को पूरा करें और विकास की योजनाओं को जमीन पर उतारें।

लखनादौन की जनता उम्मीद कर रही है कि शिक्षा, स्वास्थ्य और सिंचाई की सुविधाओं के साथ अब क्षेत्र में उद्योग और रोज़गार के अवसर भी बढ़ेंगे।


योगेन्द्र सिंह (बाबा) की जीत न सिर्फ कांग्रेस के लिए बड़ी राहत है बल्कि यह संकेत भी है कि आदिवासी और ग्रामीण मतदाता उनके साथ खड़े हैं। जनता ने जिस भरोसे के साथ उन्हें लगातार तीन बार विधानसभा भेजा है, उसे निभाना ही आने वाले समय में उनकी सबसे बड़ी कसौटी होगी।

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